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मिशन-2027 : सूखा खत्म करने को कांग्रेस का शामली प्लान
Thu, 29 Oct 2026 01:28 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Thu, 29 Oct 2026 01:28 AM IST
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शामली। जिले की सियासी जमीन पर 37 सालों से चले आ रहे जीत के सूखे को खत्म करने के लिए कांग्रेस ने मिशन-2027 के तहत शामली प्लान पर काम शुरू कर दिया है।
शामली, कैराना और थानाभवन विस सीटों पर लंबे सियासी वनवास को खत्म करने की छटपटाहट में पार्टी ने अब हवा-हवाई राजनीति छोड़ सीधे बूथ किलेबंदी का रास्ता चुना है। जिलाध्यक्ष अखलाक प्रधान की अगुआई में संगठन को री-लॉन्च करते हुए जनसमस्याओं पर आरपार के आंदोलन, जनसंपर्क और मतदाता पुनरीक्षण अभियान के सहारे अपनी पुरानी जमीन वापस पाने की बिसात बिछाई जा रही है।
जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर पार्टी लंबे समय से चुनावी सफलता के लिए तरस रही है:
थानाभवन (37 साल से वनवास) : इस सीट पर आखिरी बार 1989 में ठाकुर नकली सिंह कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए थे। उसके बाद से 37 साल बीत जाने के बावजूद पार्टी का खाता नहीं खुला है।
शामली (15 साल से जीत की दरकार) : वर्ष 2012 में पंकज कुमार मलिक की जीत के बाद से पिछले 15 सालों से कांग्रेस यहां जीत के स्वाद को तरस रही है।
कैराना (पुरानी पहचान की तलाश) : कभी मजबूत जनाधार वाली कैराना सीट पर भी पार्टी सालों से जीत का परचम फहराने के लिए संघर्ष कर रही है।
बूथ मंत्र और धरातल पर मोर्चाबंदी
पार्टी नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि जब तक बूथ मजबूत नहीं होगा, तब तक जीत की राह आसान नहीं होगी। इसके लिए त्रिस्तरीय रणनीति बनाई गई है।
अभेद्य बूथ टीम : जिले के हर बूथ पर सक्रिय और नए युवाओं को जोड़कर मजबूत टीम खड़ी की जाएगी।
जनसमस्याओं पर संग्राम : किसानों के मुद्दों, बेरोजगारी और स्थानीय समस्याओं को लेकर जिला स्तर पर बड़े आंदोलनों की रूपरेखा बनाई जा रही है।
वोट बचाओ, देश बचाओ से दिल्ली तक हल्ला बोल
कांग्रेस अपने वोट बचाओ, देश बचाओ अभियान के जरिए गांव-गांव जाकर मताधिकार की रक्षा का संदेश दे रही है। इस मुहिम को धार देने के लिए 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली महारैली में शामली से 1,000 से अधिक कार्यकर्ताओं का जत्था ले जाने की तैयारी की गई है।
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2027 के चुनाव में नतीजों को बदलने के लिए हर बूथ को अभेद्य बनाना ही एकमात्र रास्ता है। सालों का सूखा खत्म करने के लिए कांग्रेस का हर कार्यकर्ता अब पूरी आक्रामकता के साथ मैदान में उतर चुका है।
— अखलाक प्रधान, जिलाध्यक्ष कांग्रेस, शामली
गठबंधन को लेकर असमंजस, भविष्य के गर्भ में फैसला
जिले की तीनों सीटों पर भले ही कांग्रेस अपने दम पर संगठन को मजबूत करने में जुटी है, लेकिन समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन को लेकर स्थिति अभी भी असमंजस भरी बनी हुई है। फिलहाल पार्टी हर परिस्थिति के लिए खुद को तैयार कर रही है।
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शामली, कैराना और थानाभवन विस सीटों पर लंबे सियासी वनवास को खत्म करने की छटपटाहट में पार्टी ने अब हवा-हवाई राजनीति छोड़ सीधे बूथ किलेबंदी का रास्ता चुना है। जिलाध्यक्ष अखलाक प्रधान की अगुआई में संगठन को री-लॉन्च करते हुए जनसमस्याओं पर आरपार के आंदोलन, जनसंपर्क और मतदाता पुनरीक्षण अभियान के सहारे अपनी पुरानी जमीन वापस पाने की बिसात बिछाई जा रही है।
जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर पार्टी लंबे समय से चुनावी सफलता के लिए तरस रही है:
थानाभवन (37 साल से वनवास) : इस सीट पर आखिरी बार 1989 में ठाकुर नकली सिंह कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए थे। उसके बाद से 37 साल बीत जाने के बावजूद पार्टी का खाता नहीं खुला है।
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शामली (15 साल से जीत की दरकार) : वर्ष 2012 में पंकज कुमार मलिक की जीत के बाद से पिछले 15 सालों से कांग्रेस यहां जीत के स्वाद को तरस रही है।
कैराना (पुरानी पहचान की तलाश) : कभी मजबूत जनाधार वाली कैराना सीट पर भी पार्टी सालों से जीत का परचम फहराने के लिए संघर्ष कर रही है।
बूथ मंत्र और धरातल पर मोर्चाबंदी
पार्टी नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि जब तक बूथ मजबूत नहीं होगा, तब तक जीत की राह आसान नहीं होगी। इसके लिए त्रिस्तरीय रणनीति बनाई गई है।
अभेद्य बूथ टीम : जिले के हर बूथ पर सक्रिय और नए युवाओं को जोड़कर मजबूत टीम खड़ी की जाएगी।
जनसमस्याओं पर संग्राम : किसानों के मुद्दों, बेरोजगारी और स्थानीय समस्याओं को लेकर जिला स्तर पर बड़े आंदोलनों की रूपरेखा बनाई जा रही है।
वोट बचाओ, देश बचाओ से दिल्ली तक हल्ला बोल
कांग्रेस अपने वोट बचाओ, देश बचाओ अभियान के जरिए गांव-गांव जाकर मताधिकार की रक्षा का संदेश दे रही है। इस मुहिम को धार देने के लिए 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली महारैली में शामली से 1,000 से अधिक कार्यकर्ताओं का जत्था ले जाने की तैयारी की गई है।
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2027 के चुनाव में नतीजों को बदलने के लिए हर बूथ को अभेद्य बनाना ही एकमात्र रास्ता है। सालों का सूखा खत्म करने के लिए कांग्रेस का हर कार्यकर्ता अब पूरी आक्रामकता के साथ मैदान में उतर चुका है।
— अखलाक प्रधान, जिलाध्यक्ष कांग्रेस, शामली
गठबंधन को लेकर असमंजस, भविष्य के गर्भ में फैसला
जिले की तीनों सीटों पर भले ही कांग्रेस अपने दम पर संगठन को मजबूत करने में जुटी है, लेकिन समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन को लेकर स्थिति अभी भी असमंजस भरी बनी हुई है। फिलहाल पार्टी हर परिस्थिति के लिए खुद को तैयार कर रही है।