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माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से शामली पहुंचा कलयुग का श्रवण कुमार  

Tue, 07 Aug 2018 04:46 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Tue, 07 Aug 2018 04:46 PM IST
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Shrawan Kumar of Kalyug reached Shamli with his parents sitting in Kawad
यात्रा पूरी कर शामली पहुंचे बब्बन - फोटो : अमर उजाला

देश में आज भी ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो अपने माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा के  लिए अपना तन मन धन सब कुछ न्यौछावर करने को तैयार रहते हैं। फिर भले ही उन्हें अपने माता पिता को श्रवण की ही तरह पालकी में बैठाकर पैदल तीर्थ क्यों न कराना पड़े। पानीपत के रहने वाले बब्बन का भी सपना था कि वह अपने मां बाप को ऐसी ही धार्मिक यात्रा कराए। इस बार कांवड़ यात्रा में बब्बन ने अपना यह सपना पूरा किया-

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पानीपत के बब्बन बने कलयुग के श्रवण कुमार

Shrawan Kumar of Kalyug reached Shamli with his parents sitting in Kawad
कांवड़ यात्रा 2018 - फोटो : अमर उजाला
पानीपत जिले के विद्या नगर कॉलोनी का रहने वाला बब्बन हरिद्वार से रावण में अपनी माता और पिता को बैठाकर पैदल ही लेकर आया है। बब्बन का कहना है कि माता-पिता की सेवा मेरा धर्म है, इसीलिए उनको कावड़ में बैठाकर लाया हूं। वहीं माता पिता ने भी बेटे के इस प्रण की खूब सराहना की और उसे भरपूर आशीष दिए। 

शामली तक पहुंचने के दौरान बब्बन थका हुआ तो था लेकिन शिवालय तक पहुंचने के लिए उनमें भरपूर जोश दिखा। जोश भरपूर था। शामली में पहुंचने पर शिव भक्तों ने बोल बम का जयघोष करके कांवडिया का स्वागत किया। इस कावड़ को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। बब्बन के साथ उसका भाई भी कावड़ लाने में सहयोगी रहा।
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