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58 साल बाद शारदीय नवरात्र का बन रहा दुर्लभ योग

Fri, 09 Oct 2020 11:57 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 09 Oct 2020 11:57 PM IST
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Sharadya Navratri is becoming rare after 58 years
58 साल बाद शारदीय नवरात्र का बन रहा दुर्लभ योग
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शामली। इस बार शारदीय श्री दुर्गा नवरात्र आठ दिन के होंगे। 17 अक्तूबर से शुरू होकर 24 अक्तूबर को समाप्त होंगे। 24 अक्तूबर को अष्टमी और नवमी एक दिन होने से शारदीय श्री दुर्गा नवरात्र का समापन होगा। 58 वर्षों के बाद ये दुर्लभ योग बन रहा है। शारदीय नवरात्र 17 को मां दुर्गा इस बार घोड़े पर सवार होकर आएंगी।
शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा के शारदीय नवरात्रि 17 अक्तूबर से शुरू हो रहा है। इस बार देवी भक्ति की विशेष पूजा और अर्चना का पर्व शारदीय नवरात्रि अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस बार पूरे 58 वर्षों के बाद शनि, मकर में और गुरु, धनु राशि में रहेंगे। इससे पहले यह योग वर्ष 1962 में बना था।
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कैसे करे कलश स्थापना
शामली। बुढाना रोड स्थित श्रीहनुमान ज्योतिष केंद्र के पं. प्रभु शंकर शास्त्री के मुताबिक 17 अक्तूबर को कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानी 17 अक्तूबर सुबह के समय होगा। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर 10 बजकर 13 मिनट तक है। इसके बाद अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 29 मिनट तक है। नवरात्र के नौ दिन होने वाले मां के अलग-अलग स्वरूप, नौ दिनों के नौ रंग खास और नौ दिनों तक विशेष विधान है।
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प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा घटस्थापना : 17 अक्तूबर मां ब्रह्मचारिणी पूजा, 18 अक्तूबर को मां चंद्रघंटा पूजा, 19 अक्तूबर मां कूष्मांडा पूजा, 20 अक्तूबर को मां स्कंदमाता पूजा, 21 अक्तूबर षष्ठी मां कात्यायनी पूजा, 22 अक्तूबर मां कालरात्रि पूजा, 23 अक्तूबर मां महागौरी दुर्गा पूजा, 24 अक्तूबर मां सिद्धिदात्री पूजा, 25 अक्तूूबर दशहरा मनाया जाएगा।
नवरात्रि के ये 9 रंग हैं खास
शैलपुत्री: देवी मां के इस स्वरूप को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। इसलिए इस दिन पीला रंग पहनना शुभ माना जाता है।
देवी ब्रह्मचारिणी: देवी ब्रह्मचारिणी को हरा रंग अत्यंत प्रिय है। इसलिए नवरात्रि के दूसरे दिन हरे रंग का वस्त्र धारण करें।
देवी चंद्रघंटा: देवी चंद्रघंटा को प्रसन्न करने के लिए नवरात्रि के तीसरे दिन हल्का भूरा रंग पहनें।
देवी कूष्मांडा: देवी कूष्मांडा को संतरी रंग प्रिय है। इसलिए नवरात्रि के चौथे दिन संतरी रंग के कपड़े पहनें।
देवी स्कंदमाता: देवी स्कंदमाता को सफेद रंग अत्यंत प्रिय है। इसलिए नवरात्रि के पांचवे दिन सफेद रंग के वस्त्र पहनें।
देवी कात्यायनी: देवी मां के इस स्वरूप को लाल रंग अत्यंत प्रिय है। इसलिए इस दिन मां की पूजा करते समय लाल रंग का वस्त्र पहनें।
देवी कालरात्रि: भगवती मां के इस स्वरूप को नीला रंग अत्यंत प्रिय है। इसलिए नवरात्रि के सातवें दिन नीले रंग के वस्त्र पहनकर मां की पूजा-अर्चना की जानी चाहिए।
देवी महागौरी: देवी महागौरी की पूजा करते समय गुलाबी रंग पहनना शुभ माना जाता है। अष्टमी की पूजा और कन्या भोज करवाते इसी रंग को पहनें। देवी सिद्धिदात्री: देवी मां के इस स्वरूप को बैंगनी रंग अत्यंत प्रिय है। इसलिए नवमी तिथि के दिन भगवती की पूजा करते समय बैंगनी रंग के वस्त्र पहनने चाहिए। शारदीय नवरात्र 17 से, इस बार घोड़े पर सवार होकर आएंगी।

देवी मैया को लगाएं ये भोग, होंगी पूरी मुरादें
शामली। नवरात्रि के पहले दिन मां के चरणों में गाय का शुद्ध घी अर्पित करें। ऐसा करने से आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है। नवरात्रि के दूसरे दिन मां को शक्कर का भोग लगाकर घर के सभी सदस्यों में बांटें। इससे आयु वृद्धि होती है। नवरात्रि के तीसरे दिन देवी भगवती को दूध या खीर का भोग लगाएं। इसके बाद इसे ब्राह्मणों को दान कर दें। ऐसा करने से जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। नवरात्रि के चौथे दिन देवी मां को मालपुरा का भोग लगाएं। इसके बाद इसे जरूरतमंदों को दान कर दें। ऐसा करने से व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता का विकास होता है। नवरात्रि के पांचवें दिन मां को केले का भोग अर्पित करें। ऐसा करने से जातक निरोगी रहता है। नवरात्रि के छठवें दिन मां भगवती को शहद का भोग लगाएं। मान्यता है कि ऐसा करने से आकर्षण भाव में वृद्धि होती है। नवरात्रि के सातवें दिन देवी मां गुड़ का भोग लगाएं। बाद में यह भोग निराश्रितजनों और दिव्यांगों को बांट दें। ऐसा करने से देवी मां प्रसन्न होती हैं और ऐश्वर्य-वैभव की प्राप्ति होती है। नवरात्रि के आठवें दिन माता भगवती को नारियल का भोग लगाकर वह नारियल दान कर दें। मान्यता है कि ऐसा करने से संतान संबंधी सभी परेशानियों से राहत मिलती है। नवरात्रि के नवें दिन देवी भगवती को तिल का भोग लगाएं। इसके बाद यह भोग किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान कर दें। इससे अकाल मृत्यु से राहत मिलती है। इस प्रकार उपरोक्त विधि से मां भगवती की पूजा अर्चना श्रृंगार एवं सेवा करने से साधक की संपूर्ण इच्छा पूरी हो जाती है।
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