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इटली तक बजा गंगेरू के कंबल और बेडशीट का डंका
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कांधला क्षेत्र के गांव गंगेरू में हथकरघा पर काम करते बुनकर।
- फोटो : SHAMLI
कांधला। गांव गंगेरू में तैयार होने वाले कंबल एवं बेडशीट का डंका इटली तक बजता है। हथकरघा पर तैयार होने वाले इन उत्पादों को भारत सरकार की एसजीएसवाई योजना का सहारा मिला तो यह और भी निखर गई थी लेकिन लगातार कम होती जा रही मांग से बुनकर परेशानी का सामना कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण के दौर में तो कारोबार को जबरदस्त झटका लगा है।
गांव गंगेरू मे कंबलिया समाज के लोगों के साथ ही हजारों लोग घरों में करीब 70 वर्षों से खड्डी पर हाथ से कंबल, चादर, पायदान और सामान तैयार करते हैं। यहां बने हुए कंबल और बेडशीट की मांग विदेशों तक भी है। कभी इस गांव के ज्यादातर परिवार बुनकरी के काम में लगे हुए थे। गांव से रोजाना करीब रोजाना बीस से तीस हजार कंबल, बेडशीट आदि तैयार होते थे लेकिन अब यह संख्या सैकड़ों में ही सिमट गई है। गांव के लोगों का यही रोजगार था। इसके काम कम होने से कई घरों में आर्थिक तंगी होने लगी और लोग रोजगार के लिए दूसरे कामों में जुट गए तथा कुछ शहरों की ओर चले गए। गांव के कुछ परिवार अब भी बुनकरी से जुड़े हैं। ग्रामीण बताते हैं कि अब न तो पहले जैसी मांग है और न ही मुनाफा।
गंगेरु निवासी सरवर अंसारी ने बताया कि एसजीएसवाई के तहत वर्ष 2000 में शान एयर इंडिया स्वयं सहायता समूह का गठन किया था। समूह में 15 गरीब परिवारों से एक-एक व्यक्ति को जोड़ा गया था। समूह में दरी, कंबल, लोई, शॉल, बेडशीट, पिलो कवर बनाए जाते थे। जिला ग्राम्य विकास अभिकरण द्वारा देश के विभिन्न राज्यों में लगने वाले सरस मेलों में समूह द्वारा उत्पादित उत्पादों को भेजकर बिक्री का मौका दिया। सरवर अंसारी को ग्रामीण विकास मंत्रालय यूपी के सचिव रोहित नंदन ने 11 नवंबर 2009 में इटली के मिलान ट्रेडफेयर में यूपी के नौ जिलों के स्वयं सहायता समूह का सामान लेकर भेजा था। सरवर अंसारी ने सबसे ज्यादा बिक्री कर देश का नाम रोशन किया था। सरवर अंसारी का कहना है कि वर्तमान में उत्पादों की मांग काफी कम हो गई है। अच्छा बाजार मिले तो बुनकरों की किस्मत एक बार फिर चमक उठेगी।
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बोले बुनकर...
लॉकडाउन के चलते कारोबार चौपट हो गए। जमा पूंजी भी लॉकडाउन में घर में खर्च हो गई। अब नए सिरे से कारोबार को शुरू करना पड़ रहा है। - रियासत अंसारी, बुनकर
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लॉकडाउन के कारण माल बाहर नहीं भेज सके। जितना माल तैयार था औने-पौने दामों में बेच दिया। लॉकडाउन खुलने के बाद अब दोबारा से कारोबार की शुरुआत करेंगे। कोरोना की मार से बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। - महबूब अंसारी, बुनकर।
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लॉकडाउन के चलते सभी हथकरघा कारीगर परेशान हैं। किसी तरह से मेहनत-मजदूरी कर अपने बच्चों का पेट भर रहे हैं। लॉकडाउन के चलते जो पैसा बाहर की पार्टियों पर था, वह वापस नहीं आया है। नए सिरे से काम करेंगे, तभी पैसा वापस आएगा। -इश्तिखार आलम, बुनकर।
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गांव गंगेरू मे कंबलिया समाज के लोगों के साथ ही हजारों लोग घरों में करीब 70 वर्षों से खड्डी पर हाथ से कंबल, चादर, पायदान और सामान तैयार करते हैं। यहां बने हुए कंबल और बेडशीट की मांग विदेशों तक भी है। कभी इस गांव के ज्यादातर परिवार बुनकरी के काम में लगे हुए थे। गांव से रोजाना करीब रोजाना बीस से तीस हजार कंबल, बेडशीट आदि तैयार होते थे लेकिन अब यह संख्या सैकड़ों में ही सिमट गई है। गांव के लोगों का यही रोजगार था। इसके काम कम होने से कई घरों में आर्थिक तंगी होने लगी और लोग रोजगार के लिए दूसरे कामों में जुट गए तथा कुछ शहरों की ओर चले गए। गांव के कुछ परिवार अब भी बुनकरी से जुड़े हैं। ग्रामीण बताते हैं कि अब न तो पहले जैसी मांग है और न ही मुनाफा।
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गंगेरु निवासी सरवर अंसारी ने बताया कि एसजीएसवाई के तहत वर्ष 2000 में शान एयर इंडिया स्वयं सहायता समूह का गठन किया था। समूह में 15 गरीब परिवारों से एक-एक व्यक्ति को जोड़ा गया था। समूह में दरी, कंबल, लोई, शॉल, बेडशीट, पिलो कवर बनाए जाते थे। जिला ग्राम्य विकास अभिकरण द्वारा देश के विभिन्न राज्यों में लगने वाले सरस मेलों में समूह द्वारा उत्पादित उत्पादों को भेजकर बिक्री का मौका दिया। सरवर अंसारी को ग्रामीण विकास मंत्रालय यूपी के सचिव रोहित नंदन ने 11 नवंबर 2009 में इटली के मिलान ट्रेडफेयर में यूपी के नौ जिलों के स्वयं सहायता समूह का सामान लेकर भेजा था। सरवर अंसारी ने सबसे ज्यादा बिक्री कर देश का नाम रोशन किया था। सरवर अंसारी का कहना है कि वर्तमान में उत्पादों की मांग काफी कम हो गई है। अच्छा बाजार मिले तो बुनकरों की किस्मत एक बार फिर चमक उठेगी।
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बोले बुनकर...
लॉकडाउन के चलते कारोबार चौपट हो गए। जमा पूंजी भी लॉकडाउन में घर में खर्च हो गई। अब नए सिरे से कारोबार को शुरू करना पड़ रहा है। - रियासत अंसारी, बुनकर
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लॉकडाउन के कारण माल बाहर नहीं भेज सके। जितना माल तैयार था औने-पौने दामों में बेच दिया। लॉकडाउन खुलने के बाद अब दोबारा से कारोबार की शुरुआत करेंगे। कोरोना की मार से बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। - महबूब अंसारी, बुनकर।
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लॉकडाउन के चलते सभी हथकरघा कारीगर परेशान हैं। किसी तरह से मेहनत-मजदूरी कर अपने बच्चों का पेट भर रहे हैं। लॉकडाउन के चलते जो पैसा बाहर की पार्टियों पर था, वह वापस नहीं आया है। नए सिरे से काम करेंगे, तभी पैसा वापस आएगा। -इश्तिखार आलम, बुनकर।