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विद्यार्थियों ने लिया जल संचय का संकल्प
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गढ़ीपुख्ता में देवस्थली विद्यापीठ हथछोया में पौधारोपण करते शिक्षक।
- फोटो : SHAMLI
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विद्यार्थियों ने लिया जल संचय का संकल्प
गढ़ीपुख्ता। ऊन तहसील क्षेत्र के हथछोया गांव स्थित देवस्थली विद्यापीठ में सामाजिक संस्थाओं की ओर से विश्व जल दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विद्यापीठ के अध्यक्ष प्रेम सिंह ने कहा कि संपूर्ण विश्व दोहरा जल संकट झेल रहा है। दुनिया के सामने जल की उपलब्धता व गुणवत्ता दोनों मोर्चों पर गहरा संकट है।
उन्होंने कहा कि भारत का भौगोलिक क्षेत्र दुनिया के क्षेत्रफल का 2.4 प्रतिशत है। जबकि इसकी जल आवश्यकता दुनिया की जरूरतों का 25% से अधिक है। देवस्थली गुरुकुल के प्रधानाचार्य ब्रह्मपाल सिंह ने कहा कि दुनियाभर में इस समय दो अरब से अधिक लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं हो रहा है। दूषित जल के कारण दुनिया में प्रतिवर्ष लाखों लोगों की जान जाती है। स्वच्छ जल प्रत्येक व्यक्ति का मूल अधिकार है। कोई भी सत्ता किसी को दूषित जल पीने को बाध्य नहीं कर सकती। उन्होंने चिंता जताई कि पृथ्वी पर पर उपलब्ध समस्त जल भंडारों में केवल तीन प्रतिशत ही पीने योग्य बचा है।
प्रियंका शर्मा ने छात्रों को जलयोद्धा बनने के लिए शपथ दिलाई। कार्यक्रम में सुनील कुमार, नरेंद्र कुमार, ज्योति, अपूर्वा, तनु तोमर, रूबी पंवार, संदीप, उदित कुमार, सचिन, रश्मि आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन प्रेमकुल मिशन ट्रस्ट, फ्रेंड्स ऑफ एनवायरमेंट एनिमल्स एंड पीस और सेंटर फॉर कनफ्लिक्ट एंड पीस रिसर्च दिल्ली के तत्वावधान में किया गया।
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जल है जीवन का आधार : रीता
कैराना। विश्व जल दिवस के अवसर पर मंगलवार को गांव बदलूगढ़ स्थित प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापिका रीता चौहान ने विद्यार्थियों को बताया कि जिस प्रकार जीवन के लिए प्राण वायु की आवश्यकता है, ठीक उसी प्रकार जल भी जीवन के लिए जरूरी है। जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। वैसे तो धरती पर 70 फीसदी हिस्से में जल ही जल है, लेकिन पीने लायक मात्र तीन फीसदी ही है। धरती पर बहुत कम लोगों को शुद्ध पानी प्राप्त होता है। अधिकतर बीमारी पीने के खराब पानी से ही होती हैं। उन्होंने बताया कि कैराना में भी पीने का शुद्ध पानी अधिकतर लोगों को नहीं मिल रहा हैं। जिससे क्षेत्र में हेपेटाइटिस जैसी बीमारी लोगों का जीवन समय से पहले ही समाप्त कर रही है। सबसे शुद्ध जल वर्षा का होता हैं। वर्षा का जल हमारे काम आए इसके लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए जाते हैं।
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गढ़ीपुख्ता। ऊन तहसील क्षेत्र के हथछोया गांव स्थित देवस्थली विद्यापीठ में सामाजिक संस्थाओं की ओर से विश्व जल दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विद्यापीठ के अध्यक्ष प्रेम सिंह ने कहा कि संपूर्ण विश्व दोहरा जल संकट झेल रहा है। दुनिया के सामने जल की उपलब्धता व गुणवत्ता दोनों मोर्चों पर गहरा संकट है।
उन्होंने कहा कि भारत का भौगोलिक क्षेत्र दुनिया के क्षेत्रफल का 2.4 प्रतिशत है। जबकि इसकी जल आवश्यकता दुनिया की जरूरतों का 25% से अधिक है। देवस्थली गुरुकुल के प्रधानाचार्य ब्रह्मपाल सिंह ने कहा कि दुनियाभर में इस समय दो अरब से अधिक लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं हो रहा है। दूषित जल के कारण दुनिया में प्रतिवर्ष लाखों लोगों की जान जाती है। स्वच्छ जल प्रत्येक व्यक्ति का मूल अधिकार है। कोई भी सत्ता किसी को दूषित जल पीने को बाध्य नहीं कर सकती। उन्होंने चिंता जताई कि पृथ्वी पर पर उपलब्ध समस्त जल भंडारों में केवल तीन प्रतिशत ही पीने योग्य बचा है।
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प्रियंका शर्मा ने छात्रों को जलयोद्धा बनने के लिए शपथ दिलाई। कार्यक्रम में सुनील कुमार, नरेंद्र कुमार, ज्योति, अपूर्वा, तनु तोमर, रूबी पंवार, संदीप, उदित कुमार, सचिन, रश्मि आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन प्रेमकुल मिशन ट्रस्ट, फ्रेंड्स ऑफ एनवायरमेंट एनिमल्स एंड पीस और सेंटर फॉर कनफ्लिक्ट एंड पीस रिसर्च दिल्ली के तत्वावधान में किया गया।
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जल है जीवन का आधार : रीता
कैराना। विश्व जल दिवस के अवसर पर मंगलवार को गांव बदलूगढ़ स्थित प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापिका रीता चौहान ने विद्यार्थियों को बताया कि जिस प्रकार जीवन के लिए प्राण वायु की आवश्यकता है, ठीक उसी प्रकार जल भी जीवन के लिए जरूरी है। जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। वैसे तो धरती पर 70 फीसदी हिस्से में जल ही जल है, लेकिन पीने लायक मात्र तीन फीसदी ही है। धरती पर बहुत कम लोगों को शुद्ध पानी प्राप्त होता है। अधिकतर बीमारी पीने के खराब पानी से ही होती हैं। उन्होंने बताया कि कैराना में भी पीने का शुद्ध पानी अधिकतर लोगों को नहीं मिल रहा हैं। जिससे क्षेत्र में हेपेटाइटिस जैसी बीमारी लोगों का जीवन समय से पहले ही समाप्त कर रही है। सबसे शुद्ध जल वर्षा का होता हैं। वर्षा का जल हमारे काम आए इसके लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए जाते हैं।