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ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: अटक रहे आवेदन, फिसल रही जमिले की रैकिंग
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शामली। कारोबारी सहूलियतों से जुड़े काम में जिले की रैकिंग 13 पायदान गिर गई है। इससे साफ है कि जनपद में उद्योगों से जुड़ी समस्याओं का निस्तारण नहीं हो रहा है। उनके आवेदन लंबित होने के कारण जनपद की रैकिंग में गिरावट आई है। स्थिति यह है कि जनपद में उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक का पद स्वीकृत नहीं है। सहायक आयुक्त को यहां संबद्ध किया गया है, लेकिन वह भी रोजाना नहीं बैठते।
ईज ऑफ डूईंग बिजनेस की रैकिंग में शामली जनपद नौ से 22वें पायदान पर आ गया है। जिले की रैंकिंग गिरने के पीछे उद्यमियों की समस्याओं के निस्तारण को वजह बताया जा रहा है। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के शामली चेयरमैन अशोक मित्तल कहते हैं कि कई विभागों में उद्यमियों के प्रार्थना पत्र लंबित पड़े रहते हैं।
विद्युत निगम और प्रदूूषण नियंत्रण बोर्ड की स्थिति सबसे खराब है। शामली इंडस्ट्रीज एस्टेट मैनुफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष अंकित गोयल का कहना है कि रैंकिंग में फिसलने का मतलब है कि जनपद में उद्योगों से जुड़े काम आसानी से नहीं हो रहे हैं। प्रार्थनापत्रों का निस्तारण नहीं किया जा रहा और व्यापारियों को सहूलियतें नहीं मिल रहीं।
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उद्योग केंद्र का कार्यालय है लेकिन अधिकारी नहीं
शामली बनने के बाद यहां उद्योग केंद्र का कार्यालय तो संचालित कर दिया गया लेकिन उद्योग केंद्र के उपायुक्त का पद सृजित नहीं हुआ। सहायक आयुक्त डॉ. बनवारी लाल को शामली की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन वह भी रोजाना यहां नहीं बैठते हैं। आईआईए शामली के चेयरमैन अशोक मित्तल का कहना है कि उद्यमियों से जुड़ी सभी शिकायतें उद्योग केंद्र के माध्यम से जाती हैं लेकिन अधिकारियों के यहां मौजूद नहीं रहने से समस्या आ रही है।
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बिजली और प्रदूषण से जुड़े मामले लंबित
जिले में बिजली और प्रदूषण से जुड़े मामले लंबित चल रहे हैं। सहायक आयुक्त उद्योग डॉ. बनवारी लाल का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जुड़े कुछ मामले तो जिला स्तर से निस्तारित हो जाते हैं, लेकिन कुछ शासन स्तर को भेजे जाते हैं। इसी तरह विद्युत निगम में उद्यमी आवेदन करते हैं, लेकिन स्टीमेट आदि जमा करने में देेरी हो जाती है। इससे आवेदन लंबित पड़े रहते हैं। इसलिए जिले की रैंकिंग में गिरावट आई है।
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ईज ऑफ डूईंग बिजनेस की रैकिंग में शामली जनपद नौ से 22वें पायदान पर आ गया है। जिले की रैंकिंग गिरने के पीछे उद्यमियों की समस्याओं के निस्तारण को वजह बताया जा रहा है। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के शामली चेयरमैन अशोक मित्तल कहते हैं कि कई विभागों में उद्यमियों के प्रार्थना पत्र लंबित पड़े रहते हैं।
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विद्युत निगम और प्रदूूषण नियंत्रण बोर्ड की स्थिति सबसे खराब है। शामली इंडस्ट्रीज एस्टेट मैनुफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष अंकित गोयल का कहना है कि रैंकिंग में फिसलने का मतलब है कि जनपद में उद्योगों से जुड़े काम आसानी से नहीं हो रहे हैं। प्रार्थनापत्रों का निस्तारण नहीं किया जा रहा और व्यापारियों को सहूलियतें नहीं मिल रहीं।
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उद्योग केंद्र का कार्यालय है लेकिन अधिकारी नहीं
शामली बनने के बाद यहां उद्योग केंद्र का कार्यालय तो संचालित कर दिया गया लेकिन उद्योग केंद्र के उपायुक्त का पद सृजित नहीं हुआ। सहायक आयुक्त डॉ. बनवारी लाल को शामली की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन वह भी रोजाना यहां नहीं बैठते हैं। आईआईए शामली के चेयरमैन अशोक मित्तल का कहना है कि उद्यमियों से जुड़ी सभी शिकायतें उद्योग केंद्र के माध्यम से जाती हैं लेकिन अधिकारियों के यहां मौजूद नहीं रहने से समस्या आ रही है।
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बिजली और प्रदूषण से जुड़े मामले लंबित
जिले में बिजली और प्रदूषण से जुड़े मामले लंबित चल रहे हैं। सहायक आयुक्त उद्योग डॉ. बनवारी लाल का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जुड़े कुछ मामले तो जिला स्तर से निस्तारित हो जाते हैं, लेकिन कुछ शासन स्तर को भेजे जाते हैं। इसी तरह विद्युत निगम में उद्यमी आवेदन करते हैं, लेकिन स्टीमेट आदि जमा करने में देेरी हो जाती है। इससे आवेदन लंबित पड़े रहते हैं। इसलिए जिले की रैंकिंग में गिरावट आई है।