Shamli News: न स्टाफ पूरा, न जांच की सुविधा, कैसे हो मलेरिया पर नियंत्रण
गर्मी शुरू होते ही मच्छर बड़ी संख्या में पनप रहे हैं, जिससे मलेरिया का प्रकोप फैलने की आशंका बन रही है, लेकिन जिला मलेरिया विभाग में न तो स्टाफ पूरा है और न ही जांच की सुविधा है।
विस्तार
गर्मी शुरू होते ही मच्छर बड़ी संख्या में पनप रहे हैं, जिससे मलेरिया का प्रकोप फैलने की आशंका बन रही है, लेकिन शामली जनपद के जिला मलेरिया विभाग में न तो स्टाफ पूरा है और न ही जांच की सुविधा है। ऐसी स्थिति में अगर मलेरिया फैलता है, तो उस पर पूरी तरह से नियंत्रण पाना आसान नहीं होगा।
गर्मी शुरू होते ही मच्छर पनपना शुरू हो गया है। मच्छरों के पैदा होने से इससे होने वाली बीमारियों के होने की आशंका बन रही है, लेकिन जिला मलेरिया विभाग का हाल ये है कि उसके पास न तो पूरा स्टाफ है और न ही मलेरिया जांच की सुविधा है। नमूनों की जांच के लिए विभाग को सीएचसी की पैथोलॉजी लैब पर निर्भर रहना पड़ता है, जिस वजह से नमूनों जांच रिपोर्ट के लिए इंतजार करना पड़ता है।
जिला मलेरिया विभाग में स्टाफ की स्थिति देखे तो जिला मलेरिया अधिकारी की नियुक्ति हैं, लेकिन सहायक मलेरिया अधिकारी के स्वीकृत दोनों पद खाली हैं। वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक नियुक्त नहीं है। मलेरिया निरीक्षक के स्वीकृत पांच पदों में तीन की नियुक्ति है। फील्ड वर्करों के स्वीकृत पांच पदों में तीन नियुक्त है।
सीनियर लैब टेक्नीशियन के पद पर भी कोई नियुक्त नहीं है। इनके स्थान पर कुड़ाना सीएचसी पर तैनात सहायक लैब टेक्नीशियन को विभाग से संबद्ध किया गया है। इसके अलावा विभाग में वरिष्ठ लिपिक और कनिष्ठ सहायक लिपिक के भी पद रिक्त चल रहे हैं। विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी व स्वीपर की भी नियुक्ति अभी नहीं हो पाई है।
पिछले साल बढ़े मलेरिया के केस
जिले में पिछले साल 2022 में मलेरिया के 92 केस सामने आए थे। जबकि 2021 में 57 केस मलेरिया के मिले थे। इस तरह से देखा जाए तो 2022 में मलेरिया के मामले ज्यादा आए। इस साल में ठंड के महीनों में भी मलेरिया के केस सामने आए हैं। जनवरी में एक और फरवरी माह में मलेरिया के दो केस सामने आ चुके हैं।
जिला मलेरिया विभाग में कई महत्वपूर्ण पद रिक्त चल रहे हैं। विभाग में नियुक्त स्टाफ व संसाधनों से मलेरिया को नियंत्रित रखने की पूरी कार्रवाई की जाती है। जहां से भी बुखार के केस होने की सूचना मिलती है। वहां पूरी टीम के साथ जाकर एंटी लार्वा कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराने के साथ ही मरीजों का उपचार व बुखार से बचाव के लिए लोगों को जागरूक किया जाता है। - डॉ. विनय कुमार, जिला मलेरिया अधिकारी।