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Shamli News: हाथों से रावण गढ़ते हैं पर दिल में राम बसते हैं

Sat, 10 Oct 2026 01:41 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Sat, 10 Oct 2026 01:41 AM IST
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They craft Ravana with their hands, yet Ram resides in their hearts.
हनुमान धाम में पुतले तैयार करते कय्यूम। संवाद
शामली। रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों को आकार देने वाले कय्यूम के हुनर के पीछे रामलीला के प्रति अगाध आस्था और समर्पण की भावना भी है। इस काम में न तो कोई मोलभाव, न मेहनताने की शर्त। पुतले तैयार होने पर आयोजक जो रकम मुट्ठी में थमा दें, उसे ही राम का प्रसाद मानकर सहर्ष माथे से लगा लेते हैं।
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मुजफ्फरनगर के काकड़ा (शाहपुर) निवासी मोहम्मद कय्यूम का शामली के सिद्ध पीठ हनुमान धाम से यह रिश्ता तीन दशकों की अटूट साझी विरासत का है। कय्यूम, उनकी पत्नी, बेटा और दोनों बेटियां एक महीने तक सब कुछ भूलकर रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले के निर्माण की साधना में लीन रहते हैं।
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दादा ने सौंपी थी विरासत, अब पोते संभाल रहे हुनर
कय्यूम बताते हैं कि रामलीला के दौरान ही रावण, कुंभकर्ण के पुतले बनाने का सिलसिला उनके दादा नाथू ने शुरू किया था। उनके बाद पिता मो. रियाजुद्दीन ने परंपरा थामी। अब वह उसी शिद्दत से इस कला को संजो रहे हैं। काम में कोई बाहरी मजदूर भी नहीं लगाया जाता।
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12 महीने शाकाहारी जीवन, गूंजता है जय श्रीराम
कय्यूम ने जब से कमान संभाली, पूरा परिवार 12 महीने शुद्ध शाकाहारी जीवन बिताता है। बच्चों को रामलीला के संवाद तक याद हैं। काम करते हुए बच्चे जय श्रीराम का जयकारा भी लगाते हैं। कय्यूम कहते हैं कि वह पांचों वक्त के नमाजी हैं, मगर दिल में राम बसते हैं।


57 साल पुरानी रामलीला में कय्यूम परिवार का 30 सालों का साथ मिसाल है। पुतले बनाने में वे कभी पैसे तय नहीं करते, जो दिया जाता है सहर्ष स्वीकार करते हैं।

- सुनील द्विवेदी, प्रधान, हनुमान धाम
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