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दुनियावी और दीनी तालीम जरूरी
ब्यूरो/ अमर उजाला, शामली
Updated Thu, 17 Mar 2016 01:26 AM IST
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कांधला में जलसे को संबोधित करते मौलाना।
- फोटो : अमर उजाला
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कांधला। कस्बे के इस्लामपुर घसौली रोड स्थित मदरसा अरबिया मखजनुल उलूम में बुधवार को एक दिवसीय सालाना जलसे का आयोजन किया गया।
जलसे में आए मुस्लिम समाज के सैकड़ों लोगों को संबोधित करते हुए जमीयत उलेमा-ए-हिंद के मुजफ्फरनगर के जिला सदर मौलाना नजर मोहम्म्द ने कहा कि आज के इस युग में शिक्षा बहुत जरूरी है। शिक्षा के बिना इंसान का जीवन अधूरा है। उन्होंने फरमाया कि इंसान को दुनियावी तालीम के साथ-साथ दीनी तालीम भी हासिल करनी चाहिए।
जलसे को खिताब करते हुए मदरसे के प्रबंधक हजरत मौलाना मकसूद साहब ने फरमाया कि जिस इंसान के जीवन में दीन होगा, वो इंसान दुनिया व आखिरत में कामयाब होगा। इसके बाद में जलसे को हजरत मौलाना आकिल साहब ने खिताब करते हुए कहा कि हमें तालिम हासिल करके अपने देश के लिए काम करना चाहिए। देश को आजाद कराने में सैकड़ों मुस्लिमों ने अपनी कुर्बानी दी थी। इस दौरान जलसे में 14 छात्र-छात्राओं की कुरान शरीफ मुकम्मल करने पर दस्तारबंदी की गई। जलसे की सदारत हजरत मौलाना मकसूद साहब व निजामत कारी वाजिद बुटराड़ा के द्वारा की गई।
जलसे में मौलाना शहजाद, कारी इनामु कारी अख्तर इस्लाम, मौलाना मुस्तकीम, मौलाना मजहरूल हुदा, मौलाना इस्लाम, मौलाना फहीम, कारी अकबर अली, शहजाद, सैफी, महमूद सैफी सहित सैंक़डों मुस्लिम समाज के लोग मौजूद रहे।
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जलसे में आए मुस्लिम समाज के सैकड़ों लोगों को संबोधित करते हुए जमीयत उलेमा-ए-हिंद के मुजफ्फरनगर के जिला सदर मौलाना नजर मोहम्म्द ने कहा कि आज के इस युग में शिक्षा बहुत जरूरी है। शिक्षा के बिना इंसान का जीवन अधूरा है। उन्होंने फरमाया कि इंसान को दुनियावी तालीम के साथ-साथ दीनी तालीम भी हासिल करनी चाहिए।
जलसे को खिताब करते हुए मदरसे के प्रबंधक हजरत मौलाना मकसूद साहब ने फरमाया कि जिस इंसान के जीवन में दीन होगा, वो इंसान दुनिया व आखिरत में कामयाब होगा। इसके बाद में जलसे को हजरत मौलाना आकिल साहब ने खिताब करते हुए कहा कि हमें तालिम हासिल करके अपने देश के लिए काम करना चाहिए। देश को आजाद कराने में सैकड़ों मुस्लिमों ने अपनी कुर्बानी दी थी। इस दौरान जलसे में 14 छात्र-छात्राओं की कुरान शरीफ मुकम्मल करने पर दस्तारबंदी की गई। जलसे की सदारत हजरत मौलाना मकसूद साहब व निजामत कारी वाजिद बुटराड़ा के द्वारा की गई।
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जलसे में मौलाना शहजाद, कारी इनामु कारी अख्तर इस्लाम, मौलाना मुस्तकीम, मौलाना मजहरूल हुदा, मौलाना इस्लाम, मौलाना फहीम, कारी अकबर अली, शहजाद, सैफी, महमूद सैफी सहित सैंक़डों मुस्लिम समाज के लोग मौजूद रहे।
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