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Shamli News: पुलों के निर्माण के लिए मांगे थे नौ करोड़, मिली ढाई करोड़ की स्वीकृति
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शामली। जिले में रजबहे और माइनर के पुलों की हालत काफी खस्ता है। सिंचाई विभाग को शासन से इनकी मरम्मत और निर्माण के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं मिल पा रही है। विभाग ने नौ करोड़ का एस्टीमेट शासन को भेजा था। लेकिन महज ढाई करोड़ की वित्तीय स्वीकृति ही मिली। धन आवंटन के बिना ही सिंचाई विभाग ने 48 पुलों के टेंडर भी निकाल दिए।
जिले में सिंचाई विभाग के अधिकार क्षेत्र में रजबहे और माइनर के 295 पुल हैं। इनमें अधिकतर पुलों की हालत काफी जर्जर है। ग्रामीण पुलों की मरम्मत और निर्माण की मांग अक्सर उठाते रहते हैं। जिस पर विभाग ने नौ करोड़ का एस्टीमेट तैयार कराकर शासन को भेजा था। लेकिन वहां से महज ढाई करोड़ की ही वित्तीय स्वीकृति मिल पाई। शासन की ओर से धन आवंटित भी नहीं हुआ और विभाग ने 48 पुलों के टेंडर निकाल दिए। जिनमें 18 पुलों की मरम्मत होनी है और 30 का पुर्ननिर्माण होना है। शासन से धन आवंटित होने में अभी कितना समय लगेगा इसकी जानकारी अधिकारियों को भी नहीं है। धन आवंटन न होने पर टेंडर निरस्त भी किए जा सकते हैं। ऐसे में फिलहाल पुलों की मरम्मत और निर्माण होना संभव नहीं है।
पूर्वी यमुना नहर खंड के अधिशासी अभियंता रविंद्र राणा का कहना है कि शासन को नौ करोड़ का एस्टीमेट भेजा गया था। जिसमें से अभी ढाई करोड़ की वित्तीय स्वीकृति ही मिली है। शासन की ओर से धन आवंटन होने पर पुलों की मरम्मत और निर्माण कराया जाएगा।
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जिले में सिंचाई विभाग के अधिकार क्षेत्र में रजबहे और माइनर के 295 पुल हैं। इनमें अधिकतर पुलों की हालत काफी जर्जर है। ग्रामीण पुलों की मरम्मत और निर्माण की मांग अक्सर उठाते रहते हैं। जिस पर विभाग ने नौ करोड़ का एस्टीमेट तैयार कराकर शासन को भेजा था। लेकिन वहां से महज ढाई करोड़ की ही वित्तीय स्वीकृति मिल पाई। शासन की ओर से धन आवंटित भी नहीं हुआ और विभाग ने 48 पुलों के टेंडर निकाल दिए। जिनमें 18 पुलों की मरम्मत होनी है और 30 का पुर्ननिर्माण होना है। शासन से धन आवंटित होने में अभी कितना समय लगेगा इसकी जानकारी अधिकारियों को भी नहीं है। धन आवंटन न होने पर टेंडर निरस्त भी किए जा सकते हैं। ऐसे में फिलहाल पुलों की मरम्मत और निर्माण होना संभव नहीं है।
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पूर्वी यमुना नहर खंड के अधिशासी अभियंता रविंद्र राणा का कहना है कि शासन को नौ करोड़ का एस्टीमेट भेजा गया था। जिसमें से अभी ढाई करोड़ की वित्तीय स्वीकृति ही मिली है। शासन की ओर से धन आवंटन होने पर पुलों की मरम्मत और निर्माण कराया जाएगा।
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