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Shamli News: प्रधानाध्यापिका ने 47 बताई छात्रों की संख्या, मिले सिर्फ 30, बीएसए ने की निलंबित
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शामली क्षेत्र के गांव सेंहटा का प्राइमरी स्कूल ।
- फोटो : संवाद
शामली। बेसिक शिक्षा अधिकारी ने शनिवार को क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय सेंहटा का निरीक्षण किया। प्रधानाध्यापिका अंजू तोमर ने छात्रों की संख्या 47 बताई जबकि सिर्फ 30 मिले। जिस पर बीएसए ने प्रधानाध्यापिका को निलंबित कर दिया।
बेसिक शिक्षा अधिकारी लता राठौर ने बताया कि शनिवार को सिंभालका-सेंहटा बाईपास होते हुए तहसील दिवस में जा रहीं थीं। रास्ते में सेंहटा स्थित प्राथमिक स्कूल का रुककर निरीक्षण करने लगीं। निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रधानाध्यापिका अंजू तोमर से बच्चों की उपस्थिति की संख्या पूछी तो उन्होंने 47 बताई। बीएसए ने गिनती की तो वह केवल 30 छात्र ही मिले। इसके बाद खेल के सामान की जांच की तो पता चला कि खेल के सामान के बिल तो बनवाए गए हैं, लेकिन खेल का एक भी सामान स्कूल में उपलब्ध नहीं मिला। इसके बाद कंपोजिट ग्रांट की जानकारी की तो ग्रांट में मिले 25 हजार पूरे खर्च कर दिए गए, लेकिन स्कूल में कुछ नहीं कराया गया। स्कूल की स्थिति भी काफी खराब मिली है।
बीएसए ने प्रधानाध्यापिका को झूठ बोलने और खेल के सामान के फर्जी बिल दिखाने व कंपोजिट ग्रांट में भी फर्जीवाड़ा, छात्रों की संख्या कम बताने आदि खामियों पर लापरवाही मानते हुए निलंबित कर दिया। वहीं पिछले साल में भी घोटाले की आशंका को लेकर मामले की जांच बीईओ ऊन विकास कुमार को मामले की जांच सौंप दी। बीएसए ने कहा कि लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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बेसिक शिक्षा अधिकारी लता राठौर स्कूल में निरीक्षण के लिए आईं थीं, वह निरीक्षण कर चलीं गईं। उन्हें निलंबित करने के बारे में कोई जानकारी नहीं है। - अंजू तोमर, प्रधानाध्यापिका सेंहटा
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बेसिक शिक्षा अधिकारी लता राठौर ने बताया कि शनिवार को सिंभालका-सेंहटा बाईपास होते हुए तहसील दिवस में जा रहीं थीं। रास्ते में सेंहटा स्थित प्राथमिक स्कूल का रुककर निरीक्षण करने लगीं। निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रधानाध्यापिका अंजू तोमर से बच्चों की उपस्थिति की संख्या पूछी तो उन्होंने 47 बताई। बीएसए ने गिनती की तो वह केवल 30 छात्र ही मिले। इसके बाद खेल के सामान की जांच की तो पता चला कि खेल के सामान के बिल तो बनवाए गए हैं, लेकिन खेल का एक भी सामान स्कूल में उपलब्ध नहीं मिला। इसके बाद कंपोजिट ग्रांट की जानकारी की तो ग्रांट में मिले 25 हजार पूरे खर्च कर दिए गए, लेकिन स्कूल में कुछ नहीं कराया गया। स्कूल की स्थिति भी काफी खराब मिली है।
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बीएसए ने प्रधानाध्यापिका को झूठ बोलने और खेल के सामान के फर्जी बिल दिखाने व कंपोजिट ग्रांट में भी फर्जीवाड़ा, छात्रों की संख्या कम बताने आदि खामियों पर लापरवाही मानते हुए निलंबित कर दिया। वहीं पिछले साल में भी घोटाले की आशंका को लेकर मामले की जांच बीईओ ऊन विकास कुमार को मामले की जांच सौंप दी। बीएसए ने कहा कि लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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बेसिक शिक्षा अधिकारी लता राठौर स्कूल में निरीक्षण के लिए आईं थीं, वह निरीक्षण कर चलीं गईं। उन्हें निलंबित करने के बारे में कोई जानकारी नहीं है। - अंजू तोमर, प्रधानाध्यापिका सेंहटा