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वृद्धाश्रम नाम का, न खाने का ठिकाना न दवा का
ब्यूरो, अमर उजाला/शामली
Updated Sun, 09 Sep 2018 11:33 PM IST
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वृद्वा आश्रम में निरीक्षण के दौरान जानकारी लेतीं राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष।
- फोटो : अमर उजाला
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शामली। बुजुर्गों और निराश्रितों की सेवा के नाम पर सरकारी खजाना लूटा जा रहा था। सरकार से वित्त पोषित वृद्धाश्रम के नाम पर बड़ा गोलमाल चल रहा था। राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुषमा सिंह के निरीक्षण में इसका खुलासा हुआ। वृद्धों को ठीक से खाना नहीं मिलता, दवा नहीं मिलती और आश्रम में रहने वाले वृद्धों को ही कर्मचारी बना लिया गया। यही नहीं भीख मांगने वालों को भी आश्रम में रख लिया, जो रात में रोजाना शराब पीते हैं। महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने पुलिस बुलाकर आश्रम की वार्डन सहित अन्य कई लोगों को हिरासत में ले लिया। देर रात तक आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की तैयारी चलती रही।
रविवार दोपहर उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुषमा सिंह शामली में करनाल मार्ग स्थित समाज कल्याण विभाग द्वारा वित्त पोषित आवासीय वृद्धाश्रम में निरीक्षण करने पहुंचीं। इसका संचालन अलीगढ़ की एनजीओ ग्रामीण विकास सेवा संस्थान द्वारा किया जा रहा है। आयोग की उपाध्यक्ष सुषमा सिंह ने वृद्धाश्रम के प्रत्येक कमरे और रसोईघर का निरीक्षण किया, साथ ही आश्रम में रहने वाले वृद्धों से भी गहनता से बातचीत की। इसमें आश्रम के संचालन में सरकारी धन के दुरुपयोग की पोल खुलकर सामने आई। आश्रम में रहने वालों ने बताया कि उन्हें न तो दूध मिलता है, न फल। यदि कोई बीमार हो जाए, तो उसे खुद ही दवाई खरीदकर लानी पड़ती है। आश्रम के अभिलेख देखे गए, तो उसमें करीब 70 लोगों का पंजीकरण मिला, लेकिन मौके पर 11 महिला और 24 पुरुष ही मिले। इसके अलावा आश्रम परिसर में शराब के खाली पव्वे भी पड़े मिले।
वृद्धों ने बताया कि आश्रम में चार पांच भिखारी भी ठहराए जा रहे हैं, जो दिन में भीख मांगने जाते हैं और रात को आश्रम में आकर शराब पीते हैं। इसके बाद महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने शामली कोतवाली पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को भी मौके पर बुला लिया। आश्रम की वार्डन लक्ष्मी गुप्ता तथा उनके सहयोगी सत्यप्रकाश नागर सहित कई लोगों को हिरासत में ले लिया गया। बाद में अपर जिलाधिकारी केबी सिंह, जिला प्रोबेशन अधिकारी प्रसून राय, एसडीएम
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प्रशांत कुमार भारती, तहसीलदार अभयराज पांडेय भी आश्रम पहुंचे। साथ ही समाज कल्याण विभाग के वरिष्ठ सहायक मनोज कुमार को बुलाकर आश्रम संचालकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने का निर्देश दिया गया। इस दौरान बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की प्रदेश संयोजिका मीनल गौतम, भाजपा नेता अजय संगल, अधिवक्ता सतेंद्र धीरयान, जिला पंचायत सदस्य अनुज चौहान आदि भी मौजूद रहे।
खाने के सामान में मिले कीड़े
निरीक्षण के दौरान आश्रम के रसोईघर में दो लड़कियां मिली। इनमें से एक की मां बबली यहां पर रसोइया का कार्य करती है। उसकी एवज में अपनी बेटी को भेज रखा था। वहीं, भंडार गृह में रखे खाने के सामान में कीड़े भी मिले, जिसे देखकर महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने कड़ी नाराजगी जताई।
खुद ही धोने पड़ते हैं कपड़े
आश्रम में रहने वाले वृद्धों को खुद ही कपड़े धोने पड़ते हैं। महिला आयोग की उपाध्यक्ष जब निरीक्षण कर रही थीं, तब भी एक बुजुर्ग महिला अपने कपड़े धो रही थी। आश्रम में रहने वालों ने उपाध्यक्ष को बताया कि यहां सुविधा और सेवा के नाम पर कुछ नहीं होता, बल्कि खुद ही कपड़े धोने पड़ते हैं।
