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Shamli News: आयोग ने कंपनी पर लगाया एक लाख रुपये जुर्माना
Fri, 06 Feb 2026 12:10 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Fri, 06 Feb 2026 12:10 AM IST
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शामली। न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग शामली ने लखनऊ की कंपनी द्वारा प्लाॅट पर कब्जा न देने और कैश बैक ऑफर न देने के मामले में सुनवाई की। आयोग ने कंपनी को प्लाॅट पर कब्जा दिलाने के साथ ही एक लाख रुपये जुर्माना अदा करने का आदेश सुनाया।
शहर के मोहल्ला बड़ीआल निवासी पिंकी ने आयोग में 16 नवंबर 2021 में साइन सिटी इंफ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड हेड ऑफिस गोमतीनगर लखनऊ के विरुद्ध परिवाद दायर कराया। बताया कि कंपनी द्वारा दिए गए विज्ञापन में कहा गया था कि साइंस सिटी पैराडाइज गार्डन सीतापुर रोड बक्शी का तालाब लखनऊ में 451 वर्ग मीटर दर से कैश बैक योजना के साथ प्लाॅट उपलब्ध है, जिसमें एक हजार वर्ग फीट प्लाट खरीदने पर 22,550 रुपये प्रति माह वापसी के हिसाब से 20 माह तक 4,51,000 रुपये वापस किए जाएंगे और प्लाॅट का क्षेत्रफल बढ़ने पर ऑफर धनराशि की भी उसी अनुपात में वापस की जाएगी।
प्लाॅट की बुकिंग 31 अगस्त 2019 तक करने और इसके बाद एक माह के अंदर प्लाॅट की शेष धनराशि कंपनी में जमा करना बताया गया। परिवादी के अनुसार उसने 31 अगस्त 2019 को विपक्षी के ऑफर वाले प्लाॅट देखे। उसने वी-1 वी-2 दो प्लाॅट दो हजार वर्ग फीट की बुकिंग कराई और 2,51,000 रुपये नकद जमा किए। इसके बाद एक माह के अंदर प्लाॅटों की संपूर्ण धनराशि जमा कर दी। पांच अक्तूबर 2019 को विपक्षी ने उसके हक में प्लाॅट की रजिस्ट्री तहसील में कराई। कंपनी द्वारा दिए गए ऑफर के अनुसार परिवादी को प्रति माह 45,100 रुपये प्रति माह वापस मिलने थे, लेकिन कंपनी द्वारा कैश बैक में कोई रुपये नहीं दिए। 12 नवंबर 2019 काे कंपनी से संपर्क किया तो उन्होंने अगले महीने कैश बैक की किस्त भेजने को कहा, लेकिन न तो कैश बैक दिया गया और न ही प्लाॅट पर कब्जा दिया गया।
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आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने विपक्षी कंपनी को आदेशित किया कि वह परिवादी द्वारा खरीदे गए वी-1 व वी-2 दो प्लाट का कब्जा अविलंब परिवादी को प्रदान करें। साथ ही विपक्षी द्वारा किए गए अनुचित व्यापार व्यवहार व सेवा में कमी के लिए विपक्षी पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी अधिरोपित किया।
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शहर के मोहल्ला बड़ीआल निवासी पिंकी ने आयोग में 16 नवंबर 2021 में साइन सिटी इंफ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड हेड ऑफिस गोमतीनगर लखनऊ के विरुद्ध परिवाद दायर कराया। बताया कि कंपनी द्वारा दिए गए विज्ञापन में कहा गया था कि साइंस सिटी पैराडाइज गार्डन सीतापुर रोड बक्शी का तालाब लखनऊ में 451 वर्ग मीटर दर से कैश बैक योजना के साथ प्लाॅट उपलब्ध है, जिसमें एक हजार वर्ग फीट प्लाट खरीदने पर 22,550 रुपये प्रति माह वापसी के हिसाब से 20 माह तक 4,51,000 रुपये वापस किए जाएंगे और प्लाॅट का क्षेत्रफल बढ़ने पर ऑफर धनराशि की भी उसी अनुपात में वापस की जाएगी।
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प्लाॅट की बुकिंग 31 अगस्त 2019 तक करने और इसके बाद एक माह के अंदर प्लाॅट की शेष धनराशि कंपनी में जमा करना बताया गया। परिवादी के अनुसार उसने 31 अगस्त 2019 को विपक्षी के ऑफर वाले प्लाॅट देखे। उसने वी-1 वी-2 दो प्लाॅट दो हजार वर्ग फीट की बुकिंग कराई और 2,51,000 रुपये नकद जमा किए। इसके बाद एक माह के अंदर प्लाॅटों की संपूर्ण धनराशि जमा कर दी। पांच अक्तूबर 2019 को विपक्षी ने उसके हक में प्लाॅट की रजिस्ट्री तहसील में कराई। कंपनी द्वारा दिए गए ऑफर के अनुसार परिवादी को प्रति माह 45,100 रुपये प्रति माह वापस मिलने थे, लेकिन कंपनी द्वारा कैश बैक में कोई रुपये नहीं दिए। 12 नवंबर 2019 काे कंपनी से संपर्क किया तो उन्होंने अगले महीने कैश बैक की किस्त भेजने को कहा, लेकिन न तो कैश बैक दिया गया और न ही प्लाॅट पर कब्जा दिया गया।
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आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने विपक्षी कंपनी को आदेशित किया कि वह परिवादी द्वारा खरीदे गए वी-1 व वी-2 दो प्लाट का कब्जा अविलंब परिवादी को प्रदान करें। साथ ही विपक्षी द्वारा किए गए अनुचित व्यापार व्यवहार व सेवा में कमी के लिए विपक्षी पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी अधिरोपित किया।