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जिले में स्क्रब टाइफस की दस्तक, स्वास्थ्य विभाग हुआ सतर्क
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कैराना क्षेत्र निवासी युवक की जांच में हुई पुष्टि, सतर्क हुआ स्वास्थ्य विभाग
स्वास्थ्य विभाग ने कराया कीटनाशक का छिड़काव, रोग के लक्षण और बचावों की जानकारी देकर लोगों को किया जागरूक
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिले में स्क्रब टाइफस बुखार की दस्तक से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। कैराना क्षेत्र निवासी युवक की जांच में इस बुखार की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग ने रोगी के घर पहुंचकर जानकारी ली और एंटी लार्वा कीटनाशक का छिड़काव कराया। ग्रामीणों को इस रोग के लक्षण व बचाव की जानकारी देकर जागरूक भी किया गया।
पिछले साल जिले में स्क्रब टाइफस के तीन केस सामने आए थे। इस बार कैराना क्षेत्र निवासी 29 वर्षीय युवक की जांच में स्क्रब टाइफस की पुष्टि हुई है। युवक गाजियाबाद में किसी कंपनी में नौकरी करता है। बुखार होने पर गाजियाबाद के निजी अस्पताल में जांच हुई और वहीं पर उसका उपचार हुआ है। इसकी जानकारी मिलने पर जिला मलेरिया विभाग की टीम ने रोगी के घर पहुंचकर जानकारी ली। उपचार के बाद मरीज ठीक है और घर में अन्य किसी सदस्य को कोई समस्या नहीं है। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विनय कुमार ने बताया कि स्क्रब टाइफस बुखार के बारे में लोगों को जानकारी देकर जागरूक किया जा रहा है।
चूहे और छछूंदर से घरों तक पहुंच सकता है रोग
संक्रामक रोग परामर्शदाता राजेश कुमारी ने बताया कि स्क्रब टाइफस बैक्टीरियल रोग है। यह परजीवी बैक्टीरिया है। चूहे व छछूंदर इस रोग के फैलाने वाले मुख्य वाहक है। यह कीट के काटने से होता है। चूहे व छछूंदर अक्सर झाड़ियों व बड़ी घासफूस में रहते हैं, उनके द्वारा यह रोग घरों में लोगों तक पहुंच सकता है। कीट के काटने पर घाव बनता है व सूजन आती है और शरीर पर चकत्ते होने के साथ बुखार होता है। इस रोग के लक्षण नजर आने पर जांच कराएं और चिकित्सक की सलाह लेकर उपचार कराएं। खुद कोई दवा या उपचार न ले। एंटी बैक्टीरियल दवा लेने से एक सप्ताह में रोगी ठीक हो जाता है। समय पर उपचार न कराने पर यह रोग खतरनाक हो सकता है।
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डेंगू से भी हो चुकी है एक मौत
बरसात के मौसम में वायरल, मलेरिया, टायफाइड बुखार का प्रकोप चल रहा है। डेंगू के भी केस सामने आ रहे हैं। चार दिन पहले डेंगू से पीड़ित शामली निवासी 75 वर्षीय बुजुर्ग की गाजियाबाद के निजी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो चुकी है।
स्क्रब टाइफस लक्षण
अचानक ठंड लगना, बुखार होना ।
तेज सिर दर्द होना, उल्टी लगना।
पेट में दर्द, पाचन की समस्या होना।
कीट के डंक मारने का घाव होना व सूजन आना।
हाथ-पैरों में तेज दर्द होना। शरीर पर लाल चकत्ते होना।
आंखों के आसपास दर्द होना।
बचाव:
घरों के आसपास साफ-सफाई रखे।
घर से बाहर जाते समय जूते-मौजे और शरीर को ढकने वाले कपड़े पहने।
घर व खेतों में झाड़ियों को बड़ी न होने दे और उनकी कटाई करते रहें।
पार्क और बगीचों में झाड़ियों के पास न जाए। कीटनाशक का छिड़काव करें।
धूल मिट्टी व घास के संपर्क में आने से बचे।
सीधे जमीन या घास पर न बैठे, चादर या अन्य ग्राउंड कवर का इस्तेमाल करें।
