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Shamli News: स्क्रीन की चमक में खो रहा युवाओं का मानसिक सुकून
Sat, 10 Oct 2026 01:06 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Sat, 10 Oct 2026 01:06 AM IST
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शामली। मोबाइल फोन और सोशल मीडिया की बढ़ती लत युवाओं की नींद और मानसिक सुकून छीन रही है। देर रात तक मोबाइल चलाने की आदत के कारण उनकी दिनचर्या प्रभावित हो रही है। इसका असर एकाग्रता, व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। जिला अस्पताल के मनकक्ष में इस तरह के पांच-छह केस हर महीने पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल के मनकक्ष में नियुक्त क्लीनिकल साइक्लोजिस्ट प्रेरणा पुंडीर ने बताया कि मोबाइल की लत के कारण बच्चों व युवाओं के व्यवहार में बदलाव, नींद न आना, तनाव आदि समस्या वाले पांच-छह मरीज हर महीने आ रहे हैं। ऐसे मामलों में खासतौर से युवाओं को मोबाइल का सीमित इस्तेमाल करने, नियमित दिनचर्या अपनाने, पर्याप्त नींद लेने और मानसिक परेशानी होने पर चिकित्सक की सलाह लेने के लिए प्रेरित किया जाता है। nमनोचिकित्सक न होने से मरीज परेशान : जिला अस्पताल के मनकक्ष में मानसिक परेशानियों से जूझ रहे मरीज उपचार और परामर्श के लिए पहुंचते हैं लेकिन मनोचिकित्सक न होने से गंभीर मरीजों को उपचार नहीं मिल पाता। ऐसे मरीजों को मेरठ मेडिकल रेफर किया जाता है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. मनोज कुमार अखौरी ने बताया कि मनोचिकित्सक की नियुक्ति के लिए शासन को पत्राचार किया गया है।
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जिला अस्पताल के मनकक्ष में नियुक्त क्लीनिकल साइक्लोजिस्ट प्रेरणा पुंडीर ने बताया कि मोबाइल की लत के कारण बच्चों व युवाओं के व्यवहार में बदलाव, नींद न आना, तनाव आदि समस्या वाले पांच-छह मरीज हर महीने आ रहे हैं। ऐसे मामलों में खासतौर से युवाओं को मोबाइल का सीमित इस्तेमाल करने, नियमित दिनचर्या अपनाने, पर्याप्त नींद लेने और मानसिक परेशानी होने पर चिकित्सक की सलाह लेने के लिए प्रेरित किया जाता है। nमनोचिकित्सक न होने से मरीज परेशान : जिला अस्पताल के मनकक्ष में मानसिक परेशानियों से जूझ रहे मरीज उपचार और परामर्श के लिए पहुंचते हैं लेकिन मनोचिकित्सक न होने से गंभीर मरीजों को उपचार नहीं मिल पाता। ऐसे मरीजों को मेरठ मेडिकल रेफर किया जाता है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. मनोज कुमार अखौरी ने बताया कि मनोचिकित्सक की नियुक्ति के लिए शासन को पत्राचार किया गया है।
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