{"_id":"6826476dd8e9e9a02b01bfca","slug":"the-commission-imposed-a-fine-of-rs-50000-on-lic-shamli-news-c-26-1-smrt1048-141998-2025-05-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shamli News: आयोग ने एलआईसी पर लगाया 50 हजार रुपये जुर्माना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shamli News: आयोग ने एलआईसी पर लगाया 50 हजार रुपये जुर्माना
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग शामली ने बीमा क्लेम निरस्त करने पर एलआईसी को 50 हजार रुपये जुर्माना देने का आदेश सुनाया है।
कस्बा कैराना के मोहल्ला पीपलोतला निवासी प्रीति ने आयोग शामली में 14 दिसंबर 2020 को परिवाद दायर कराया था कि उसके पति अरविंद कुमार ने वर्ष 2012 में भारतीय जीवन बीमा निगम शाखा कैराना में 12 वर्ष अवधि की पॉलिसी ली थी। इसका प्रीमियम 6160 रुपये वार्षिक था। पॉलिसी लेने के समय उनके पति पूर्ण रूप से स्वस्थ थे। उनके पति ने दिसंबर 2013 से 2018 तक विधिवत प्रीमियम जमा किया। दस जनवरी 2019 को अचानक दिल की समस्या बनी और 19 जनवरी को दिल्ली जीबी पंत हॉस्पिटल में उनकी मृत्यु हो गई।
परिवादी ने अपने पति की पॉलिसी की बाबत मृत्यु दावा क्लेम एलआईसी शाखा कैराना को दिया, जिन्होंने एलआईसी के डिविजनल ऑफिस के मुख्य प्रबंधक के पास भेज दिया। 29 फरवरी 2020 को उन्हें डिविजनल ऑफिस से प्रपत्र मिला, जिसमें पॉलिसी जोखिम शुरू होने की तिथि से मृत्यु की तिथि तक तीन वर्ष की अवधि पूरी न होना बताया और स्वास्थ्य संबंधी झूठी जानकारी देने का आरोप लगाकर क्लेम को निरस्त कर दिया।
आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने परिवाद पर सुनवाई करते हुए विपक्षी को आदेश दिया कि बीमा क्लेम की धनराशि मय नौ प्रतिशत साधारण ब्याज बीमा निरस्तीकरण की तिथि से अंतिम भुगतान की तिथि तक, परिवादी को हुई मानसिक, आर्थिक व शारीरिक क्षतिपूर्ति के लिए 25 हजार रुपये और वाद का खर्च दस हजार रुपये परिवादी को देने हेतु आयोग में जमा करें। इसके अलावा विपक्षी द्वारा किए गए अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए 50 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया। अर्थदंड की धनराशि वादी को न देकर नियमानुसार राजकोष में जमा की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
शामली। न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग शामली ने बीमा क्लेम निरस्त करने पर एलआईसी को 50 हजार रुपये जुर्माना देने का आदेश सुनाया है।
कस्बा कैराना के मोहल्ला पीपलोतला निवासी प्रीति ने आयोग शामली में 14 दिसंबर 2020 को परिवाद दायर कराया था कि उसके पति अरविंद कुमार ने वर्ष 2012 में भारतीय जीवन बीमा निगम शाखा कैराना में 12 वर्ष अवधि की पॉलिसी ली थी। इसका प्रीमियम 6160 रुपये वार्षिक था। पॉलिसी लेने के समय उनके पति पूर्ण रूप से स्वस्थ थे। उनके पति ने दिसंबर 2013 से 2018 तक विधिवत प्रीमियम जमा किया। दस जनवरी 2019 को अचानक दिल की समस्या बनी और 19 जनवरी को दिल्ली जीबी पंत हॉस्पिटल में उनकी मृत्यु हो गई।
परिवादी ने अपने पति की पॉलिसी की बाबत मृत्यु दावा क्लेम एलआईसी शाखा कैराना को दिया, जिन्होंने एलआईसी के डिविजनल ऑफिस के मुख्य प्रबंधक के पास भेज दिया। 29 फरवरी 2020 को उन्हें डिविजनल ऑफिस से प्रपत्र मिला, जिसमें पॉलिसी जोखिम शुरू होने की तिथि से मृत्यु की तिथि तक तीन वर्ष की अवधि पूरी न होना बताया और स्वास्थ्य संबंधी झूठी जानकारी देने का आरोप लगाकर क्लेम को निरस्त कर दिया।
विज्ञापन
आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने परिवाद पर सुनवाई करते हुए विपक्षी को आदेश दिया कि बीमा क्लेम की धनराशि मय नौ प्रतिशत साधारण ब्याज बीमा निरस्तीकरण की तिथि से अंतिम भुगतान की तिथि तक, परिवादी को हुई मानसिक, आर्थिक व शारीरिक क्षतिपूर्ति के लिए 25 हजार रुपये और वाद का खर्च दस हजार रुपये परिवादी को देने हेतु आयोग में जमा करें। इसके अलावा विपक्षी द्वारा किए गए अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए 50 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया। अर्थदंड की धनराशि वादी को न देकर नियमानुसार राजकोष में जमा की जाएगी।
विज्ञापन