{"_id":"5ce6f205bdec22072b5a64f7","slug":"modi-magic-ke-aage-gathbandhan-ki-raneeti-fail","type":"story","status":"publish","title_hn":"मोदी मैजिक के आगे गठबंधन की रणनीति हुई फेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मोदी मैजिक के आगे गठबंधन की रणनीति हुई फेल
Fri, 24 May 2019 12:48 AM IST
NAVEEN GUPTA
amarujala
amarujala
Published by: NAVEEN GUPTA
Updated Fri, 24 May 2019 12:48 AM IST
विज्ञापन
file
- फोटो : amarujala
कैराना लोकसभा सीट पर आखिर मोदी मैजिक और भाजपा की रणनीति के आगे गठबंधन का फार्मूला फेल हो गया। भाजपा तीसरी बार कैराना लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज कर काबिज हो गई है।
कैराना लोकसभा सीट पर ज्यादा विपक्षी खेमा काबिज रहा है। वर्ष 1962 से कैराना लोकसभा सीट के इतिहास पर नजर डाले तो आठ बार विपक्षी दलों के सांसद बने हैं। पहली बार 1962 से यशपाल सिंह निर्दलीय, 1967 में गयूर अली, 1980 से पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की धर्म पत्नी गायत्री देवी, 1996 से सपा से चौधरी मुनव्वर हसन, रालोद से 1998 में अमीर आलम खां 2004 में अनुराधा चौधरी, 2009 में बसपा से तबस्सुम बेगम, 2018 उपचुनाव में सपा- बसपा गठबंधन से तबस्सुम बेगम काबिज रहीं। सत्ता पक्ष के वर्ष 1971 में काग्रेस से शफ्फकत जंग, वर्ष 1977 में जनता पार्टी से चौधरी चंदन सिंह, वर्ष 1984 में कांग्रेस से चौधरी अख्तर हसन, वर्ष 1991- 1993 में जनता दल से हरपाल सिंह पंवार सांसद काबिज रहे। कैराना लोकसभा चुनाव में भाजपा सबसे पहले 1999 में पंजाब- हिमाचल के पूर्व राज्यपाल वीरेंद्र वर्मा ने विरोधी दलों के किले को ध्वस्त कर दिया था। वीरेंद्र वर्मा दो लाख 89 हजार 110 वोट लेकर कैैैराना में सांसद चुने गए थे। दूसरी बार वर्ष 2014 में मोदी लहर में भाजपा के सांसद हुकुम सिंह चुने गए थे। भाजपा सांसद हुकुम सिंह के निधन के बाद कैैैराना लोकसभा के उपचुनाव वर्ष 2018 में पूर्व सांसद हुकुम सिंह की पुत्री मृंगाका सिंह को प्रत्याशी बनाकर भाजपा ने उतारा था। वर्ष 2018 में सपा- बसपा, रालोद, कांग्रेस आदि राजनैतिक दलों ने संयुक्त रूप से वर्ष 2019 के आम लोकसभा चुनाव में गठबंधन का फार्मूला तैयार किया था। कैराना लोकसभा उपचुनाव में मुस्लिम- जाट, दलित के मतों के सहारे भाजपा को घेर लिया था। गठबंधन प्रत्याशी तबस्सुम बेगम उपचुनाव में जीत गई थी। गठबंधन प्रत्याशी की जीत में सहारनपुुर जिले की नकुड़ और गंगोह के ज्यादा वोटों का योगदान रहा था। 2019 के लोकसभा चुनाव को फतह करने के लिए भाजपा हाईकमान ने विपक्षी दलों के गढ़ से गंगोह के विधायक प्रदीप चौधरी को प्रत्याशी बनाकर नया दांव खेला गया। लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फैक्टर और भाजपा की चुनावी रणनीति प्रभावी रही। पहले राउंड से लेकर आखिर राउंड तक भाजपा प्रत्याशी प्रदीप चौधरी की जीत के मतों की लीड बढ़ती गई। 2019 के लोकसभा चुनाव में वोटों के धुव्रीकरण होने से गठबंधन की रणनीति का फार्मूला फेल हो गया।
कैराना लोस सीट का इतिहास
1962- यशपाल सिंह -निर्दलीय
1967 -गयूर अली खान-एसएसपी
1971 -शफाकत जंग - कांग्रेस
1977 चंदन सिंह -जनता पार्टी
1980- गायत्री देवी - जनता पार्टी (एस)
