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भारत जैसी संस्कृति दुनिया में कहीं नहीं : गंगा गिरि
ब्यूरो/ अमर उजाला, शामली
Updated Wed, 06 Apr 2016 01:34 AM IST
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शामली। ईश्वर उपासना और संतों की संगत भा जाए, तो देश, धर्म सब छूट जाता है। प्रभु की भक्ति में लीन होकर मन मंदिर को आनंद की प्राप्ति होती है। यह भारतीय संस्कृति में विद्यमान है, बाकी दुनिया में कहीं नहीं। तभी तो फ्रांस में पैदा होने के बावजूद मैं आज भारत में हूं और जीवन पर्यन्त यही रहना चाहती हूं।
उक्त विचार हैं फ्रांस में जन्म लेने वाली उस महिला के संत जीवन धारण करने के बाद गंगा गिरि कहलाई। कई साल से वह शुक्रताल में शिवधाम के पास आश्रम में रहती हैं। मंगलवार को वह शामली के ग्राम मुंडेट कला में महंत धर्मेंद्र गिरि की पुण्य तिथि पर आयोजित कार्यक्रम में पहुंची।
साधू संतों का जमावड़ा लगा था, तो वहीं संयासिन गंगा गिरि को देखने वालों की भीड़ लगी रही। इस दौरान गंगा गिरि ने कहा कि भारतीय संस्कृति महान है। दुनिया के किसी देश में ऐसा देखने को नहीं मिला। यहां हर जाति धर्म के लोग रहते हैं। यह धरती धन्य है, जहां स्वामी कल्याण देव जैसे महान हस्ती ने जन्म लिया। 25 साल पूर्व लखनऊ में अपने गुरू के समक्ष संत जीवन ग्रहण किया।
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उक्त विचार हैं फ्रांस में जन्म लेने वाली उस महिला के संत जीवन धारण करने के बाद गंगा गिरि कहलाई। कई साल से वह शुक्रताल में शिवधाम के पास आश्रम में रहती हैं। मंगलवार को वह शामली के ग्राम मुंडेट कला में महंत धर्मेंद्र गिरि की पुण्य तिथि पर आयोजित कार्यक्रम में पहुंची।
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साधू संतों का जमावड़ा लगा था, तो वहीं संयासिन गंगा गिरि को देखने वालों की भीड़ लगी रही। इस दौरान गंगा गिरि ने कहा कि भारतीय संस्कृति महान है। दुनिया के किसी देश में ऐसा देखने को नहीं मिला। यहां हर जाति धर्म के लोग रहते हैं। यह धरती धन्य है, जहां स्वामी कल्याण देव जैसे महान हस्ती ने जन्म लिया। 25 साल पूर्व लखनऊ में अपने गुरू के समक्ष संत जीवन ग्रहण किया।
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