35 लोगों के लिए तीन लीटर दूध
वृद्धाश्रम में रहने वालों को खाने का मेन्यू तो बना रखा है, लेकिन मेन्यू के अनुसार खाना नहीं मिलता है। आयोग की उपाध्यक्ष को लोगों ने बताया कि आज तक न तो दूध मिला, न ही फल। मिठाई भी कभी खरीदकर नहीं लाई जाती है, बल्कि कोई दान देने वाला आकर मिठाई दे जाता है। सुबह और शाम को चाय देने का नियम है, लेकिन 35 लोगों के लिए सिर्फ तीन लीटर दूध मंगाया जाता है, जो दो लीटर सुबह और एक लीटर शाम को।
आश्रम के कर्मियों से ली जाती है कमीशन
आश्रम में रहने वाली वृद्ध महिला ओमबीरी को भी वहां कर्मचारी के रूप में लगा दिया गया। उसे
साढे़ सात हजार रुपये प्रति माह देना बताया, लेकिन दिए जाते हैं सिर्फ पांच हजार रुपये। आश्रम की वार्डन लक्ष्मी गुप्ता 20 हजार रुपये प्रति माह लेती है। भंडार प्रभारी कोमल को 10 हजार और उनके पति दीपक श्रीवास्तव को 10 हजार रुपये प्रति माह मिलते हैं। आश्रम में चार रसोईया हैं, लेकिन आती सिर्फ दो हैं। चारों रसोईया को साढ़े सात-सात हजार रुपये देने बताए गए, लेकिन मौके पर रसोईया अंजू ने बताया कि उन्हें चार हजार रुपये ही मिलते हैं।
पंजीकरण से आधे ही मिले वृद्ध
वृद्धाश्रम में रहने वालों के खाने खर्च के लिए 75 रुपये प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के हिसाब से सरकार से भुगतान लिया जाता है। इसी में बड़ा खेल किया जा रहा है। आश्रम के रजिस्टर में करीब 70 लोगों का रिकार्ड मिला। जब महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने प्रत्येक के नाम बोलकर पूछे, तो उनमें से आधे लोग ही आश्रम में मिले। यदि 70 लोगों के खर्च पर प्रतिदिन का हिसाब लगाया जाए, तो प्रति माह करीब 1,60,000 रुपये शासन से लिया जा रहा है। इसके अलावा 90 हजार रुपये भवन का किराया है और एक लाख रुपये से ज्यादा सैलरी आश्रम के कर्मियों को दी जा रही है।
वृद्धाश्रम का निरीक्षण करने आई थीं। यहां पर गंभीर खामियां मिली हैं। आश्रम में वृद्धों को ठीक से खाना नहीं मिल रहा, दवा नहीं मिल रही। फल और दूध नहीं दिया जाता है। शराब पीने वालों को ठहराया जाता है। इसके खिलाफ उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जा रही है। आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी। - सुषमा सिंह, उपाध्यक्ष राज्य महिला आयोग, उत्तर प्रदेश
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रविवार दोपहर उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुषमा सिंह शामली में करनाल मार्ग स्थित समाज कल्याण विभाग द्वारा वित्त पोषित आवासीय वृद्धाश्रम में निरीक्षण करने पहुंचीं। इसका संचालन अलीगढ़ की एनजीओ ग्रामीण विकास सेवा संस्थान द्वारा किया जा रहा है। आयोग की उपाध्यक्ष सुषमा सिंह ने वृद्धाश्रम के प्रत्येक कमरे और रसोईघर का निरीक्षण किया, साथ ही आश्रम में रहने वाले वृद्धों से भी गहनता से बातचीत की। इसमें आश्रम के संचालन में सरकारी धन के दुरुपयोग की पोल खुलकर सामने आई। आश्रम में रहने वालों ने बताया कि उन्हें न तो दूध मिलता है, न फल। यदि कोई बीमार हो जाए, तो उसे खुद ही दवाई खरीदकर लानी पड़ती है। आश्रम के अभिलेख देखे गए, तो उसमें करीब 70 लोगों का पंजीकरण मिला, लेकिन मौके पर 11 महिला और 24 पुरुष ही मिले। इसके अलावा आश्रम परिसर में शराब के खाली पव्वे भी पड़े मिले।
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वृद्धों ने बताया कि आश्रम में चार पांच भिखारी भी ठहराए जा रहे हैं, जो दिन में भीख मांगने जाते हैं और रात को आश्रम में आकर शराब पीते हैं। इसके बाद महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने शामली कोतवाली पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को भी मौके पर बुला लिया। आश्रम की वार्डन लक्ष्मी गुप्ता तथा उनके सहयोगी सत्यप्रकाश नागर सहित कई लोगों को हिरासत में ले लिया गया। बाद में अपर जिलाधिकारी केबी सिंह, जिला प्रोबेशन अधिकारी प्रसून राय, एसडीएम
