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Shamli News: जिले का गन्ना रकबा 3660 हेक्टेयर रकबा घटा
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शामली। गन्ना उत्पादन और उत्पादकता में यूपी में शामली प्रथम स्थान पर है। लेकिन इस बार दो एक्सप्रेसवे और बाईपास में भूमि जाने और आवासीय काॅलोनी विकसित हो जाने से पिछले साल की अपेक्षा इस साल 3660 हेक्टेयर रकबा घट गया है। गन्ना सर्वेक्षण में वर्ष 2023-24 शामली जिला 76283 हेक्टेयर गन्ने का रकबा आया है, जबकि वर्ष 2022-23 में 79943 गन्ने का रकबा था।
शामली जिले में शामली, ऊन और थानाभवन गन्ना समिति में शामली, ऊन, थानाभवन, तितावी, खतौली, बुढ़ाना चीनी मिलें हैं। जिले के चीनी मिलों और गन्ना विभाग की टीम ने जीपीएस सर्वेक्षण के आधार पर वर्ष 2022-23 में जिले में गन्ने का रकबा 79943 हेक्टेयर था। जिसमें पौधा 37257 हेक्टेयर और 42686 पेड़ी गन्ना रकबा था। इस साल गत 20 अप्रैल से जिले की चीनी मिलों और गन्ना विभाग की संयुक्त टीम ने खेतों में खड़े गन्ना रकबा का सर्वेक्षण शुरू किया गया।
गन्ना सर्वेक्षण टीम के बाद गन्ने का नया आंकड़ा चौंकाने वाला आया है। गन्ना विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल की अपेक्षा इस साल गन्ना का रकबा पौधा-0.33 प्रतिशत और पेड़ी -8.29 प्रतिशत और -4.58 प्रतिशत रकबा में कमी आई है।
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एक्सप्रेसवे बाईपास में चली गई भूमि
जिले में चीनी मिलों के गन्ना विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली-देहरादून और अंबाला-शामली इकोनमिक काॅरिडोर और शामली जिले में शामली बाईपास में भूमि चली गई। इसके अवावा आवासीय कॉलोनियां विकसित होने का चीनी मिलों का रकबा घटने कारण माना जा रहा है। थानाभवन मिल क्षेत्र में अंबाला-शामली और दिल्ली देहरादून इकोनमिक कॉरीडोर और शामली में शामली और रिंगरोड में भूमि जाना भी कारण माना जा रहा है।
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शामली जिले में शामली, ऊन और थानाभवन गन्ना समिति में शामली, ऊन, थानाभवन, तितावी, खतौली, बुढ़ाना चीनी मिलें हैं। जिले के चीनी मिलों और गन्ना विभाग की टीम ने जीपीएस सर्वेक्षण के आधार पर वर्ष 2022-23 में जिले में गन्ने का रकबा 79943 हेक्टेयर था। जिसमें पौधा 37257 हेक्टेयर और 42686 पेड़ी गन्ना रकबा था। इस साल गत 20 अप्रैल से जिले की चीनी मिलों और गन्ना विभाग की संयुक्त टीम ने खेतों में खड़े गन्ना रकबा का सर्वेक्षण शुरू किया गया।
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गन्ना सर्वेक्षण टीम के बाद गन्ने का नया आंकड़ा चौंकाने वाला आया है। गन्ना विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल की अपेक्षा इस साल गन्ना का रकबा पौधा-0.33 प्रतिशत और पेड़ी -8.29 प्रतिशत और -4.58 प्रतिशत रकबा में कमी आई है।
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एक्सप्रेसवे बाईपास में चली गई भूमि
जिले में चीनी मिलों के गन्ना विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली-देहरादून और अंबाला-शामली इकोनमिक काॅरिडोर और शामली जिले में शामली बाईपास में भूमि चली गई। इसके अवावा आवासीय कॉलोनियां विकसित होने का चीनी मिलों का रकबा घटने कारण माना जा रहा है। थानाभवन मिल क्षेत्र में अंबाला-शामली और दिल्ली देहरादून इकोनमिक कॉरीडोर और शामली में शामली और रिंगरोड में भूमि जाना भी कारण माना जा रहा है।