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महंगे इलाज के आगे टेक दिए घुटने
अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Sun, 10 Jul 2016 11:51 PM IST
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गांव डांगरोल में जांच रिपोर्ट दिखाते हुए हेपेटाईटिस सी से पीड़ित लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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शामली के अलीपुर गांव के बाद अमर उजाला की टीम कांधला क्षेत्र के गांव डांगरौल में पहुंची, तो इस गांव के लोगों में भी हेपेटाइटिस सी का खौफ साफ नजर आया। गांव के लोगों से वार्ता की तो पता चला कि गांव में पिछले कुछ समय से मौत होने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है।
लोगों में भय हुआ कि एक-एक कर बीमारी लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। गांव वालों के प्रयास के चलते दस दिन पूर्व गांव में एक संस्था के द्वारा ब्लड कैंप लगाया गया। इसमें 82 लोगों की जांच में 35 लोग हेपेटाइटिस सी पाजिटिव पाए गए।
गांव वासी संसार सिंह ने बताया कि उसके परिवार से वह स्वयं बेटा अंकित, पत्नि बबीता इस बीमारी से पीड़ित है। गरीबी के कारण इस बीमारी का परिवार के तीन तीन लोग खर्च वहन नहीं कर पा रहे हैं। इसी गांव के सतेंद्र और उनका बेटा सचिन को भी जब इस बीमारी के बारे में पता चला तो उनके पास इतना रुपये न होने के कारण इलाज शुरू नहीं करा पाए हैं।
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कैंप के दौरान गांववासी जयकुमार, अंगूरी, विमलेश, महक सिंह, छोटा, सोहनवीरी, राजबीरी, संतोष, राजेश, अशोक, नवाब, सोमपाल, संदीप शर्मा, आशू, रणधीरा, बबली, को इस जानलेवा बीमारी के होने के बारे में जानकारी हुई तो इन लोगों के होश उड़ गए।
इनमें से कुछ लोगों ने अपना इलाज निजी चिकित्सकों के यहां पर शुरू करा दिया है, लेकिन अधिकतर लोग पैसों के अभाव में अपना उपचार शुरू नहीं करा पाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस संबंध में कोई प्रयास नहीं किया गया।
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लोगों में भय हुआ कि एक-एक कर बीमारी लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। गांव वालों के प्रयास के चलते दस दिन पूर्व गांव में एक संस्था के द्वारा ब्लड कैंप लगाया गया। इसमें 82 लोगों की जांच में 35 लोग हेपेटाइटिस सी पाजिटिव पाए गए।
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गांव वासी संसार सिंह ने बताया कि उसके परिवार से वह स्वयं बेटा अंकित, पत्नि बबीता इस बीमारी से पीड़ित है। गरीबी के कारण इस बीमारी का परिवार के तीन तीन लोग खर्च वहन नहीं कर पा रहे हैं। इसी गांव के सतेंद्र और उनका बेटा सचिन को भी जब इस बीमारी के बारे में पता चला तो उनके पास इतना रुपये न होने के कारण इलाज शुरू नहीं करा पाए हैं।
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कैंप के दौरान गांववासी जयकुमार, अंगूरी, विमलेश, महक सिंह, छोटा, सोहनवीरी, राजबीरी, संतोष, राजेश, अशोक, नवाब, सोमपाल, संदीप शर्मा, आशू, रणधीरा, बबली, को इस जानलेवा बीमारी के होने के बारे में जानकारी हुई तो इन लोगों के होश उड़ गए।
इनमें से कुछ लोगों ने अपना इलाज निजी चिकित्सकों के यहां पर शुरू करा दिया है, लेकिन अधिकतर लोग पैसों के अभाव में अपना उपचार शुरू नहीं करा पाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस संबंध में कोई प्रयास नहीं किया गया।