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Shamli News: शामली के शिवालयों का महाभारत-मराठा कालीन से जुड़ा है इतिहास
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शामली। भगवान श्याम की नगरी के चार सिद्धपीठ शिवमंदिरों का इतिहास महाभारत और मराठा काल से जुड़ा है। द्वापर युग में योगेश्वर श्री वासुदेव कृष्ण ने कुरुक्षेत्र जाते हुए अर्जुन के साथ एक रात शामली में बिताई थी। शामली के कैराना रोड पर दक्षिण दिशा में गुलजारी वाला शिव मंदिर, श्री हनुमान धाम में मनकामेश्वर मंदिर, उत्तर दिशा में माजरा रोड पर भाकूवाला शिव मंदिर, पूरब दिशा में मोहल्ला रेलपार में सदा शिव मंदिर मंदिर है। यहां पर 40 दिन लगातार भगवान आशुतोष को जलाभिषेक करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सभी सिद्धपीठ शिव मंदिर भगवान श्री शिव की आस्था के केंद्र बने हैं।
कैराना रोड पर गुलजारी वाले शिव मंदिर का 850 साल पुराना इतिहास है। श्रावण मास में श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। गुलजारी वाला मंदिर में शिवलिंग स्वयंभू है। मंदिर का निर्माण मराठाकाल में होना बताया जाता है। खास बात यह भी है कि निर्माण इस तरह से किया गया है कि सूर्यदेव की पहली किरण सीधे शिवलिंग पर पड़ती है। श्रावण मास में हर सोमवार को शिवलिंग का विशेष शृंगार होता है। कांवड़ियों के लिए भंडारा भी होता रहा है। हर दिन यहां श्रद्धालु आते हैं। सच्चे मन से शिवलिंग का जलाभिषेक और आराधना करने वालों की भोलेनाथ मनोकामना पूरी करते हैं।
मंदिर के मंहत श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के राष्ट्रीय सचिव शैलेंद्र गिरी महाराज का कहना है कि मंदिर का निर्माण गुलजारी सेठ ने कराया था। पूरे साल में दो शिव रात्रि पर कांवड़ शिविर, एक गुरु पूर्णिमा समेत चार कार्यक्रम होते हैं। मंदिर की व्यवस्था में लगे अधिवक्ता सतेंद्र धिरयान, महेश धीमान का कहना है कि मंदिर में प्रतिदिन अन्य स्थानों के श्रद्धालु भी पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंच रहे हैं।
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-51 ऊंची है भोले नाथ की प्रतिमा
माजरा रोड स्थित सिद्धपीठ भाकूवाला शिव मंदिर इतिहास महाभारत कालीन है। यहां का तालाब बना था। 51 फीट ऊंची मूर्ति स्थापित की गई है। मंदिर में यूं तो रोज ही श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहता है, लेकिन शिवरात्रि पर हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक करते हैं। शिवरात्रि की भोर से ही मंदिरों में कांवड़ियों और श्रद्धालुओं का आगमन रहता है।
-शिवपुराण की कथा का होता आयोजन
रेलपार स्थित सदाशिव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। शहर के पंजाबी काॅलोनी निवासी दिनेश पाठक, हरि ओमपाठक ने बताया कि सदाशिव मंदिर में श्री नर्मदाश्वेर महादेव मंदिर है। बाबा देव गिरि ने मंदिर की खोज की थी। सावन मास में मंदिर में गणमन्य लोगों के सहयोग से श्री शिवपुराण कथा का आयोजन होता है। शिवरात्रि को विशेष भंडारा होता है। मंदिर का इतिहास भी मराठा कालीन है।
- श्री हनुमान धाम का महाभारत काल से जुड़ा है इतिहास
