फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shamli News ›   Tension again erupts among farmers on the UP-Haryana border

Shamli News: यूपी-हरियाणा सीमा पर किसानों में फिर बना तनाव

Tue, 10 Dec 2024 12:51 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Tue, 10 Dec 2024 12:51 AM IST
विज्ञापन
Tension again erupts among farmers on the UP-Haryana border
शामली, कैराना। यूपी-हरियाणा सीमा पर सरकारी जमीन को प्रशासन द्वारा कब्जामुक्त कराए जाने के बाद हरियाणा के किसानों ने दोबारा कब्जा कर लिया। इसको लेकर दोनों प्रदेशों के किसानों में फिर से तनाव बढ़ गया। किसानों ने समस्या के समाधान की मांग की। एसडीएम ने नायब तहसीलदार के नेतृत्व में टीम गठित कर दी है।
विज्ञापन

सोमवार को वरिष्ठ भाजपा नेता अनिल चौहान के साथ गांव मवी के वर्तमान प्रधान मित्रसेन व किसानों ने एसडीएम से मुलाकात की। मित्रसेन ने बताया कि यूपी-हरियाणा सीमा पर गांव मवी अहतमाल साबिक में राजस्व अभिलेखों में सरकारी भूमि दर्ज है। 26 नवंबर को तहसील प्रशासन द्वारा भूमि को हरियाणा के किसानों के चंगुल से कब्जा मुक्त कराया गया था। दो दिन बाद ही 28 नवंबर को फिर से हरियाणा के गांव तामशाबाद व रिसालु के किसानों ने उक्त भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया तथा गेहूं बो दिए गए। सूचना के बावजूद मौके पर कोई टीम नहीं पहुंची।
विज्ञापन

ग्राम प्रधान ने कहा कि भूमि पर हरियाणा के किसान बार-बार कब्जा करते हैं, जिस कारण तनाव की स्थिति बनती है। आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा कायम कराना चाहिए। एसडीएम स्वप्निल कुमार यादव ने नायब तहसीलदार के नेतृत्व में टीम गठित कर मौके पर जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

- यमुना की जलधारा बदलने से बढ़ता रहा सीमा विवाद
यूपी-हरियाणा सीमा पर स्थित भूमि को लेकर दोनों प्रदेशों के किसानों के बीच 1974 से विवाद चला आ रहा है। भूमि पर कब्जे को लेकर किसानों में खूनी संघर्ष, आगजनी और फायरिंग तक हो चुकी है। विवाद का मुख्य कारण यमुना नदी की समय के साथ बदलती जलधारा बताया जाता है। कई बार दोनों प्रदेशों के पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों के बीच वार्ता भी हो चुकी है, लेकिन समाधान नहीं निकल रहा है।

- दो बार सर्वे आफ इंडिया कर चुकी है सर्वे
किसानों के बीच चल रहे विवाद के निपटारे के लिए 1987 में सर्वे आफ इंडिया द्वारा सर्वे किया गया था। उस समय सीमा का निर्धारण कर दिया गया था। लेकिन, जलधारा बदलने के साथ ही सीमांकन पिलर गायब होने लगे, तो विवाद सुलझ नहीं पाया। यह भी कारण बताया जाता है कि हरियाणा प्रशासन के राजस्व अभिलेखों में यूपी के किसानों की भूमि दर्ज नहीं हो सकी। मामले में चंडीगढ़ हाई कोर्ट ने सर्वे आफ इंडिया को फिर से सर्वे के आदेश दिए थे। अगस्त 2023 में सर्वे आफ इंडिया की टीम ने भूमि पर सर्वे कर सीमा का निर्धारण कर दिया था।
- कोट : किसानों ने समस्या से अवगत कराया है। नायब तहसीलदार के नेतृत्व में टीम गठित की गई है। -स्वप्निल कुमार यादव, एसडीएम कैराना
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed