फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shamli News ›   NA

Shamli News: रिम-धुरा व बर्तन उद्योग पर संकट, रोजाना पांच करोड़ का नुकसान

Tue, 10 Jan 2023 12:24 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 10 Jan 2023 12:24 AM IST
विज्ञापन
NA
शामली। एक तरफ सरकार नए निवेश के लिए उद्यमियों को प्रोत्साहित कर रही है। दूसरी तरफ जिले में कई उद्योग बंदी की कगार पर पहुंच गए हैं। एनसीआर में एक जनवरी 2023 से उद्योगों में ईंधन के रूप में कोयले पर प्रतिबंध लगने से जिले में बर्तन की करीब 40 और रिम-धुरा की करीब 30 इकाई पर संकट छा गया है। रोजाना करीब पांच करोड़ का नुकसान हो रहा है। ऐसे में औद्योगिक इकाईयों में करीब 12 हजार मजदूर बेरोजगार हो सकते हैं।
विज्ञापन

दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण की रोकथाम के लिए नए वर्ष में एक जनवरी से उद्योगों में ईंधन के रूप में कोयले के इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया। अब सिर्फ पीनएजी, सीएनजी और बायोमास फ्यूल ही इस्तेमाल करने की अनुमति है। जो कोयले से काफी महंगा है और इसकी उपलब्धता भी कम है। इससे उद्यमियों को कारोबार में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार घाटा होने से उनके सामने उद्योग बंद करने या एनसीआर क्षेत्र के बाहर स्थानांतरित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
विज्ञापन


तीन इकाई प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने की सील

केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन के आदेश के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कार्रवाई भी शुरू कर दी है। जिसके तहत जिले की आदिनाथ इंडस्ट्रीज और जेके इंडस्ट्रीज समेत तीन औद्योगिक इकाईयों को सील कर दिया गया है। इससे अन्य कारोबारियों में हड़कंप की स्थिति है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ऐसी स्थिति में नहीं है कारोबार संभव

शामली इंडस्ट्रियल एस्टेट एंड मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन (साइमा) और लघु उद्योग भारती के जिलाध्यक्ष अंकित गोयल का कहना है कि बायोमास फ्यूल का दाम कोयले के मुताबिक काफी अधिक है। जिससे उद्यमियों को नुकसान होगा और कारोबार करना मुश्किल हो जाएगा।

लागत बढ़ेगी तो होगा नुकसान

साइमा के महासचिव अमित जैन का कहना है कि कोयले की जगह बायोमास फ्यूल इस्तेमाल करने से उत्पाद की लागत बढ़ेगी। जिससे उद्यमी बाजार में टिक नहीं पाएंगे। मजबूरन उन्हें कारोबार या तो बंद करना पड़ेगा या एनसीआर से बाहर स्थानांतरित करना पड़ेगा।

एक समान नियमावली पूरे देश में हो लागू

साइमा के सचिव आशीष अग्रवाल का कहना है कि जिले की वायु की गुणवत्ता दिल्ली के एक्यूआई से आधार पर की जाती है। जबकि इसमें काफी अंतर होता है। सरकार या तो जिले को एनसीआर से बाहर करे या फिर एक जैसी नियमावली पूरे देश में अपनानी चाहिए।

उद्यमियों की समस्याओं के समाधान को कदम उठाए सरकार

साइमा के कोषाध्यक्ष अपूर्व जैन का कहना है कि एक ओर तो सरकार निवेश के लिए उद्यमियों को प्रोत्साहित कर रही है। दूसरी ओर, दोहरी नीति से उद्यमियों को नुकसान पहुंच रहा है। सरकार को उद्यमियों की समस्याओं का समाधान करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।


ईंट भट्ठे भी नहीं हो पाएंगे संचालित

ईंट निर्माता समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र मलिक का कहना है कि जिले में 150 ईंट भट्ठे हैं। जिनसे हजारों परिवार के करीब 30 हजार मजदूरों की रोजी-रोटी चलती थी। कोयले और लकड़ी के ईंधन के रूप में इस्तेमाल पर प्रतिबंध के चलते ईंट भट्ठों का संचालन नहीं हो पाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed