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Shamli News: केदारनाथ में फंसे शामली के 30 श्रद्धालु, 10 निकाले गए
Sat, 03 Aug 2024 03:23 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Sat, 03 Aug 2024 03:23 AM IST
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केदारनाथ में बादल फटने से भूस्खलन होने से गौरीकुंड में फसे ऊन के युवक
शामली/ऊन/चौसाना। केदार घाटी में बुधवार की रात लिनचोली, भीमबली के बीच दो स्थानों पर बादल फटने के बाद भारी भूस्खलन पर शामली जिले के 30 श्रद्धालु फंस गए। इनमें 10 निकाले जा चुके हैं। ये सभी केदारनाथ शिवलिंग दर्शन के लिए गए थे।
जिले के चौसाना से 10, ऊन से चार और सिंभालका गांव से 11 और अन्य स्थानों के पांच श्रद्धालु केदारनाथ शिवलिंग दर्शन के लिए 27 जुलाई को गए थे। चौसाना के रहने वाले वंश मित्तल, विशांक कौशिक, दिवेश, ऋषभ गौतम, दाढ़ीनगर के कुलदीप, बोबी, चौसाना निवासी सन्नी, कमल, मनीष आदि हरिद्वार कांवड़ लेने जाने को कहकर निकले थे। मगर सभी परिजनों को बिना बताए ही केदारनाथ पहुंच गए। जहां पर बादल फटने के बाद पानी के बहाव से बचने के लिए पहाड़ी पर एक टीन शेड में 30 घंटे तक फंसे रहे।
प्रशासन की मदद नहीं मिलने पर सभी 10 श्रद्धालुओं को स्थानीय लोगों ने रास्ता दिखाकर किसी तरह पहाड़ी से सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। वहां फंसे वंश के पिता राजेश ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि सभी सुरक्षित स्थान पर पहुंच गए हैं। जल्द ही घर आ जाएंगे।
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ऊन और सिंभालका के दीपक, कुलदीप, मोंन्टी, सागर व सिंभालका के प्रताप, अनुज,प्रदीप, अंकुर, पंकज, काला आदि अभी भी फंसे हुए हैं। भूस्खलन में फंसे कुलदीप व दीपक ने बताया कि एनडीआरएफ की टीम उन्हें तार द्वारा रेस्क्यू कर शुक्रवार सुबह गौरीकुंड तक लाई, लेकिन उसके बाद कोई रेस्क्यू टीम नहीं आई। उनके अलावा शामली के विभिन्न स्थानों के पांच से अधिक श्रद्धालु और भी फंसे हुए हैं। यहां खाने पीने की भी कोई व्यवस्था तक नहीं है।
इन्होंने कहा....
केदारनाथ में बादल फटने से कई किलोमीटर का मार्ग पानी में बह गया है, जिसमें कई यात्री फंसे हैं। अभी तक सभी के सुरक्षित होने की जानकारी है। एनडीआरएफ राहत एवं बचाव कार्य में लगी है। रेस्क्यू जारी है। अब तक 900 लोगों का निकाला जा चुका है।
अनिल शुक्ला, उपजिलाधिकारी धारचूला
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जिले के चौसाना से 10, ऊन से चार और सिंभालका गांव से 11 और अन्य स्थानों के पांच श्रद्धालु केदारनाथ शिवलिंग दर्शन के लिए 27 जुलाई को गए थे। चौसाना के रहने वाले वंश मित्तल, विशांक कौशिक, दिवेश, ऋषभ गौतम, दाढ़ीनगर के कुलदीप, बोबी, चौसाना निवासी सन्नी, कमल, मनीष आदि हरिद्वार कांवड़ लेने जाने को कहकर निकले थे। मगर सभी परिजनों को बिना बताए ही केदारनाथ पहुंच गए। जहां पर बादल फटने के बाद पानी के बहाव से बचने के लिए पहाड़ी पर एक टीन शेड में 30 घंटे तक फंसे रहे।
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प्रशासन की मदद नहीं मिलने पर सभी 10 श्रद्धालुओं को स्थानीय लोगों ने रास्ता दिखाकर किसी तरह पहाड़ी से सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। वहां फंसे वंश के पिता राजेश ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि सभी सुरक्षित स्थान पर पहुंच गए हैं। जल्द ही घर आ जाएंगे।
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ऊन और सिंभालका के दीपक, कुलदीप, मोंन्टी, सागर व सिंभालका के प्रताप, अनुज,प्रदीप, अंकुर, पंकज, काला आदि अभी भी फंसे हुए हैं। भूस्खलन में फंसे कुलदीप व दीपक ने बताया कि एनडीआरएफ की टीम उन्हें तार द्वारा रेस्क्यू कर शुक्रवार सुबह गौरीकुंड तक लाई, लेकिन उसके बाद कोई रेस्क्यू टीम नहीं आई। उनके अलावा शामली के विभिन्न स्थानों के पांच से अधिक श्रद्धालु और भी फंसे हुए हैं। यहां खाने पीने की भी कोई व्यवस्था तक नहीं है।
इन्होंने कहा....
केदारनाथ में बादल फटने से कई किलोमीटर का मार्ग पानी में बह गया है, जिसमें कई यात्री फंसे हैं। अभी तक सभी के सुरक्षित होने की जानकारी है। एनडीआरएफ राहत एवं बचाव कार्य में लगी है। रेस्क्यू जारी है। अब तक 900 लोगों का निकाला जा चुका है।
अनिल शुक्ला, उपजिलाधिकारी धारचूला

केदारनाथ में बादल फटने से भूस्खलन होने से गौरीकुंड में फसे ऊन के युवक