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एनजीटी का आदेश: 33 प्रतिशत भूमि पर वृक्षारोपण करे शामली चीनी मिल

Fri, 12 Aug 2022 12:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 12 Aug 2022 12:03 AM IST
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NGT order: Shamli sugar mill should plant trees on 33 percent land
संवाद न्यूज एजेंसी
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शामली। सर शादीलाल इंटरप्राइेजज लिमिटेड के आधिपत्य वाली अपर दोआब शुगर मिल से उत्सर्जित प्रदूषण की जांच करके संयुक्त समिति ने एनजीटी में प्रस्तुत कर दी। जिस पर सुनवाई के बाद एनजीटी ने मिल को अपनी 33 प्रतिशत भूमि पर पौधरोपण करने और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा-निर्देशों के तहत छाई का निस्तारण करने के आदेश दिए। मामले में अगली सुनवाई 4 नवंबर को होगी।
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता मनीष जैन ने एनजीटी में अपर दोआब शुगर मिल शुगर मिल के प्रदूषण को लेकर शिकायत की थी। जिसमें पेराई सत्र के दौरान उड़ने वाली छाई और साल भर आने वाली दुर्गंध को लेकर प्रभावी कदम उठाने के निर्देश देने की मांग की गई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि मिल को पर्यावरणीय कानूनों का उल्लंघन कर चलाया जा रहा है। जिससे जिले के लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। इससे जल और वायु प्रदूषण भी फैलता है। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए एनजीटी ने तथ्यात्मक स्थिति का पता लगाने की आवश्यकता बताई थी। इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और डीएम की संयुक्त समिति को स्थिति का पता लगाने के आदेश दिए थे। समिति ने अपनी 60 पन्नों की रिपोर्ट एनजीटी में प्रस्तुत की थी। इस मामले में 5 अगस्त को सुनवाई हुई। जिसमें रिपोर्ट के आधार पर एनजीटी ने चीनी मिल को अपनी 33 प्रतिशत भूमि में पौधरोपण करने और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा-निर्देशों के तहत छाई का निस्तारण करने के आदेश दिए। साथ ही समिति की अन्य सिफारिशों पर दो माह में की गई कार्रवाई से एनजीटी में रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश भी दिए हैं।
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छाई उड़ने की समस्या से परेशान हैं लोग
जिले की आबादी बढ़ने के चीनी मिल शहर के बीचोंबीच आ गई है। मिल की चिमनी से छाई उड़ने की समस्या काफी पुरानी है। सर्दियों में तो यह समस्या काफी बढ़ जाती है। इसकी वजह से लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो जाती है। लोगों की आंख में भी छाई गिरने से परेशानी होती है। आस-पास के लोग कपड़े भी नहीं सुखा पाते हैं। प्रशासन ने चीनी मिल पर वायु प्रदूषण फैलाने पर पूर्व में जुर्माना भी लगाया, लेकिन इस समस्या का समाधान नहीं हो पाया।
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