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Shamli News: फार्मासिस्ट संभाल रहे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की जिम्मेदारी
Wed, 25 Sep 2024 01:06 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Wed, 25 Sep 2024 01:06 AM IST
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शामली। सरकारी अस्पतालों में इलाज लेकर दवा वितरण तक की जिम्मेदारी फार्मासिस्ट संभाल रहे हैं। इतना ही नहीं बनत और बाबरी में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फार्मासिस्ट के सहारे चल रहे हैं। कोरोना काल में भी मरीजों के इलाज में फार्मासिस्टोें ने अग्रणी भूमिका निभाई थी।
जिला अस्पताल के अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर नियुक्त फार्मासिस्ट मरीजों के इलाज में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। चिकित्सकों के साथ इलाज में सहायक की भूमिका निभाने के साथ दवाओं का वितरण करने, इंजेक्शन आदि लगाने का काम फार्मासिस्ट ही करते हैं। इतना ही नहीं चिकित्सक न भी हो तब भी मरीजों का उपचार फार्मासिस्ट करते हैं। फार्मासिस्ट को अस्पतालों की रीढ़ कहा जाता है।
बाबरी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर फार्मासिस्ट नितिन त्यागी ही मरीजों की जांच कर दवा देते हैं। बताया गया है कि यहां पर तैनात चिकित्सक का एक वर्ष स अधिक समय पहले दूसरे जनपद में स्थानांतरण हो गया था। इसके बाद किसी चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हुई। इसी तरह बनत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर फार्मासिस्ट आदेश कुमार ही मरीजों का उपचार कर दवा देते हैं। यहां पर एक साल से अधिक समय से चिकित्सक नहीं है।
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कोरोना काल में अग्रणी भूमिका में रहे फार्मासिस्ट
डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष यूएस भट्ट का कहना है कि कोराना महामारी के दौर में जब अपने लोग ही मरीज के पास जाने से डरते थे। उस समय फार्मासिस्टों ने मरीजों का उपचार किया।
एसोसिएशन के महामंत्री संजीव शर्मा ने बताया कि कोरोना काल के समय में जिला अस्पताल में उनकी ड्यूटी थी। यहां कोविड एल टू अस्पताल बनाया गया था। उस समय यहां मरीजों के इलाज में चिकित्सकों के साथ फार्मासिस्टों ने सेवाभाव से कार्य किया था।
जिला अस्पताल के चीफ फार्मासिस्ट ताहिर बेग ने कहा मरीजों के इलाज में फार्मासिस्ट की ही प्रमुख भूमिका होती है। कोरोना काल में फार्मासिस्टों की सेवा सबसे बड़ा उदाहरण है।
जिला अस्पताल में नियुक्त फार्मासिस्ट मनोज वर्मा का कहना है कि अस्पताल में दवा व अन्य व्यवस्थाओं में फार्मासिस्टों का बड़ा योगदान होता है। कोरोना काल में उनकी जिला अस्पताल में ड्यूटी थी।
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जिला अस्पताल के अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर नियुक्त फार्मासिस्ट मरीजों के इलाज में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। चिकित्सकों के साथ इलाज में सहायक की भूमिका निभाने के साथ दवाओं का वितरण करने, इंजेक्शन आदि लगाने का काम फार्मासिस्ट ही करते हैं। इतना ही नहीं चिकित्सक न भी हो तब भी मरीजों का उपचार फार्मासिस्ट करते हैं। फार्मासिस्ट को अस्पतालों की रीढ़ कहा जाता है।
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बाबरी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर फार्मासिस्ट नितिन त्यागी ही मरीजों की जांच कर दवा देते हैं। बताया गया है कि यहां पर तैनात चिकित्सक का एक वर्ष स अधिक समय पहले दूसरे जनपद में स्थानांतरण हो गया था। इसके बाद किसी चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हुई। इसी तरह बनत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर फार्मासिस्ट आदेश कुमार ही मरीजों का उपचार कर दवा देते हैं। यहां पर एक साल से अधिक समय से चिकित्सक नहीं है।
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कोरोना काल में अग्रणी भूमिका में रहे फार्मासिस्ट
डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष यूएस भट्ट का कहना है कि कोराना महामारी के दौर में जब अपने लोग ही मरीज के पास जाने से डरते थे। उस समय फार्मासिस्टों ने मरीजों का उपचार किया।
एसोसिएशन के महामंत्री संजीव शर्मा ने बताया कि कोरोना काल के समय में जिला अस्पताल में उनकी ड्यूटी थी। यहां कोविड एल टू अस्पताल बनाया गया था। उस समय यहां मरीजों के इलाज में चिकित्सकों के साथ फार्मासिस्टों ने सेवाभाव से कार्य किया था।
जिला अस्पताल के चीफ फार्मासिस्ट ताहिर बेग ने कहा मरीजों के इलाज में फार्मासिस्ट की ही प्रमुख भूमिका होती है। कोरोना काल में फार्मासिस्टों की सेवा सबसे बड़ा उदाहरण है।
जिला अस्पताल में नियुक्त फार्मासिस्ट मनोज वर्मा का कहना है कि अस्पताल में दवा व अन्य व्यवस्थाओं में फार्मासिस्टों का बड़ा योगदान होता है। कोरोना काल में उनकी जिला अस्पताल में ड्यूटी थी।