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शुरूआती बढ़त ने मजबूत कर दिया था पंजा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 13 Jan 2017 12:06 AM IST
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शामली। विधानसभा 2012 के चुनाव में शामली सीट पर दिलचस्प मुकाबला हुआ। मुकाबले में एक तरफ सपा के वीरेंद्र सिंह थे, तो दूसरी तरफ कांग्रेस रालोद गठबंधन के प्रत्याशी पंकज मलिक। भाजपा की कमजोर बल्लेबाजी के कारण पंकज मलिक ने शुरुआत में ही शामली शहर के वोटों की गिनती में बढ़त बना ली थी, लेकिन 17वें चरण तक आते-आते साइकिल 200 वोटों से आगे निकल गई। हालांकि 19 वां चरण निर्णायक साबित हुआ और पंकज मलिक की जीत का मार्ग प्रशस्त कर दिया। इस चरण में कांग्रेस को 4310 और सपा को मात्र 1232 वोट ही मिल पाए। अब देखना यह है कि आगामी विधानसभा चुनाव में क्षेत्र की जनता का रुझान क्या रहता है।
दरअसल, 2012 के विधानसभा चुनाव में शामली सीट पर भाजपा से पूर्व राज्यपाल वीरेंद्र वर्मा के बेटे डाक्टर सतेंद्र वर्मा ने चुनाव लड़ा था। चुनाव में भाजपा इतनी मजबूत तैयारी नहीं कर सकी थी कि शहर के परंपरागत वोटरों को भी सहेजा जा सके। सतेंद्र वर्मा को सिर्फ 9105 वोट पर संतोष करना पड़ा था, जबकि नगर पालिका के चुनावों पर गौर करें तो भाजपा के 30 हजार से ज्यादा वोटर बताए जाते हैं। कांग्रेस प्रत्याशी पंकज मलिक ने शहर में अपनी पैठ बढ़ा दी थी।
शहर से बाहर जाट बाहुल्य गांवों में भी पंकज मलिक ने किसी को आगे नहीं आने दिया, जबकि कांधला क्षेत्र में पहुंचने पर सपा प्रत्याशी की साइकिल ने रफ्तार पकड़ी और 17 वें चरण तक वोटों की गिनती होने तक सपा प्रत्याशी करीब 200 वोटों से आगे निकल गए थे। कुछ यही स्थिति बसपा के हाथी की रही थी। हाथी की रफ्तार शुरुआत से आखिर तक एक जैसी रही, जिसके चलते बसपा प्रत्याशी 45597 वोटों तक पहुंच गया था, लेकिन जीत का आंकड़ा पार करने के लिए आठ हजार वोट कम रह गए थे।
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बसपा प्रत्याशी को 45 हजार वोट मिलना और शहर के वोटरों का पंकज की तरफ रुझान ही 2012 के चुनाव में उन्हें विजयी बना गया था। पंकज मलिक ने सपा प्रत्याशी वीरेंद्र सिंह को करीब 3741 वोटों से पराजित कर दिया था। शहर के वोटरों के मिजाज पर बदलेगा परिणाम ः 2012 के विधानसभा चुनाव में जो भी स्थिति रही हो, मगर इस बार चुनाव कुछ अलग होने जा रहा है। अभी तक शामली सीट से सपा ने मनीष चौहान को प्रत्याशी घोषित किया हुआ है, तो बसपा ने मोहम्मद इस्लाम को प्रत्याशी बनाया है। मनीष चौहान का प्रयास रहेगा कि 2012 के चुनाव में जो कमी रही, वह इस बार ना रहे। इसी के चलते शामली शहर में वह अपनी पकड़ मजबूत करने में काफी समय से लगे हुए हैं।
वहीं, कांग्रेस के मौजूदा विधायक पंकज मलिक इसी सीट से चुनाव लड़ेंगे। उनका भी प्रयास रहेगा कि पिछले चुनाव की तरह ही नतीजों को दोहराया जा सके। भाजपा ने अभी प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। जैसे ही भाजपा का प्रत्याशी घोषित होगा, तो नतीजों को लेकर तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी कि इस बार शहर के वोटरों का मिजाज क्या रहने वाला है। लब्बोलुआब यही है कि इस बार के चुनाव में भी प्रत्याशियों का दारोमदार शहर के वोटरों पर टिका हुआ है।
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दरअसल, 2012 के विधानसभा चुनाव में शामली सीट पर भाजपा से पूर्व राज्यपाल वीरेंद्र वर्मा के बेटे डाक्टर सतेंद्र वर्मा ने चुनाव लड़ा था। चुनाव में भाजपा इतनी मजबूत तैयारी नहीं कर सकी थी कि शहर के परंपरागत वोटरों को भी सहेजा जा सके। सतेंद्र वर्मा को सिर्फ 9105 वोट पर संतोष करना पड़ा था, जबकि नगर पालिका के चुनावों पर गौर करें तो भाजपा के 30 हजार से ज्यादा वोटर बताए जाते हैं। कांग्रेस प्रत्याशी पंकज मलिक ने शहर में अपनी पैठ बढ़ा दी थी।
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शहर से बाहर जाट बाहुल्य गांवों में भी पंकज मलिक ने किसी को आगे नहीं आने दिया, जबकि कांधला क्षेत्र में पहुंचने पर सपा प्रत्याशी की साइकिल ने रफ्तार पकड़ी और 17 वें चरण तक वोटों की गिनती होने तक सपा प्रत्याशी करीब 200 वोटों से आगे निकल गए थे। कुछ यही स्थिति बसपा के हाथी की रही थी। हाथी की रफ्तार शुरुआत से आखिर तक एक जैसी रही, जिसके चलते बसपा प्रत्याशी 45597 वोटों तक पहुंच गया था, लेकिन जीत का आंकड़ा पार करने के लिए आठ हजार वोट कम रह गए थे।
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बसपा प्रत्याशी को 45 हजार वोट मिलना और शहर के वोटरों का पंकज की तरफ रुझान ही 2012 के चुनाव में उन्हें विजयी बना गया था। पंकज मलिक ने सपा प्रत्याशी वीरेंद्र सिंह को करीब 3741 वोटों से पराजित कर दिया था। शहर के वोटरों के मिजाज पर बदलेगा परिणाम ः 2012 के विधानसभा चुनाव में जो भी स्थिति रही हो, मगर इस बार चुनाव कुछ अलग होने जा रहा है। अभी तक शामली सीट से सपा ने मनीष चौहान को प्रत्याशी घोषित किया हुआ है, तो बसपा ने मोहम्मद इस्लाम को प्रत्याशी बनाया है। मनीष चौहान का प्रयास रहेगा कि 2012 के चुनाव में जो कमी रही, वह इस बार ना रहे। इसी के चलते शामली शहर में वह अपनी पकड़ मजबूत करने में काफी समय से लगे हुए हैं।
वहीं, कांग्रेस के मौजूदा विधायक पंकज मलिक इसी सीट से चुनाव लड़ेंगे। उनका भी प्रयास रहेगा कि पिछले चुनाव की तरह ही नतीजों को दोहराया जा सके। भाजपा ने अभी प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। जैसे ही भाजपा का प्रत्याशी घोषित होगा, तो नतीजों को लेकर तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी कि इस बार शहर के वोटरों का मिजाज क्या रहने वाला है। लब्बोलुआब यही है कि इस बार के चुनाव में भी प्रत्याशियों का दारोमदार शहर के वोटरों पर टिका हुआ है।