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अहंकार का त्याग आत्मा के उद्धार का मार्ग : विव्रत सागर

Thu, 07 Aug 2025 12:13 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Thu, 07 Aug 2025 12:13 AM IST
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Renunciation of ego is the path to salvation of the soul: Vivrata Sagar
शामली जैन धर्मशाला में प्रवचन करते जैन मुनि विव्रत सागर महाराज । संवाद
शामली। जैन मुनि विव्रत सागर महाराज ने कहा कि अहंकार का त्याग कर आत्म-स्वरूप को प्राप्त करना ही आत्मा के उद्धार का मार्ग है। पद या कमेटी के झंझटों में न पड़कर, केवल श्रावक धर्म का पालन और गुरुओं की सेवा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
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जैन धर्मशाला में बुधवार को प्रवचन करते हुए जैन मुनि ने कहा कि 84 लाख योनियों और संसार के बंधनों से मुक्त होने की कुंजी मैं में ही निहित है। जैसे बैंक लॉकर खोलने के लिए दो चाबियां होती हैं, वैसे ही मोक्ष का ताला खोलने के लिए भी मैं की चाबी का सही उपयोग करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अहंकार गुरु तक पहुंचने के मार्ग में बाधा उत्पन्न करने के साथ ही आत्मा के कल्याण में बाधक होता है।
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उन्होंने लोगों से धार्मिक संस्थाओं में पदों की लालसा छोड़ने की सलाह देते हुए कहा कि यह भक्ति और सेवा के वास्तविक उद्देश्य से भटकाती है। कार्यक्रम में चित्र अनावरण दीप प्रज्वलन राजेश जैन, सीमा जैन द्वारा, पाद प्रक्षालन अनिल जैन, श्रीपाल जैन, ममलेश जैन और शास्त्र भेंट इंग्लैंश जैन, उषा जैन, कमल जैन की मम्मी, रेशू, सविता द्वारा किया गया।
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