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नवजात की मौत पर निजी अस्पताल में बखेड़ा
Fri, 07 Jun 2019 10:49 PM IST
NAVEEN GUPTA
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Published by: NAVEEN GUPTA
Updated Fri, 07 Jun 2019 10:49 PM IST
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- फोटो : amarujala
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नवजात की मौत होने पर महिला के परिजनों ने मोहल्ला रेलपार स्थित निजी अस्पताल में जमकर हंगामा किया। चिकित्सक पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की। उधर, एसीएमओ ने टीम के साथ अस्पताल पहुंचकर जांच की। जांच के बाद ऑपरेशन थियेटर और लेबर रूम सील कर दिया।
बाबरी थानाक्षेत्र के गांव बुटराड़ा निवासी रवि ने बताया कि प्रसव पीड़ा होने पर उसने पत्नी साक्षी को बृहस्पतिवार की शाम रेलपार स्थित गेटवेल अस्पताल में भर्ती कराया था। महिला चिकित्सक ने उन्हें दो घंटे में नार्मल डिलीवरी होने का आश्वासन दिया था। इसके बाद रात में दो-दो घंटे बढ़ाते रहे। आरोप है कि शुक्रवार की सुबह पांच बजे जब प्रसूता की तबियत बिगड़ने लगी तो उन्हें अस्पताल से निकाल दिया। इसके बाद परिजन प्रसूता को लेकर धीमानपुरा फाटक के निकट निजी अस्पताल में ले गए, जहां पर आपरेशन के बाद मृत बच्चा पैदा हुआ। इसकी सूचना पर परिजन आक्रोशित हो गए और नवजात के शव को लेकर गेटवेल अस्पताल पहुंचे। चिकित्सक पर उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। कहना था कि नवजात का रंग नीला पड़ा हुआ था, जिससे उन्हें गलत दवा और इंजेक्शन देने की आशंका है। परिजनों ने महिला चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सूचना पर थाना आदर्श मंडी पुलिस मौके पर पहुंची। परिजनों का कहना था कि जब तक कार्रवाई नहीं होती तब तक वे नहीं जाएंगे। पीड़ित रवि की तरफ से थाना आदर्श मंडी में महिला चिकित्सक के खिलाफ तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की गई। थाना प्रभारी यज्ञदत्त शर्मा ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सीएमओ ने एसीएमओ को सौंपी जांच
सीएमओ डाक्टर संजय भटनागर ने इस प्रकरण की जानकारी मिलने पर एसीएमओ डाक्टर अशोक हांडा को जांच सौंपी। एसीएमओ ने टीम के साथ गेटवेल अस्पताल पहुंचकर जांच की। एसीएमओ ने बताया कि पीड़ित पक्ष से मामले की जानकारी ली और मरीज के भर्ती संबंधी दस्तावेजों को कब्जे में ले लिया गया। अस्पताल संचालक डाक्टर कविता गर्ग मौके पर मौजूद नहीं मिली। अस्पताल की ऑपरेशन थियेटर (ओटी) और लेबर रूम को सील कर दिया गया है। मामले की जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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आठ घंटे तक निजी अस्पताल में चलता रहा हंगामा
शामली। नवजात की मौत को लेकर परिजनों का सुबह आठ बजे से शुरू हुआ हंगामा और कार्रवाई आठ घंटे तक चलती रही। शाम को करीब चार बजे ऑपरेशन थियेटर और लेबर रूम सील होने के बाद परिजन शांत हुए। आईएमए से जुड़े डाक्टरों ने भी मौके पर पहुंच कर परिजनों को शांत करने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद परिजनों ने पूरा अस्पताल सील करने की मांग रखी। परिजनों के हंगामे और दबाव के चलते एसीएमओ ने अस्पताल सील करने की तैयारी की तो आईएमए से जुड़े कई चिकित्सक फिर अस्पताल पहुंचे। उन्होंने एसीएमओ से बातचीत की। इसके बाद ऑपरेशन थियेटर और लेबर रूम को सील करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद परिजन शांत हुए।
एक निजी अस्पताल में नवजात की मौत का मामला जानकारी में आया है। इसकी जांच एसीएमओ डाक्टर अशोक हांडा को सौंपी गई है। निजी अस्पताल की ऑपरेशन थियेटर और लेबर रूम को सील कर दिया गया है। - डॉक्टर संजय भटनागर, सीएमओ।
