फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shamli News ›   Project for Anganwadi centers is not approved in nine bodies

Shamli News: नौ निकायों में नहीं है आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए परियोजना स्वीकृत

Tue, 27 Jun 2023 12:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 27 Jun 2023 12:15 AM IST
विज्ञापन
Project for Anganwadi centers is not approved in nine bodies
- कैसे ग्रसित बच्चों और किशोरियों और अन्य का दूर किया जाएगा कुपोषण
विज्ञापन

- विभागीय अधिकारियों के कई बार प्रस्ताव भेजने के बावजूद नहीं मिल रही मंजूरी
- जिले के 230 गांवों में कुल 45366 लाभार्थी किए गए हैं चिहि्त, जिन्हें दिया जा रहा राशन

महबूब अली
शामली। इसे शामली जिले के लोगों का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि जिला बनने के 12 साल बाद भी तीन नगर पालिकाओं, छह नगर पंचायतों में आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए परियोजना ही स्वीकृत नहीं की गई है। विभागीय अधिकारियों के कई बार निदेशालय, प्रमुख सचिव और अन्य को पत्र भेजने के बाद भी शहरी क्षेत्रों में परियोजना स्वीकृत नहीं की जा रही है। इसका सबसे बड़ा असर कुपोषित बच्चों और किशोरियों पर पड़ रहा है। इनका ब्योरा नहीं होने के कारण उन्हें उपचार नहीं दिया जा रहा । हालांकि, जिले के 230 गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं तथा उन पर 500 के करीब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नियुक्त हैैं। संवाद
जिले की तीन नगर पालिका और छह नगर पंचायतों में परियोजना स्वीकृत नहीं

जिले में शामली के अलावा कैराना, कांधला नगर पालिका और बनत, गढ़ीपुख्ता, झिंझाना, थाना भवन, ऊन, जलालाबाद नगर पंचायत क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए परियोजना ही स्वीकृत नहीं की गई है। यहीं कारण है कि यहां पर अभी तक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर सुपरवाइजर तक की तैनाती नहीं की जा सकी है। जिसको लेकर लोगों में भी विभागीय अधिकारियों के प्रति आक्रोश है।
विज्ञापन

परियोजना स्वीकृत नहीं होने से यह पड़ रहा प्रभाव
नगर निकायों में आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए परियोजना स्वीकृत नहीं होने के कारण जहां विभाग कुपोषित और कम वजन का ब्योरा नहीं जुटा पा रहा। वहीं, कितनी किशोरियां रोगों से ग्रस्त हैं, इसका भी पता नहीं चल पा रहा है। यदि परियोजना स्वीकृत हो तो पीड़ितों का जहां समय पर कुपोषण दूर कराया जा सकेगा, वहीं, रोगों से ग्रस्त किशोरियों, महिलाओं को भी हष्ट पुष्ट बनाया जा सकेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


विभाग की ओर से पीड़ितों को उपलब्ध कराई जाती है यह खाद्य सामग्री

ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषित बच्चों और बड़ों को प्रशासन द्वारा आधा किलो रिफाइंड, आधा किलो दाल, डेढ़ किलो गेहूं , डेढ़ किलो चावल निशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं।

कोट्स.....
नौ नगर निकायों में आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए परियोजना स्वीकृत करने को अधिकारियों के माध्यम से कई बार प्रस्ताव बनाकर भेजा जा चुका है। हालांकि, जिले के 230 गांवों में केंद्रों के माध्यम से कुपोषण को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। अभियान चलाकर लोगों को जागरूक भी किया जाता है। - बाबर खां, जिला कार्यक्रम अधिकारी शामली
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed