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दाल के लिए बाजार पर निर्भर अन्नदाता

Fri, 16 Oct 2020 12:30 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 16 Oct 2020 12:30 AM IST
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Pulses acreage remained confined in the district
शामली। जिले के किसान रोटी के लिए गेहूं तो उगा रहे लेते हैं, लेकिन दाल के लिए बाजार पर निर्भर हैं। कभी अच्छे-खासे रकबे पर होने वाली दाल की खेती जिले में अब नाममात्र रह गई है। कुछ किसान दाल के नाम पर थोड़ी मसूर उगा लेते हैं या जायद के मौसम में थोड़ा उर्द बो लेते हैं।
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जनपद में लगभग सवा लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है और किसान भी लगभग एक लाख 20 हजार हैं। शामली क्षेत्र में कभी दलहन की अच्छी-खासी खेती होती थी। 2011 में शामली जनपद बना और इसके बाद फसलों के रकबे, उत्पादन एवं उत्पादकता आदि आंकड़ों की गणना अलग होनी शुरू हुई। 2012-13 में जिले में दलहन का क्षेत्र 1323 हेक्टेयर था, जो अब काफी सिमट गया है। जनपद के किसान केवल मसूर और उर्द ही उगा रहे हैं। जायद के सीजन में उर्द का रकबा लगभग 377 हेक्टेयर था, जबकि इस बार मसूर का रकबा लगभग 113 हेक्टेयर रहने की संभावना है।
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जिले में एक हजार हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल पर ही दलहन की खेती हो रही है। इससे किसानों का अपना खर्च भी पूरा नहीं हो पाता। इसलिए सबके लिए अन्न उपजाने वाले अन्नदाता को दाल के लिए बाजार पर ही निर्भर रहना पड़ता है। किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सवित मलिक का कहना है कि आवारा पशुओं की वजह से किसानों ने दलहन की खेती करनी बंद कर दी है। किसान थोड़ा बहुत उर्द उगाते हैं। उसे भी पशुओं से बचाना मुश्किल रहता है। जलालाबाद क्षेत्र के किसान ओमप्रकाश सिंह, पंकज कुमार आदि का कहना है कि दलहन में नुकसान बहुत होता है। कई बार तो लागत भी नहीं निकल पाती। इसलिए किसान इससे मुंह मोड़ रहे हैं।
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तिलहन के नाम पर केवल सरसों उगा रहे किसान
जिले में तिलहन के नाम पर केवल सरसों की खेती होती है। वह भी गेहूं, बरसीम आदि के साथ बोई जाती है। कुछ किसान केवल सरसों की खेती करते हैं। इसका रकबा डेढ़ हजार हेक्टेयर से ज्यादा नहीं हो पाता है। पिछले सीजन में जनपद में लगभग 400 मीट्रिक टन सरसों का उत्पादन हुआ। जबकि तिल, सूरजमुखी, तरहा, अलसी आदि की खेती से जिले के किसानों ने पूरी तरह मुंह मोड़ लिया है।

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बीते वर्षों में जनपद में दलहन का क्षेत्रफल
वर्ष --- रकबा हेक्टेयर
2015-16 -- 979
2016-17 --960
2017-18 -- 860
2018-19 --750
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बीते वर्षों में जनपद में तिलहन का क्षेत्रफल
वर्ष रकबा हेक्टेयर
2015-16 - 1200
2016-17 - 1165
2017-18- 1180
2018-19 - 1068
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कोट...
जनपद में दलहन का रकबा ज्यादा नहीं रहता है। तिलहन में किसान सरसों ही ज्यादा उगाते हैं। जनपद के किसान गन्ना, गेहूं और धान का उत्पादन अधिक करते हैं। - डा. हरिशंकर सिंह, जिला कृषि अधिकारी।
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