{"_id":"6ababfc3a67a7984460f348c","slug":"a-scene-of-helplessness-amidst-the-rain-the-final-journey-huddled-under-a-tarpaulin-shamli-news-c-26-1-smrt1048-175028-2026-09-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shamli News: बारिश में बेबसी का मंजर... तिरपाल के नीचे सिमटा आखिरी सफर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shamli News: बारिश में बेबसी का मंजर... तिरपाल के नीचे सिमटा आखिरी सफर
Tue, 29 Sep 2026 12:58 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Tue, 29 Sep 2026 12:58 AM IST
विज्ञापन
बेबसी... बाबरी में बारिश के दौरान तिरपाल डालकर अंतिम संस्कार करते ग्रामीण। संवाद
शामली। बाबरी के भंदौड़ा मार्ग स्थित श्मशान घाट पर शव दाह गृह (शेड) न होने के कारण सोमवार को अव्यवस्था और बेबसी का मंजर सामने आया। तेज बारिश के बीच परिजनों और ग्रामीणों को प्लास्टिक के बोरों से तिरपाल बनाकर एक युवक का अंतिम संस्कार करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
बाबरी निवासी सरदार सुखविंदर सिंह (34) का बीमारी के चलते रविवार रात निधन हो गया था। सोमवार सुबह परिजन अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे, लेकिन सुबह से हो रही झमाझम बारिश के कारण शव यात्रा शुरू नहीं हो सकी। भंदौड़ा मार्ग श्मशान घाट में शेड न होने से खुले में ही चिता जलानी पड़ती है। दोपहर में बारिश कुछ धीमी हुई तो ग्रामीण श्मशान घाट पहुंचे, लेकिन वहां पहुंचते ही फिर से बारिश शुरू हो गई।
चिता को भीगने से बचाने के लिए ग्रामीणों ने आनन-फानन में प्लास्टिक के बोरों को जोड़कर तिरपाल बनाई। इसके बावजूद लकड़ियों में सीलन होने के कारण चिता आग नहीं पकड़ रही थी। आखिरकार मजबूरी में ग्रामीणों को डीजल का सहारा लेना पड़ा, तब जाकर चिता को मुखाग्नि दी जा सकी।
विज्ञापन
मृतक के चचेरे भाई सोमपाल ने बतया कि श्मशान घाट में बारिश से बचाव का कोई इंतजाम नहीं है। मजबूरी में बोरों की तिरपाल लगानी पड़ी। गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान सरदार नेम सिंह ने बताया कि शव दाह गृह बनवाने के लिए कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई जा चुकी है।
विज्ञापन
बाबरी निवासी सरदार सुखविंदर सिंह (34) का बीमारी के चलते रविवार रात निधन हो गया था। सोमवार सुबह परिजन अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे, लेकिन सुबह से हो रही झमाझम बारिश के कारण शव यात्रा शुरू नहीं हो सकी। भंदौड़ा मार्ग श्मशान घाट में शेड न होने से खुले में ही चिता जलानी पड़ती है। दोपहर में बारिश कुछ धीमी हुई तो ग्रामीण श्मशान घाट पहुंचे, लेकिन वहां पहुंचते ही फिर से बारिश शुरू हो गई।
विज्ञापन
चिता को भीगने से बचाने के लिए ग्रामीणों ने आनन-फानन में प्लास्टिक के बोरों को जोड़कर तिरपाल बनाई। इसके बावजूद लकड़ियों में सीलन होने के कारण चिता आग नहीं पकड़ रही थी। आखिरकार मजबूरी में ग्रामीणों को डीजल का सहारा लेना पड़ा, तब जाकर चिता को मुखाग्नि दी जा सकी।
विज्ञापन
मृतक के चचेरे भाई सोमपाल ने बतया कि श्मशान घाट में बारिश से बचाव का कोई इंतजाम नहीं है। मजबूरी में बोरों की तिरपाल लगानी पड़ी। गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान सरदार नेम सिंह ने बताया कि शव दाह गृह बनवाने के लिए कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई जा चुकी है।