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Shamli News: जिले के कई दिग्गज नेताओं ने चौधरी साहब से सीखा राजनीति का क ख, ग

Sat, 10 Feb 2024 02:56 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Sat, 10 Feb 2024 02:56 AM IST
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Many veteran leaders of the district learned the ABCs of politics from Chaudhary Saheb.
जलालाबाद चौधरी चरण सिंह व श्रद्धेय गायत्री देवी के साथ किला स्थित आवास पर गय्युर अली खान।
शामली। किसानों के मसीहा एवं पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का जिले से गहरा नाता रहा है। चौधरी साहब ऐसी शख्सियत रहे हैं, जिन्हाेंने लाखों किसानों को भूमि का मालिकाना हक दिलाया। चौधरी चरण सिंह की पाठशाला में जिले के कई दिग्गज नेताओं ने जहां राजनीति का क, ख, ग सीखा था वहीं जिले के लोगों को परिवार का सदस्य समझते थे।
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चौधरी चरण सिंह ने वर्ष 1967 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद कांग्रेस छोड़ बीकेडी पार्टी बनाई। वर्ष 1968 में शामली, जसाला, सिसौली में चौधरी चरण सिंह की सभा हुई। जसाला में उन्हें 35 हजार रुपये की थैली भेंट की गई थी। मुजफ्फरनगर और शामली संयुक्त जिला होने से वर्ष 1971 में चौधरी चरण सिंह मुजफ्फरनगर लोकसभा से चुनाव लड़कर हार गए थे। वर्ष 1980 में कैराना लोकसभा सीट पर चौधरी चरण सिंह की पत्नी गायत्री देवी चुनाव लड़कर विजयी हुई। वर्ष 1979 में वे प्रधानमंत्री बने। उन्होंने अपने राजनीति कार्यकाल में बीकेडी, भारतीय लोकदल और दमकिपा जैसे राजनीतिक दलों का का गठन किया।
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डॉ. यशवीर सिंह को सौंपी गई थी कमान
पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के सानिध्य में राजनीति की शुरूआत करने वाले खादी ग्रामोद्योग आयोग के चेयरमैन रहे डॉ. यशवीर सिंह कांधला विधान सभा से विधायक रहे। डाॅ. यशवीर सिंह पूर्व विधायक रहे चौधरी अजब सिंह के भतीजे हैं। वह बताते है कि वर्ष 1968 में कांग्रेस छोड़कर भारतीय क्रांति दल का गठन किया गया। संगठन को चलाने के लिए पार्टी फंड की व्यवस्था के लिए चौधरी चरण सिंह की पहली सभा जसाला और शामली के आर के इंटर कॉलेज में आयोजित की गई थी। जसाला की सभा में 35 हजार रुपये चंदा इकट्ठा कर थैली भेंट की गई। उनके ताऊ चौधरी अजब सिंह पहली बार वर्ष 1969 में कांधला विधानसभा से विधायक चुने गए। वर्ष 1971 में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह मुजफ्फरनगर लोकसभा से चुनाव लडे़। उनके चुनाव कार्यालय प्रभारी के रूप में डाॅ. यशवीर सिंह को कमान सौंपी गई। उनका कहना है कि पूर्व सरकार में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की उपेक्षा की गई। केंद्र की भाजपा सरकार ने भारत रत्न का सम्मान देरी से दिया है। किसानों में जश्न का माहौल है।
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चौधरी चरण सिंह की पाठशाला में जिले के कई दिग्गज नेताओं ने सीखा राजनीति का क ख, ग
शामली। चौधरी चरण सिंह की राजनीति पाठशाला में जसाला परिवार के पूर्व कैबिनेट मंत्री वीरेंद्र सिंह, पूर्व सांसद अमीर आलम खां, पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक, पूर्व विधायक बाबू सिंह, पूर्व सांसद गयूर अली, विधायक अशरफ अली, पूर्व विधायक राव राफे खां समेत दिग्गज नेताओं ने क, ख, ग सीखा। चौधरी चरण सिंह वर्ष 1980 में मंदिर हनुमान धाम और लालू खेड़ी इंटर काॅलेज सभा में आए। पूर्व विधायक बाबू सिंह के यहां माजरा आवास पर दोपहर भोज लिया।
विधायक अशरफ अली के ताऊ से रहा गहरा नता
विधायक अशरफ अली के ताऊ पूर्व सांसद गय्यूर अली के जलालाबाद किला में चौधरी साहब वर्ष 1980 में आए थे। रात में यहीं पर रहे थे। गय्यूर अली वर्ष 1957 में थानाभवन से विधायक, 1967 में कैराना लोकसभा से सांसद और 1977 से राज्य सभा सदस्य और 1980 में मुजफ्फरनगर लोकसभा से सांसद रहे हैं।

घर तक थी हरपाल पंवार की एंट्री
पूर्व सांसद हरपाल पंवार से भी चौधरी चरण सिंह की नजदीकियां थी। वह दिल्ली में अध्यापक होने के दौरान अक्सर चौधरी चरण के आवास और कार्यालय में जाते रहते थे। हरपाल पंवार ने भी उन्हीं से राजनीति का क, ख, ग सीखा। हरपाल पंवार बताते हैं कि किसान मसीहा चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिए जाने का केंद्र का शानदार निर्णय है। किसान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को हमेशा याद रखेंगे।

जलालाबाद चौधरी चरण सिंह व श्रद्धेय गायत्री देवी के साथ किला स्थित आवास पर गय्युर अली खान।

जलालाबाद चौधरी चरण सिंह व श्रद्धेय गायत्री देवी के साथ किला स्थित आवास पर गय्युर अली खान।

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