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छात्रों के हित में कारगर साबित होगी नई शिक्षा नीति
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छात्रों के हित में कारगर साबित होगी नई शिक्षा नीति
शामली। केंद्र सरकार ने 34 साल बाद बहु प्रतीक्षित नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में आए बदलाव का शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने स्वागत किया गया है। उनका कहना है कि नई नीति से शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम आएंगे। छात्रों पर पढ़ाई को लेकर जो मानसिक दबाव बना रहता है, वह काफी हद तक कम होगा। छात्र अपनी रुचि के अनुसार पढ़ाई कर सकेंगे। अमर उजाला ने नई शिक्षा नीति को लेकर शिक्षाविदों से बातचीत की। पेश है रिपोर्ट...
नई शिक्षा नीति को सराहा
नई शिक्षा नीति समय की मांग थी। यह निश्चित तौर पर स्वागत योग्य है। इससे छात्रों की अभिरुचि को पंख लगेंगे। ऐसे छात्र जो किसी कारणवश अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाएं, उन्हें पुन: मौका मिलेगा। नई शिक्षा नीति प्रायोगिक होगी। इसमें शिक्षा की गुणवत्ता पर भी फोकस रहेगा, जो अत्यंत महत्वपूर्ण और आवश्यक है। शिक्षकों के लिए समान मानक, फीस निर्धारण, अधिकतम फीस निश्चित करना, जीडीपी का छह प्रतिशत शिक्षा के क्षेत्र पर खर्च, पठन-पाठन के माहौल को बेहतर बनाना और उच्च शिक्षा की भागीदारी को तेजी से बढ़ाना इसकी प्रमुख विशेषताएं है।
-डा. अरविंद कुमार, प्राचार्य आरके (पीजी) कालेज शामली।
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छात्रहित में कारगर रहेगी नई शिक्षा नीति
केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई नई शिक्षा नीति कारगर रहेगी। बोर्ड परीक्षा के स्थान पर सेमेस्टर प्रणाली लागू की गई है। इससे छात्रों पर मानसिक तनाव कम रहेगा। इंटर के बाद चार साल का कोर्स होगा और एमए एक साल की होगी। पीएचडी करने के लिए एमफिल नहीं करनी होगी। इस तरह की नई शिक्षा नीति में छात्रों के हित को ध्यान में रखा गया है। इसलिए यह कारगर साबित होगी।
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- कैप्टन लोकेंद्र सिंह, आरके इंटर कालेज शामली।
छात्रों पर पढ़ाई का मानसिक दबाव कम होगा
लंबे समय से शिक्षा में एक ही परिपाटी चली आ रही थी। अब उसमें बदलाव हुआ है। नई शिक्षा नीति से छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में उनकी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने के विकल्प मिलेंगे। छात्रों पर पढ़ाई का जो मानसिक दबाव रहता है, वह कम होगा। उनमें परिपक्वता आएगी और उनके सोचने का मौका मिलेगा कि उन्हें आगे क्या करना है, क्या बनना है। उसी के अनुसार आगे की पढ़ाई कर सकेंगे। कुल मिलाकर नई शिक्षा नीति के सकारात्मक परिणाम आएंगे।
- डा. रुचिता ढाका, प्रधानाचार्या, श्री जैन कन्या इंटर कालेज शामली।
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शामली। केंद्र सरकार ने 34 साल बाद बहु प्रतीक्षित नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में आए बदलाव का शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने स्वागत किया गया है। उनका कहना है कि नई नीति से शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम आएंगे। छात्रों पर पढ़ाई को लेकर जो मानसिक दबाव बना रहता है, वह काफी हद तक कम होगा। छात्र अपनी रुचि के अनुसार पढ़ाई कर सकेंगे। अमर उजाला ने नई शिक्षा नीति को लेकर शिक्षाविदों से बातचीत की। पेश है रिपोर्ट...
नई शिक्षा नीति को सराहा
नई शिक्षा नीति समय की मांग थी। यह निश्चित तौर पर स्वागत योग्य है। इससे छात्रों की अभिरुचि को पंख लगेंगे। ऐसे छात्र जो किसी कारणवश अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाएं, उन्हें पुन: मौका मिलेगा। नई शिक्षा नीति प्रायोगिक होगी। इसमें शिक्षा की गुणवत्ता पर भी फोकस रहेगा, जो अत्यंत महत्वपूर्ण और आवश्यक है। शिक्षकों के लिए समान मानक, फीस निर्धारण, अधिकतम फीस निश्चित करना, जीडीपी का छह प्रतिशत शिक्षा के क्षेत्र पर खर्च, पठन-पाठन के माहौल को बेहतर बनाना और उच्च शिक्षा की भागीदारी को तेजी से बढ़ाना इसकी प्रमुख विशेषताएं है।
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-डा. अरविंद कुमार, प्राचार्य आरके (पीजी) कालेज शामली।
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छात्रहित में कारगर रहेगी नई शिक्षा नीति
केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई नई शिक्षा नीति कारगर रहेगी। बोर्ड परीक्षा के स्थान पर सेमेस्टर प्रणाली लागू की गई है। इससे छात्रों पर मानसिक तनाव कम रहेगा। इंटर के बाद चार साल का कोर्स होगा और एमए एक साल की होगी। पीएचडी करने के लिए एमफिल नहीं करनी होगी। इस तरह की नई शिक्षा नीति में छात्रों के हित को ध्यान में रखा गया है। इसलिए यह कारगर साबित होगी।
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- कैप्टन लोकेंद्र सिंह, आरके इंटर कालेज शामली।
छात्रों पर पढ़ाई का मानसिक दबाव कम होगा
लंबे समय से शिक्षा में एक ही परिपाटी चली आ रही थी। अब उसमें बदलाव हुआ है। नई शिक्षा नीति से छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में उनकी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने के विकल्प मिलेंगे। छात्रों पर पढ़ाई का जो मानसिक दबाव रहता है, वह कम होगा। उनमें परिपक्वता आएगी और उनके सोचने का मौका मिलेगा कि उन्हें आगे क्या करना है, क्या बनना है। उसी के अनुसार आगे की पढ़ाई कर सकेंगे। कुल मिलाकर नई शिक्षा नीति के सकारात्मक परिणाम आएंगे।
- डा. रुचिता ढाका, प्रधानाचार्या, श्री जैन कन्या इंटर कालेज शामली।