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कागजों में रह गई ‘ऑक्सीजन बैंक’ की योजना

Sat, 24 Apr 2021 11:46 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 24 Apr 2021 11:46 PM IST
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'Oxygen bank' scheme left on paper
कागजों में रह गई ‘ऑक्सीजन बैंक’ की योजना
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शामली। कोरोना काल में आक्सीजन के लिए हाहाकार मच रहा है। महामारी के इस दौर ने हमें सिखा दिया है कि प्राणवायु का कोई विकल्प नहीं है। इसके बावजूद लोग प्राकृतिक रूप से ऑक्सीजन देने वाले पेड़ों को बचाने में रुचि नहीं ले रहें। जिले में जापानी तकनीक से विकसित होने वाले घने जंगल का प्रस्ताव भी अधूरा ही रह गया। इसके लिए दो स्थानों पर जगह तलाश की गई थी।
सहारनपुर के तत्कालीन मंडलायुक्त संजय कुमार के निर्देश पर मंडल के जिलों में घने जंगलों को विकसित करने की कवायद शुरू हुई थी। ये जंगल ऑक्सीजन बैंक के रूप में काम करते। शामली जिले में खेड़ीकरमू और सहारनपुर बॉर्डर के गांव चंदेनामाल में एक-एक एकड़ भूमि को चिह्नित किया गया था। जापान के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् मिया बाकी की तकनीक पर पौधे लगाए जाने थे। इस पद्घति में दो पौधों के बीच बहुत मामूली दूरी रखी जाती है। जब ये पौधे विकसित हो जाते हैं तो जंगल बेहद घना हो जाता है। इसमें प्रवेश कर पाना भी आसान नहीं होता। ये पौधे प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन देने वाले होते हैं, जो पर्यावरण के लिए हितैषी होते हैं। जमीन चिह्नित होने के बावजूद यह प्रस्ताव केवल कागजों तक ही रह गया।
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एक एकड़ में लगते हैं 12 हजार पौधे
मिया बाकी तकनीक से एक एकड़ क्षेत्रफल में 10 से 12 हजार तक पौधे लगाए जा सकते हैं। एक एकड़ में जंगल विकसित करने में आठ से दस लाख रुपये खर्च होते हैं। सीडीओ शंभूनाथ तिवारी ने बताया कि फिलहाल इस दिशा में काम नहीं हो रहा है। घना जंगल लगवाने के लिए फिर से प्रयास किया जाएगा।
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