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Shamli News: सड़कों की हालत बद से बदत्तर, लोग परेशान

Mon, 28 Nov 2022 11:36 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 28 Nov 2022 11:36 PM IST
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The condition of the roads from bad to worse, forced to throw dust
सड़कों की हालत बद से बदतर, धूल फांकने को मजबूर
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झिंझाना। सड़क में गड्ढों की शिकायतों के बाद हालात और भी बदतर हो चुके हैं। डेयरी चौक से लेकर ऊन रोड टेलीफोन एक्सचेंज तक पूरे दिन धूल में सांस लेने को शहरवासी मजबूर हैं। अधिकारी के साथ जनप्रतिनिधि भी समस्या का हाल नहीं करा रहे।
15 नवंबर बीते 13 दिन हो गए हैं, लेकिन प्रदेश सरकार द्वारा सड़क के गड्ढे भरने के दावे खोखले साबित हुए। टूटी सड़क से पूरे दिन धूल उड़ती रहती है, जिससे कस्बे के दुकानदारों के साथ-साथ राहगीर धूल फांकने को मजबूर हो रहे हैं। पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा टूटी सड़क के कुछ गड्ढों में मिट्टी डाली जाती है, जिससे हालात और बदतर हो रहे हैं, स्थायी समाधान अब तक नहीं हुआ। वाहन चालकों को काफी परेशानी होती है। पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिशासी अभियंता सनत गुप्त ऋषि का कहना है कि दो दिन में पैचिंग का कार्य शुरू करा दिया जाएगा, जिससे सभी को डस्ट से निजात मिलेगी।
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धूल के कारण हो रही सांस की बीमारी
व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष आशीष मित्तल का कहना है कि धूल के कारण लोगों में सांस की बीमारी पनप रही है। सड़क विभाग को जल्द से जल्द सड़क बनाकर लोगों को इस समस्या से निजात दिलानी चाहिए।
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धूूल से गले में फैल रहा इंफेक्शन
चेयरमैन नौशाद कुरैशी का कहना है कि सड़क से उड़ती धूल घरों में चेन से नहीं बैठने देती। पूरे दिन घरों में महिलाओं को धूल साफ करते रहना पड़ता है, लेकिन धूल फिर से आ जाती है। धूल से गले में इंफेक्शन साथ-साथ सांस आदि बीमारियां होने के खतरे से इन्कार नहीं किया जा सकता। पीडब्ल्यूडी विभाग को टूटी सड़क को जल्द से जल्द बनाना चाहिए।
मकानों में भी आ रहीं दरारें
इमरान मिर्जा का कहना है कि सड़क में गड्ढों के कारण मकानों में दरारें पड़ गई हैं। भारी वाहन तेज गति से गुजरते हैं। खाना बनाते व खाते समय भी धूल पीछा नहीं छोड़ती। धूल में रहने से लगातार खांसी हो रही है।

धूल के कारण दुकानों पर बैठना मुश्किल
शरण सैनी का कहना है कि सुबह से शाम तक वाहनों से उड़ने वाली धूल के कारण दुकान पर बैठना मुश्किल हो रहा है। घर की दुकान है अब इसे छोड़कर कहां जाएं। जनप्रतिनिधि व अधिकारी भी इस और कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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