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Shamli News: सिंचाई के लिए बिजली नहीं, धान की फसल पर मंडराया संकट

Sat, 24 May 2025 12:36 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 24 May 2025 12:36 AM IST
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No electricity for irrigation, paddy crop in danger
शामली क्षेत्र के गांव झाल में बिजली न आने पर विरोध करते लोग । संवाद
झिंझाना। क्षेत्र में साठी धान की फसल अपने अहम चरण में पहुंच चुकी है। किसानों ने खेतों में बीज से पौध तैयार कर धान लगाया है, लेकिन बिजली की भारी किल्लत ने किसानों की मेहनत पर पानी फिरने की स्थिति बना दी है। आठ घंटे की सीमित आपूर्ति में नलकूप चलाना और समय पर सिंचाई करना चुनौती बन गया है।
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किसानों का कहना है कि साठी धान को समय पर पानी चाहिए होता है। अगर दो-तीन दिन भी सिंचाई न हो, तो फसल मुरझाने लगती है। ऐसे में बिजली की अनियमित आपूर्ति ने संकट और गहरा कर दिया है।
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- किसान बोले बोले, 10 बीघे में लगाया धान, अब बिजली नहीं है

टोडा गांव के रहने वाले अरविंद राठी ने बताया कि उन्होंने 10 बीघे में धान की फसल लगाई है। बीज से पौध उगाकर नर्सरी तैयार की, फिर गहन पाड़े से रोपाई की। खाद, स्प्रे और दवाइयों पर भारी खर्च आ चुका है। अब जब सिंचाई की जरूरत है तो बिजली आठ घंटे ही मिलती है, जिससे नलकूप नहीं चल पा रहा।
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- फसल एक महीने की हो चुकी, सिंचाई नहीं तो सब बेकार
राजीव गिल ने बताया कि कुछ खेतों की फसल एक महीने पुरानी है और कुछ हाल ही में लगाई गई है, लेकिन बिजली न होने से सिंचाई अटक गई है। उन्होंने कहा, बिजली के भरोसे अब फसल को सूखने से नहीं रोक पा रहे।



- गन्ने से नुकसान हुआ, अब धान पर दांव लगाया था


सुधीर शर्मा ने कहा कि उन्होंने 12 बीघे में धान बोया है। गन्ना मिलों से समय पर भुगतान न मिलने के कारण अबकी बार धान पर भरोसा किया, लेकिन बिजली संकट ने इस पर भी संकट खड़ा कर दिया है। अगर साठी धान पर भी रोक लगी तो किसान कहां जाएंगे? उन्होंने सवाल उठाया।

मेनपाल ने बताया कि उन्होंने 30 बीघा में धान लगाया है। फसल की उम्र एक महीने के करीब है और इस समय सिंचाई सबसे जरूरी है। अगर बिजली ठीक मिल जाए और फसल बच जाए, तो उड़द लगाने की सोच रहे हैं, उन्होंने कहा।

किसानों की मांग, बिजली 12 घंटे हो और रोक न लगे
किसानों ने प्रशासन से अपील की है कि बिजली की आपूर्ति बढ़ाई जाए और साठी धान पर किसी भी प्रकार की रोक लगाने से पहले किसानों की स्थिति को देखा जाए।
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