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Shamli News: भड़ी भरतपुरी में 10 दिनों में नौ पशुओं की मौत
Wed, 18 Dec 2024 11:59 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Wed, 18 Dec 2024 11:59 PM IST
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शामली, चौसाना। भड़ी भरतपूरी में पिछले 10 दिनों के भीतर 9 पशुओं की मौत हो चुकी है। इन मौतों में से आठ पशु महताब अली के थे। चिकित्सकों ने गलघोंटू और बुखार से मौत होने की बात कही है। ग्रामीणों ने गांव में कैंप लगवाने की मांग की है।
महताब ने बताया कि अचानक ही पशुओं ने चारा खाना बंद कर दिया था। बुधवार को भी एक पशु ने दम तोड़ दिया। दस दिन से गांव में लगातार मौतें हो रही है मगर विभागीय अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। गांववासियों ने प्रशासन से मुआवजा देने और इस बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है। पशुपालन विभाग ने प्रभावित क्षेत्र में टीकाकरण अभियान तेज कर दिया है और पशुपालकों को सलाह दी है कि वे बीमार पशुओं को अन्य पशुओं से अलग रखे।
ग्रामीणों का कहना है कि टीकाकरण अभियान के साथ-साथ इस बीमारी से बचाव के लिए और अधिक उपाय किए जाने चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। पशु चिकित्सक डॉ. अरविंद ने बताया कि गलघोंटू बीमारी मुख्य रूप से बैक्टीरिया के कारण होती है, जो गले, श्वसन तंत्र और रक्त प्रणाली को प्रभावित करता है। इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, गले में सूजन, सांस लेने में कठिनाई और दिमागी सूजन शामिल है।
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प्रभावित पशुओं को चारा-पानी में रुचि कम हो जाती है और वे कमजोर महसूस करते हैं। डाॅ. अरविंद कुमार ने बताया कि गलघोंटू बीमारी का उपचार समय पर किया जाना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह बीमारी पशु की मौत का कारण बन सकती है यदि समय से इसका इलाज नहीं किया जाए। सीवीओ डॉ. चंद्रभानु कश्यप का कहना है कि गांव में टीम को भेजकर शिविर लगवाया जाएगा।
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महताब ने बताया कि अचानक ही पशुओं ने चारा खाना बंद कर दिया था। बुधवार को भी एक पशु ने दम तोड़ दिया। दस दिन से गांव में लगातार मौतें हो रही है मगर विभागीय अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। गांववासियों ने प्रशासन से मुआवजा देने और इस बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है। पशुपालन विभाग ने प्रभावित क्षेत्र में टीकाकरण अभियान तेज कर दिया है और पशुपालकों को सलाह दी है कि वे बीमार पशुओं को अन्य पशुओं से अलग रखे।
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ग्रामीणों का कहना है कि टीकाकरण अभियान के साथ-साथ इस बीमारी से बचाव के लिए और अधिक उपाय किए जाने चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। पशु चिकित्सक डॉ. अरविंद ने बताया कि गलघोंटू बीमारी मुख्य रूप से बैक्टीरिया के कारण होती है, जो गले, श्वसन तंत्र और रक्त प्रणाली को प्रभावित करता है। इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, गले में सूजन, सांस लेने में कठिनाई और दिमागी सूजन शामिल है।
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प्रभावित पशुओं को चारा-पानी में रुचि कम हो जाती है और वे कमजोर महसूस करते हैं। डाॅ. अरविंद कुमार ने बताया कि गलघोंटू बीमारी का उपचार समय पर किया जाना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह बीमारी पशु की मौत का कारण बन सकती है यदि समय से इसका इलाज नहीं किया जाए। सीवीओ डॉ. चंद्रभानु कश्यप का कहना है कि गांव में टीम को भेजकर शिविर लगवाया जाएगा।