खुले में शौच न जाए।
बुखार होने पर चिकित्सक की सलाह से उपचार कराएं।
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स्वास्थ्य विभाग ने कराया कीटनाशक का छिड़काव, रोग के लक्षण और बचावों की जानकारी देकर लोगों को किया जागरूक
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिले में स्क्रब टाइफस बुखार की दस्तक से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। कैराना क्षेत्र निवासी युवक की जांच में इस बुखार की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग ने रोगी के घर पहुंचकर जानकारी ली और एंटी लार्वा कीटनाशक का छिड़काव कराया। ग्रामीणों को इस रोग के लक्षण व बचाव की जानकारी देकर जागरूक भी किया गया।
पिछले साल जिले में स्क्रब टाइफस के तीन केस सामने आए थे। इस बार कैराना क्षेत्र निवासी 29 वर्षीय युवक की जांच में स्क्रब टाइफस की पुष्टि हुई है। युवक गाजियाबाद में किसी कंपनी में नौकरी करता है। बुखार होने पर गाजियाबाद के निजी अस्पताल में जांच हुई और वहीं पर उसका उपचार हुआ है। इसकी जानकारी मिलने पर जिला मलेरिया विभाग की टीम ने रोगी के घर पहुंचकर जानकारी ली। उपचार के बाद मरीज ठीक है और घर में अन्य किसी सदस्य को कोई समस्या नहीं है। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विनय कुमार ने बताया कि स्क्रब टाइफस बुखार के बारे में लोगों को जानकारी देकर जागरूक किया जा रहा है।
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चूहे और छछूंदर से घरों तक पहुंच सकता है रोग
संक्रामक रोग परामर्शदाता राजेश कुमारी ने बताया कि स्क्रब टाइफस बैक्टीरियल रोग है। यह परजीवी बैक्टीरिया है। चूहे व छछूंदर इस रोग के फैलाने वाले मुख्य वाहक है। यह कीट के काटने से होता है। चूहे व छछूंदर अक्सर झाड़ियों व बड़ी घासफूस में रहते हैं, उनके द्वारा यह रोग घरों में लोगों तक पहुंच सकता है। कीट के काटने पर घाव बनता है व सूजन आती है और शरीर पर चकत्ते होने के साथ बुखार होता है। इस रोग के लक्षण नजर आने पर जांच कराएं और चिकित्सक की सलाह लेकर उपचार कराएं। खुद कोई दवा या उपचार न ले। एंटी बैक्टीरियल दवा लेने से एक सप्ताह में रोगी ठीक हो जाता है। समय पर उपचार न कराने पर यह रोग खतरनाक हो सकता है।
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डेंगू से भी हो चुकी है एक मौत
बरसात के मौसम में वायरल, मलेरिया, टायफाइड बुखार का प्रकोप चल रहा है। डेंगू के भी केस सामने आ रहे हैं। चार दिन पहले डेंगू से पीड़ित शामली निवासी 75 वर्षीय बुजुर्ग की गाजियाबाद के निजी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो चुकी है।
स्क्रब टाइफस लक्षण
अचानक ठंड लगना, बुखार होना ।
तेज सिर दर्द होना, उल्टी लगना।
पेट में दर्द, पाचन की समस्या होना।
कीट के डंक मारने का घाव होना व सूजन आना।
हाथ-पैरों में तेज दर्द होना। शरीर पर लाल चकत्ते होना।
आंखों के आसपास दर्द होना।
बचाव:
घरों के आसपास साफ-सफाई रखे।
घर से बाहर जाते समय जूते-मौजे और शरीर को ढकने वाले कपड़े पहने।
घर व खेतों में झाड़ियों को बड़ी न होने दे और उनकी कटाई करते रहें।
पार्क और बगीचों में झाड़ियों के पास न जाए। कीटनाशक का छिड़काव करें।
धूल मिट्टी व घास के संपर्क में आने से बचे।
सीधे जमीन या घास पर न बैठे, चादर या अन्य ग्राउंड कवर का इस्तेमाल करें।
खुले में शौच न जाए।
बुखार होने पर चिकित्सक की सलाह से उपचार कराएं।