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प्रशांत कुमार भारती, तहसीलदार अभयराज पांडेय भी आश्रम पहुंचे। साथ ही समाज कल्याण विभाग के वरिष्ठ सहायक मनोज कुमार को बुलाकर आश्रम संचालकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने का निर्देश दिया गया। इस दौरान बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की प्रदेश संयोजिका मीनल गौतम, भाजपा नेता अजय संगल, अधिवक्ता सतेंद्र धीरयान, जिला पंचायत सदस्य अनुज चौहान आदि भी मौजूद रहे।
खाने के सामान में मिले कीड़े
निरीक्षण के दौरान आश्रम के रसोईघर में दो लड़कियां मिली। इनमें से एक की मां बबली यहां पर रसोइया का कार्य करती है। उसकी एवज में अपनी बेटी को भेज रखा था। वहीं, भंडार गृह में रखे खाने के सामान में कीड़े भी मिले, जिसे देखकर महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने कड़ी नाराजगी जताई।
खुद ही धोने पड़ते हैं कपड़े
आश्रम में रहने वाले वृद्धों को खुद ही कपड़े धोने पड़ते हैं। महिला आयोग की उपाध्यक्ष जब निरीक्षण कर रही थीं, तब भी एक बुजुर्ग महिला अपने कपड़े धो रही थी। आश्रम में रहने वालों ने उपाध्यक्ष को बताया कि यहां सुविधा और सेवा के नाम पर कुछ नहीं होता, बल्कि खुद ही कपड़े धोने पड़ते हैं।
35 लोगों के लिए तीन लीटर दूध
वृद्धाश्रम में रहने वालों को खाने का मेन्यू तो बना रखा है, लेकिन मेन्यू के अनुसार खाना नहीं मिलता है। आयोग की उपाध्यक्ष को लोगों ने बताया कि आज तक न तो दूध मिला, न ही फल। मिठाई भी कभी खरीदकर नहीं लाई जाती है, बल्कि कोई दान देने वाला आकर मिठाई दे जाता है। सुबह और शाम को चाय देने का नियम है, लेकिन 35 लोगों के लिए सिर्फ तीन लीटर दूध मंगाया जाता है, जो दो लीटर सुबह और एक लीटर शाम को।
आश्रम के कर्मियों से ली जाती है कमीशन
आश्रम में रहने वाली वृद्ध महिला ओमबीरी को भी वहां कर्मचारी के रूप में लगा दिया गया। उसे
साढे़ सात हजार रुपये प्रति माह देना बताया, लेकिन दिए जाते हैं सिर्फ पांच हजार रुपये। आश्रम की वार्डन लक्ष्मी गुप्ता 20 हजार रुपये प्रति माह लेती है। भंडार प्रभारी कोमल को 10 हजार और उनके पति दीपक श्रीवास्तव को 10 हजार रुपये प्रति माह मिलते हैं। आश्रम में चार रसोईया हैं, लेकिन आती सिर्फ दो हैं। चारों रसोईया को साढ़े सात-सात हजार रुपये देने बताए गए, लेकिन मौके पर रसोईया अंजू ने बताया कि उन्हें चार हजार रुपये ही मिलते हैं।
पंजीकरण से आधे ही मिले वृद्ध
वृद्धाश्रम में रहने वालों के खाने खर्च के लिए 75 रुपये प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के हिसाब से सरकार से भुगतान लिया जाता है। इसी में बड़ा खेल किया जा रहा है। आश्रम के रजिस्टर में करीब 70 लोगों का रिकार्ड मिला। जब महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने प्रत्येक के नाम बोलकर पूछे, तो उनमें से आधे लोग ही आश्रम में मिले। यदि 70 लोगों के खर्च पर प्रतिदिन का हिसाब लगाया जाए, तो प्रति माह करीब 1,60,000 रुपये शासन से लिया जा रहा है। इसके अलावा 90 हजार रुपये भवन का किराया है और एक लाख रुपये से ज्यादा सैलरी आश्रम के कर्मियों को दी जा रही है।
वृद्धाश्रम का निरीक्षण करने आई थीं। यहां पर गंभीर खामियां मिली हैं। आश्रम में वृद्धों को ठीक से खाना नहीं मिल रहा, दवा नहीं मिल रही। फल और दूध नहीं दिया जाता है। शराब पीने वालों को ठहराया जाता है। इसके खिलाफ उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जा रही है। आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी। - सुषमा सिंह, उपाध्यक्ष राज्य महिला आयोग, उत्तर प्रदेश