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पंजाब में तैनात सैनिक की बुखार से मौत, पार्थिव शरीर गांव में पहुंचा
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Mon, 03 Oct 2016 03:44 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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ऊन। पंजाब में तैनात सैनिक की बुखार के चलते मौत हो गई। रविवार को उसका पार्थिव शरीर लेकर सेना के जवान गांव में पहुंचे। गागौर रोड पर स्थित श्मशान घाट में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। जवान की दोनों बेटियों ने मुखाग्नि दी।
कस्बा निवासी प्रदीप (37) पुत्र जिले सिंह सेना की 72 आर्म्ड रेजीमेंट में हवलदार के पद पर पंजाब के संगरुर में तैनात था। पाकिस्तान से बढ़ते तनाव के कारण सेना सीमावर्ती के क्षेत्रों में युद्धाभ्यास कर रही थी। इस दौरान प्रदीप को बुखार हो गया। उसका उपचार सेना के चंडीगढ़ अस्पताल में चला रखा था। लाख कोशिशों के बाद भी उसकी तबीयत में सुधार नहीं हुआ। शनिवार सुबह उसने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। सूचना पर कस्बे में शोक की लहर दौड़ गई और परिवार में कोहराम मच गया।
रविवार को सेना के जवान साथी का पार्थिव शरीर लेकर कस्बे में पहुंचे। जवान की अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। गागौर रोड पर स्थित श्मशान घाट पर सैनिक सम्मान के साथ जवान का अंतिम संस्कार किया गया। जवान की दोनों बेटियां मुखाग्नि देने के लिए आगे आईं तो श्मशान में मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
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रिया और नेहा ने पिता को मुखाग्नि दी। सेना के जवानों ने मातमी धुन बजाई और सलामी देते हुए साथी को अंतिम विदाई दी।
इस दौरान प्रशासन की ओर से तहसीलदार मदनलाल राठौर शामिल रहे मौजूद रहे। अंतिम संस्कार के समय हर किसी की आंखें नम थीं।
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कस्बा निवासी प्रदीप (37) पुत्र जिले सिंह सेना की 72 आर्म्ड रेजीमेंट में हवलदार के पद पर पंजाब के संगरुर में तैनात था। पाकिस्तान से बढ़ते तनाव के कारण सेना सीमावर्ती के क्षेत्रों में युद्धाभ्यास कर रही थी। इस दौरान प्रदीप को बुखार हो गया। उसका उपचार सेना के चंडीगढ़ अस्पताल में चला रखा था। लाख कोशिशों के बाद भी उसकी तबीयत में सुधार नहीं हुआ। शनिवार सुबह उसने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। सूचना पर कस्बे में शोक की लहर दौड़ गई और परिवार में कोहराम मच गया।
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रविवार को सेना के जवान साथी का पार्थिव शरीर लेकर कस्बे में पहुंचे। जवान की अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। गागौर रोड पर स्थित श्मशान घाट पर सैनिक सम्मान के साथ जवान का अंतिम संस्कार किया गया। जवान की दोनों बेटियां मुखाग्नि देने के लिए आगे आईं तो श्मशान में मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
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रिया और नेहा ने पिता को मुखाग्नि दी। सेना के जवानों ने मातमी धुन बजाई और सलामी देते हुए साथी को अंतिम विदाई दी।
इस दौरान प्रशासन की ओर से तहसीलदार मदनलाल राठौर शामिल रहे मौजूद रहे। अंतिम संस्कार के समय हर किसी की आंखें नम थीं।