1984 अख्तर हसन - कांग्रेस
1991- हरपाल पंवार- जद
1993 हरपाल पंवार- जद
1996- मुनव्वर हसन- सपा
1998- अमीर आलम - रालोद
1999- वीरेंद्र वर्मा - भाजपा
2004- अनुराधा चौधरी -रालोद
2009- तबस्सुम बेगम - बसपा
2014-हुकुम सिंह -भाजपा
2018- तबस्सुम बेगम -रालोद-सपा बसपा गठबंधन
2019- प्रदीप चौधरी- भाजपा।
विज्ञापन
कैराना लोकसभा सीट पर ज्यादा विपक्षी खेमा काबिज रहा है। वर्ष 1962 से कैराना लोकसभा सीट के इतिहास पर नजर डाले तो आठ बार विपक्षी दलों के सांसद बने हैं। पहली बार 1962 से यशपाल सिंह निर्दलीय, 1967 में गयूर अली, 1980 से पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की धर्म पत्नी गायत्री देवी, 1996 से सपा से चौधरी मुनव्वर हसन, रालोद से 1998 में अमीर आलम खां 2004 में अनुराधा चौधरी, 2009 में बसपा से तबस्सुम बेगम, 2018 उपचुनाव में सपा- बसपा गठबंधन से तबस्सुम बेगम काबिज रहीं। सत्ता पक्ष के वर्ष 1971 में काग्रेस से शफ्फकत जंग, वर्ष 1977 में जनता पार्टी से चौधरी चंदन सिंह, वर्ष 1984 में कांग्रेस से चौधरी अख्तर हसन, वर्ष 1991- 1993 में जनता दल से हरपाल सिंह पंवार सांसद काबिज रहे। कैराना लोकसभा चुनाव में भाजपा सबसे पहले 1999 में पंजाब- हिमाचल के पूर्व राज्यपाल वीरेंद्र वर्मा ने विरोधी दलों के किले को ध्वस्त कर दिया था। वीरेंद्र वर्मा दो लाख 89 हजार 110 वोट लेकर कैैैराना में सांसद चुने गए थे। दूसरी बार वर्ष 2014 में मोदी लहर में भाजपा के सांसद हुकुम सिंह चुने गए थे। भाजपा सांसद हुकुम सिंह के निधन के बाद कैैैराना लोकसभा के उपचुनाव वर्ष 2018 में पूर्व सांसद हुकुम सिंह की पुत्री मृंगाका सिंह को प्रत्याशी बनाकर भाजपा ने उतारा था। वर्ष 2018 में सपा- बसपा, रालोद, कांग्रेस आदि राजनैतिक दलों ने संयुक्त रूप से वर्ष 2019 के आम लोकसभा चुनाव में गठबंधन का फार्मूला तैयार किया था। कैराना लोकसभा उपचुनाव में मुस्लिम- जाट, दलित के मतों के सहारे भाजपा को घेर लिया था। गठबंधन प्रत्याशी तबस्सुम बेगम उपचुनाव में जीत गई थी। गठबंधन प्रत्याशी की जीत में सहारनपुुर जिले की नकुड़ और गंगोह के ज्यादा वोटों का योगदान रहा था। 2019 के लोकसभा चुनाव को फतह करने के लिए भाजपा हाईकमान ने विपक्षी दलों के गढ़ से गंगोह के विधायक प्रदीप चौधरी को प्रत्याशी बनाकर नया दांव खेला गया। लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फैक्टर और भाजपा की चुनावी रणनीति प्रभावी रही। पहले राउंड से लेकर आखिर राउंड तक भाजपा प्रत्याशी प्रदीप चौधरी की जीत के मतों की लीड बढ़ती गई। 2019 के लोकसभा चुनाव में वोटों के धुव्रीकरण होने से गठबंधन की रणनीति का फार्मूला फेल हो गया।
विज्ञापन
कैराना लोस सीट का इतिहास
1962- यशपाल सिंह -निर्दलीय
1967 -गयूर अली खान-एसएसपी
1971 -शफाकत जंग - कांग्रेस
1977 चंदन सिंह -जनता पार्टी
1980- गायत्री देवी - जनता पार्टी (एस)
1984 अख्तर हसन - कांग्रेस
1991- हरपाल पंवार- जद
1993 हरपाल पंवार- जद
1996- मुनव्वर हसन- सपा
1998- अमीर आलम - रालोद
1999- वीरेंद्र वर्मा - भाजपा
2004- अनुराधा चौधरी -रालोद
2009- तबस्सुम बेगम - बसपा
2014-हुकुम सिंह -भाजपा
2018- तबस्सुम बेगम -रालोद-सपा बसपा गठबंधन
2019- प्रदीप चौधरी- भाजपा।