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Shamli News: मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए संतुलित खाद का करें प्रयोग
Thu, 29 Oct 2026 01:36 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Thu, 29 Oct 2026 01:36 AM IST
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शामली। किसानों को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और खेती की लागत कम करने के प्रति जागरूक करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र पर कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डॉ. संदीप ने किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने और प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मिट्टी स्वस्थ रहेगी तो फसलों की पैदावार और गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
डॉ. संदीप ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों का असंतुलित प्रयोग मिट्टी की सेहत पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। किसानों को जरूरत के अनुसार खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल करना चाहिए। गोबर की खाद, कंपोस्ट और जैविक खाद मिट्टी की संरचना सुधारने में सहायक हैं। इनके प्रयोग से मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने में मदद मिलती है।
कीटों से फसल बचाने के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन अपनाने पर भी जोर दिया। इससे अनावश्यक कीटनाशकों के प्रयोग को कम करने और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिल सकती है। केंद्र प्रभारी ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण टिकाऊ खेती के लिए जरूरी है। किसान वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ उत्पादन लागत कम कर सकते हैं। उन्होंने किसानों से मृदा परीक्षण कराने और संतुलित उर्वरक प्रयोग को खेती का हिस्सा बनाने की अपील की।
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कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डॉ. संदीप ने किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने और प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मिट्टी स्वस्थ रहेगी तो फसलों की पैदावार और गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
डॉ. संदीप ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों का असंतुलित प्रयोग मिट्टी की सेहत पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। किसानों को जरूरत के अनुसार खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल करना चाहिए। गोबर की खाद, कंपोस्ट और जैविक खाद मिट्टी की संरचना सुधारने में सहायक हैं। इनके प्रयोग से मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने में मदद मिलती है।
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कीटों से फसल बचाने के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन अपनाने पर भी जोर दिया। इससे अनावश्यक कीटनाशकों के प्रयोग को कम करने और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिल सकती है। केंद्र प्रभारी ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण टिकाऊ खेती के लिए जरूरी है। किसान वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ उत्पादन लागत कम कर सकते हैं। उन्होंने किसानों से मृदा परीक्षण कराने और संतुलित उर्वरक प्रयोग को खेती का हिस्सा बनाने की अपील की।
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