बृहस्पतिवार रात को नार्मल डिलीवरी केस के लिए एक महिला को भर्ती कर उपचार शुरू किया गया था। शुक्रवार सुबह चार बजे तक जब नार्मल डिलीवरी नहीं हुई और बच्चे की धड़कन कम होने का अहसास हुआ तो उन्होंने परिजनों से ऑपरेशन कराने को कहा। मगर, परिजन आपरेशन कराने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद परिजन उन्हें बिना कुछ बताए मरीज को ले गए। इलाज में लापरवाही बरतने और अस्पताल से बाहर निकालने का आरोप पूरी तरह गलत है। - डाक्टर कविता गर्ग, संचालक गेटवेल हॉस्पिटल।
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बाबरी थानाक्षेत्र के गांव बुटराड़ा निवासी रवि ने बताया कि प्रसव पीड़ा होने पर उसने पत्नी साक्षी को बृहस्पतिवार की शाम रेलपार स्थित गेटवेल अस्पताल में भर्ती कराया था। महिला चिकित्सक ने उन्हें दो घंटे में नार्मल डिलीवरी होने का आश्वासन दिया था। इसके बाद रात में दो-दो घंटे बढ़ाते रहे। आरोप है कि शुक्रवार की सुबह पांच बजे जब प्रसूता की तबियत बिगड़ने लगी तो उन्हें अस्पताल से निकाल दिया। इसके बाद परिजन प्रसूता को लेकर धीमानपुरा फाटक के निकट निजी अस्पताल में ले गए, जहां पर आपरेशन के बाद मृत बच्चा पैदा हुआ। इसकी सूचना पर परिजन आक्रोशित हो गए और नवजात के शव को लेकर गेटवेल अस्पताल पहुंचे। चिकित्सक पर उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। कहना था कि नवजात का रंग नीला पड़ा हुआ था, जिससे उन्हें गलत दवा और इंजेक्शन देने की आशंका है। परिजनों ने महिला चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सूचना पर थाना आदर्श मंडी पुलिस मौके पर पहुंची। परिजनों का कहना था कि जब तक कार्रवाई नहीं होती तब तक वे नहीं जाएंगे। पीड़ित रवि की तरफ से थाना आदर्श मंडी में महिला चिकित्सक के खिलाफ तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की गई। थाना प्रभारी यज्ञदत्त शर्मा ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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सीएमओ ने एसीएमओ को सौंपी जांच
सीएमओ डाक्टर संजय भटनागर ने इस प्रकरण की जानकारी मिलने पर एसीएमओ डाक्टर अशोक हांडा को जांच सौंपी। एसीएमओ ने टीम के साथ गेटवेल अस्पताल पहुंचकर जांच की। एसीएमओ ने बताया कि पीड़ित पक्ष से मामले की जानकारी ली और मरीज के भर्ती संबंधी दस्तावेजों को कब्जे में ले लिया गया। अस्पताल संचालक डाक्टर कविता गर्ग मौके पर मौजूद नहीं मिली। अस्पताल की ऑपरेशन थियेटर (ओटी) और लेबर रूम को सील कर दिया गया है। मामले की जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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आठ घंटे तक निजी अस्पताल में चलता रहा हंगामा
शामली। नवजात की मौत को लेकर परिजनों का सुबह आठ बजे से शुरू हुआ हंगामा और कार्रवाई आठ घंटे तक चलती रही। शाम को करीब चार बजे ऑपरेशन थियेटर और लेबर रूम सील होने के बाद परिजन शांत हुए। आईएमए से जुड़े डाक्टरों ने भी मौके पर पहुंच कर परिजनों को शांत करने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद परिजनों ने पूरा अस्पताल सील करने की मांग रखी। परिजनों के हंगामे और दबाव के चलते एसीएमओ ने अस्पताल सील करने की तैयारी की तो आईएमए से जुड़े कई चिकित्सक फिर अस्पताल पहुंचे। उन्होंने एसीएमओ से बातचीत की। इसके बाद ऑपरेशन थियेटर और लेबर रूम को सील करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद परिजन शांत हुए।
एक निजी अस्पताल में नवजात की मौत का मामला जानकारी में आया है। इसकी जांच एसीएमओ डाक्टर अशोक हांडा को सौंपी गई है। निजी अस्पताल की ऑपरेशन थियेटर और लेबर रूम को सील कर दिया गया है। - डॉक्टर संजय भटनागर, सीएमओ।
बृहस्पतिवार रात को नार्मल डिलीवरी केस के लिए एक महिला को भर्ती कर उपचार शुरू किया गया था। शुक्रवार सुबह चार बजे तक जब नार्मल डिलीवरी नहीं हुई और बच्चे की धड़कन कम होने का अहसास हुआ तो उन्होंने परिजनों से ऑपरेशन कराने को कहा। मगर, परिजन आपरेशन कराने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद परिजन उन्हें बिना कुछ बताए मरीज को ले गए। इलाज में लापरवाही बरतने और अस्पताल से बाहर निकालने का आरोप पूरी तरह गलत है। - डाक्टर कविता गर्ग, संचालक गेटवेल हॉस्पिटल।