शहर के मध्य श्री हनुमान धाम में मनकामेश्वर महादेव मंदिर, हनुमान, बाबा जगन्नाथ सेत सभी मंदिरों की शृंखला बनी हुई है। मंदिर परिसर में शिव सरोवर में द्वादस ज्योर्तिलिंग की स्थापना कराई जा रही है। मंदिर हनुमान धाम के प्रधान सलील द्विवेदी ने बताया कि महाभारत कालीन सिद्ध पीठ हनुमान का मंदिर था। 46 साल पहले मंदिर का जीर्णाेद्धार कार्य शुरु हुआ। भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र जाते समय हनुमान धाम पर रात्रि विश्राम किया था। सावन मास में कांवड़ शिविर, रामलीला आयोजन, दशहरा मेला, चैत्र में बुढ़ा बाबू का मेला लगता है।
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कैराना रोड पर गुलजारी वाले शिव मंदिर का 850 साल पुराना इतिहास है। श्रावण मास में श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। गुलजारी वाला मंदिर में शिवलिंग स्वयंभू है। मंदिर का निर्माण मराठाकाल में होना बताया जाता है। खास बात यह भी है कि निर्माण इस तरह से किया गया है कि सूर्यदेव की पहली किरण सीधे शिवलिंग पर पड़ती है। श्रावण मास में हर सोमवार को शिवलिंग का विशेष शृंगार होता है। कांवड़ियों के लिए भंडारा भी होता रहा है। हर दिन यहां श्रद्धालु आते हैं। सच्चे मन से शिवलिंग का जलाभिषेक और आराधना करने वालों की भोलेनाथ मनोकामना पूरी करते हैं।
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मंदिर के मंहत श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के राष्ट्रीय सचिव शैलेंद्र गिरी महाराज का कहना है कि मंदिर का निर्माण गुलजारी सेठ ने कराया था। पूरे साल में दो शिव रात्रि पर कांवड़ शिविर, एक गुरु पूर्णिमा समेत चार कार्यक्रम होते हैं। मंदिर की व्यवस्था में लगे अधिवक्ता सतेंद्र धिरयान, महेश धीमान का कहना है कि मंदिर में प्रतिदिन अन्य स्थानों के श्रद्धालु भी पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंच रहे हैं।
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-51 ऊंची है भोले नाथ की प्रतिमा
माजरा रोड स्थित सिद्धपीठ भाकूवाला शिव मंदिर इतिहास महाभारत कालीन है। यहां का तालाब बना था। 51 फीट ऊंची मूर्ति स्थापित की गई है। मंदिर में यूं तो रोज ही श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहता है, लेकिन शिवरात्रि पर हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक करते हैं। शिवरात्रि की भोर से ही मंदिरों में कांवड़ियों और श्रद्धालुओं का आगमन रहता है।
-शिवपुराण की कथा का होता आयोजन
रेलपार स्थित सदाशिव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। शहर के पंजाबी काॅलोनी निवासी दिनेश पाठक, हरि ओमपाठक ने बताया कि सदाशिव मंदिर में श्री नर्मदाश्वेर महादेव मंदिर है। बाबा देव गिरि ने मंदिर की खोज की थी। सावन मास में मंदिर में गणमन्य लोगों के सहयोग से श्री शिवपुराण कथा का आयोजन होता है। शिवरात्रि को विशेष भंडारा होता है। मंदिर का इतिहास भी मराठा कालीन है।
- श्री हनुमान धाम का महाभारत काल से जुड़ा है इतिहास
शहर के मध्य श्री हनुमान धाम में मनकामेश्वर महादेव मंदिर, हनुमान, बाबा जगन्नाथ सेत सभी मंदिरों की शृंखला बनी हुई है। मंदिर परिसर में शिव सरोवर में द्वादस ज्योर्तिलिंग की स्थापना कराई जा रही है। मंदिर हनुमान धाम के प्रधान सलील द्विवेदी ने बताया कि महाभारत कालीन सिद्ध पीठ हनुमान का मंदिर था। 46 साल पहले मंदिर का जीर्णाेद्धार कार्य शुरु हुआ। भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र जाते समय हनुमान धाम पर रात्रि विश्राम किया था। सावन मास में कांवड़ शिविर, रामलीला आयोजन, दशहरा मेला, चैत्र में बुढ़ा बाबू का मेला लगता है।