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विश्व मलेरिया दिवस पर विशेष : स्टाफ और संसाधनों की कमी से जूझ रहा मलेरिया विभाग
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शामली। जिला मलेरिया विभाग स्टाफ और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। विभाग के पास न तो अपनी लैब है और न ही पर्याप्त संसाधन। विभाग में महत्वपूर्ण पद रिक्त चल रहे हैं। ऐसी स्थिति में अगर जिले में मलेरिया का प्रकोप फैलता है तो उस पर नियंत्रण पाना आसान नहीं होगा।
हर साल 25 अप्रैल का दिन विश्व मलेरिया दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को मलेरिया बुखार से बचाव के लिए जागरूक करना है। मलेरिया मच्छर के काटने से होता है, इसलिए मच्छरोें के काटने से बचाव करना जरूरी है। जिले में इस समय मच्छर बड़ी संख्या में पनप रहे हैं। इसकी वजह से मच्छर जनित रोग मलेरिया आदि का प्रकोप फैलने की आशंका बन रही है। संचारी रोग नियंत्रण माह और दस्तक अभियान के तहत लोगों को मच्छरों से बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा है, लेकिन इसके बाद भी मलेरिया के केस लगातार सामने आ रहे हैं। इस साल जनवरी से मार्च तक मलेरिया के सात केस मिल चुके हैं। साल 2022 में मलेरिया के 92 केस मिले थे, जबकि 2021 में 57 केस सामने आए थे। वहीं जिला मलेरिया विभाग में महत्वपूर्ण पद खाली पड़े होने से स्टाफ की कमी चल रही है। इसके अलावा विभाग के पास अपनी प्रयोगशाला नहीं है, जो नमूनों की स्वयं जांच कर सके। नमूनों की जांच के लिए सीएचसी पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे रिपोर्ट आने में समय कम लगता है। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विनय कुमार ने बताया कि मलेरिया से बचने के मच्छरों के काटने से बचाव के तरीके अपनाने चाहिएं। विभाग के पास जो स्टाफ व संसाधन हैं, उसी से मलेरिया पर नियंत्रण रखने की पूरी कोशिश रहती है।
-मलेरिया विभाग में स्टाफ की ये है स्थिति
जिला मलेरिया विभाग में जिला मलेरिया अधिकारी है, लेकिन सहायक मलेरिया अधिकारी के दोनों पद खाली चल रहे हैं। वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक का पद भी रिक्त चल रहा है। मलेरिया निरीक्षक के पांच पदों में तीन की नियुक्ति है। फील्ड वर्करों में पांच में तीन की नियुक्ति है। वरिष्ठ प्रयोगशाला में तकनीशियन नहीं है। इनका कार्य कुड़ाना सीएचसी पर तैनात सहायक प्रयोगशाला तकनीशियन देखते हैं। विभाग में वरिष्ठ और कनिष्ठ लिपिक की भी तैनाती नहीं है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी व स्वीपर के पद भी रिक्त चल रहे हैं।
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मलेरिया के लक्षण:
-ठंड लगने के साथ तेज बुखार होना।
- सिर में दर्द होना।
- उल्टी होना ।
- चक्कर आना, थकान होना।
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बचाव:
मच्छर से बचाव के लिए सोते समय मच्छरदानी लगाएं।
- स्वस्थ, पौष्टिक और सुपाच्य भोजन करें।
- घरों व आसपास साफ-सफाई रखें।
-घरों के आसपास पानी इकट्ठा न होने दें।
-रुके हुए पानी में जला हुआ मोबिल ऑयल या कीटनाशक दवा का छिड़काव करें।
- बुखार होने पर चिकित्सक की सलाह से उपचार कराएं।
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हर साल 25 अप्रैल का दिन विश्व मलेरिया दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को मलेरिया बुखार से बचाव के लिए जागरूक करना है। मलेरिया मच्छर के काटने से होता है, इसलिए मच्छरोें के काटने से बचाव करना जरूरी है। जिले में इस समय मच्छर बड़ी संख्या में पनप रहे हैं। इसकी वजह से मच्छर जनित रोग मलेरिया आदि का प्रकोप फैलने की आशंका बन रही है। संचारी रोग नियंत्रण माह और दस्तक अभियान के तहत लोगों को मच्छरों से बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा है, लेकिन इसके बाद भी मलेरिया के केस लगातार सामने आ रहे हैं। इस साल जनवरी से मार्च तक मलेरिया के सात केस मिल चुके हैं। साल 2022 में मलेरिया के 92 केस मिले थे, जबकि 2021 में 57 केस सामने आए थे। वहीं जिला मलेरिया विभाग में महत्वपूर्ण पद खाली पड़े होने से स्टाफ की कमी चल रही है। इसके अलावा विभाग के पास अपनी प्रयोगशाला नहीं है, जो नमूनों की स्वयं जांच कर सके। नमूनों की जांच के लिए सीएचसी पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे रिपोर्ट आने में समय कम लगता है। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विनय कुमार ने बताया कि मलेरिया से बचने के मच्छरों के काटने से बचाव के तरीके अपनाने चाहिएं। विभाग के पास जो स्टाफ व संसाधन हैं, उसी से मलेरिया पर नियंत्रण रखने की पूरी कोशिश रहती है।
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-मलेरिया विभाग में स्टाफ की ये है स्थिति
जिला मलेरिया विभाग में जिला मलेरिया अधिकारी है, लेकिन सहायक मलेरिया अधिकारी के दोनों पद खाली चल रहे हैं। वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक का पद भी रिक्त चल रहा है। मलेरिया निरीक्षक के पांच पदों में तीन की नियुक्ति है। फील्ड वर्करों में पांच में तीन की नियुक्ति है। वरिष्ठ प्रयोगशाला में तकनीशियन नहीं है। इनका कार्य कुड़ाना सीएचसी पर तैनात सहायक प्रयोगशाला तकनीशियन देखते हैं। विभाग में वरिष्ठ और कनिष्ठ लिपिक की भी तैनाती नहीं है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी व स्वीपर के पद भी रिक्त चल रहे हैं।
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मलेरिया के लक्षण:
-ठंड लगने के साथ तेज बुखार होना।
- सिर में दर्द होना।
- उल्टी होना ।
- चक्कर आना, थकान होना।
बचाव:
मच्छर से बचाव के लिए सोते समय मच्छरदानी लगाएं।
- स्वस्थ, पौष्टिक और सुपाच्य भोजन करें।
- घरों व आसपास साफ-सफाई रखें।
-घरों के आसपास पानी इकट्ठा न होने दें।
-रुके हुए पानी में जला हुआ मोबिल ऑयल या कीटनाशक दवा का छिड़काव करें।
- बुखार होने पर चिकित्सक की सलाह से उपचार कराएं।