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जाट आरक्षण के लिए जाम लगाकर प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Fri, 10 Jun 2016 11:48 PM IST
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शामली कलक्ट्रेट में एडीएम को ज्ञापन देते जाट आरक्षण समिति के लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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शामली(ब्यूरो)। जाट आरक्षण की मांग को लेकर अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं ने जाम लगाकर प्रदर्शन किया। कलक्ट्रेट में पहुंचकर अपर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
शुक्रवार को अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष सतेंद्र चिकारा के नेतृत्व में दर्जनों लोग कलक्ट्रेट पहुंचे। कलक्ट्रेट के सामने मुजफ्फरनगर मार्ग पर सांकेतिक जाम लगाकर प्रदर्शन किया। इसके बाद अपर जिलाधिकारी भरत पांडेय को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में कहा गया कि जिन राज्यों में जाटों को अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी में आरक्षण नहीं मिल रहा है, वहां जाट समाज के लोग आंदोलनरत हैं। उनकी मांग है कि केंद्रीय स्तर पर जाटों को आरक्षण दिलाया जाए। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग संशोधन बिल 2015 को सरकारी बिल मानते हुए शीघ्र पास कराया जाए।
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हरियाणा विधानसभा द्वारा पारित आरक्षण बिल की उच्च न्यायालय में पैरवी करते हुए संविधान की 9 वीं सूची में शामिल करने की प्रक्रिया पूर्ण की जाए। पंजाब, जम्मू कश्मीर, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, राजस्थान को भी प्रदेश स्तर पर आरक्षण की पिछड़े वर्ग श्रेणी में शामिल कराया जाए।
हरियाणा में जाटों पर हो रहे जातीय और अमानवीय अत्याचार जैसे निर्दोषों को जेल में डालना, फर्जी मुकदमे दर्ज करना आदि पर रोक लगाई जाए। आंदोलन के दौरान जो लोग शहीद हुए, उनके परिजनों को घोषित मुआवजा और सरकारी नौकरी दिलाई जाए।
आंदोलन के दौरान जिन अधिकारियों कर्मचारियों द्वारा जातीय वैमनस्यता के कारण जाट समाज के खिलाफ कार्य करने वालों को गिरफ्तार कराया जाए। सांसद राजकुमार सैनी के खिलाफ संसद की एथिक्स कमेटी से जांच कराकर कार्रवाई कराई जाए। जाट आंदोलन के दौरान दर्ज हुए केस वापस कराए जाएं। इसके अलावा भी कई मांग ज्ञापन में की गई हैं। इस दौरान सतेंद्र चिकारा, डाक्टर रोहित तोमर, सचिन कुमार, मोनू चिकारा, सतेंद्र फौजी, कंवरपाल, वीरपाल सिंह, विपिन, राजीव, आशीष, हंसराज, अशोक तथा मांगेराम आदि मौजूद रहे।
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शुक्रवार को अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष सतेंद्र चिकारा के नेतृत्व में दर्जनों लोग कलक्ट्रेट पहुंचे। कलक्ट्रेट के सामने मुजफ्फरनगर मार्ग पर सांकेतिक जाम लगाकर प्रदर्शन किया। इसके बाद अपर जिलाधिकारी भरत पांडेय को ज्ञापन सौंपा।
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ज्ञापन में कहा गया कि जिन राज्यों में जाटों को अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी में आरक्षण नहीं मिल रहा है, वहां जाट समाज के लोग आंदोलनरत हैं। उनकी मांग है कि केंद्रीय स्तर पर जाटों को आरक्षण दिलाया जाए। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग संशोधन बिल 2015 को सरकारी बिल मानते हुए शीघ्र पास कराया जाए।
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हरियाणा विधानसभा द्वारा पारित आरक्षण बिल की उच्च न्यायालय में पैरवी करते हुए संविधान की 9 वीं सूची में शामिल करने की प्रक्रिया पूर्ण की जाए। पंजाब, जम्मू कश्मीर, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, राजस्थान को भी प्रदेश स्तर पर आरक्षण की पिछड़े वर्ग श्रेणी में शामिल कराया जाए।
हरियाणा में जाटों पर हो रहे जातीय और अमानवीय अत्याचार जैसे निर्दोषों को जेल में डालना, फर्जी मुकदमे दर्ज करना आदि पर रोक लगाई जाए। आंदोलन के दौरान जो लोग शहीद हुए, उनके परिजनों को घोषित मुआवजा और सरकारी नौकरी दिलाई जाए।
आंदोलन के दौरान जिन अधिकारियों कर्मचारियों द्वारा जातीय वैमनस्यता के कारण जाट समाज के खिलाफ कार्य करने वालों को गिरफ्तार कराया जाए। सांसद राजकुमार सैनी के खिलाफ संसद की एथिक्स कमेटी से जांच कराकर कार्रवाई कराई जाए। जाट आंदोलन के दौरान दर्ज हुए केस वापस कराए जाएं। इसके अलावा भी कई मांग ज्ञापन में की गई हैं। इस दौरान सतेंद्र चिकारा, डाक्टर रोहित तोमर, सचिन कुमार, मोनू चिकारा, सतेंद्र फौजी, कंवरपाल, वीरपाल सिंह, विपिन, राजीव, आशीष, हंसराज, अशोक तथा मांगेराम आदि मौजूद रहे।