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Shamli News: प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट के संगीत से गूंज रही मामौर झील

Thu, 19 Dec 2024 11:47 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Thu, 19 Dec 2024 11:47 PM IST
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Mamur lake is echoing with the chirping of migratory birds
फोटो ऑफ द डे....सर्दी बढ़ी तो झील पर नजर आने लगे प्रवासी पक्षीसर्दी बढ़ने के साथ ही विदेशी और प
शामली/ कैराना। जनपद में प्रवासी पक्षियों की संगीत सी चहचहाहट ने मनोहारी वातावरण उत्पन्न कर दिया है। जलक्रीड़ा करते नए पक्षी लोगों के बीच कौतूहल का विषय बने हुए हैं। मामौर झील पर पिछले कई दिन से प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट के संगीत से गूंज रही है।
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सर्दी बढ़ने के साथ ही प्रवासी पक्षियों ने जिले में डेरा डाल दिया है। मामौर झील पर ब्लैक एंड व्हाइट डक, रेड वाॅटल्ड लैपविंग और अन्य पक्षी अठखेलियां करते नजर आए। यहां पर साइबेरिया, तिब्बत, लद्दाख से पक्षी यहां पर आते हैं। पक्षी प्रेमी और विशेषज्ञ डॉ. सोनू कुमार और क्षेत्रीय वन अधिकारी राजेश कुमार के अनुसार साइबेरिया, मध्य एशिया के देशों से अमेरिकन टील, डबलिंग डक, श्वेत कंधा, बार हेडेड ग्रीस, पिनटेल, रूडी शेल डक, विजन, ग्रे लेग्ड गिज, सोवलर्स, पर्पल स्वेमफेन आदि प्रजाति के पक्षियों ने डेरा डाल दिया है। लोग भी प्रवासी पक्षियों को देखने के लिए पहुंच रहे हैं।
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- करीब तीन माह रहता है प्रवासी पक्षियों का प्रवास

आने वाले कुछ महीनों में मामौर झील पर पक्षियों की कई और प्रजातियों के आने की संभावना है। तीन माह तक अच्छी ठंड रहती है। इन तीन महीनों में प्रवासी पक्षी मामौर झील पर रहेंगे। फरवरी के अंत में मौसम में गर्मी आने की शुरुआत होते ही प्रवासी पक्षी लौटने शुरू हो जाएंगे। क्षेत्रीय वन अधिकारी ने बताया कि मामौर झील पर प्रतिवर्ष दो फरवरी को बर्ड वाचिंग मेला भी लगता है, जिसमें लोगों तथा छात्रों को प्रवासी पक्षियों से रूबरू कराते हुए उनके बारे में जानकारी दी जाती है।
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- 24 हजार किलोमीटर का सफर तय कर आते हैं पक्षी

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रवासी पक्षी 22 से लेकर 24 हजार किलोमीटर तक का सफर तय कर आते हैं। सर्दी खत्म होते ही हर हाल में अपने गंतव्य को जाने शुरू हो जाते हैं क्योंकि गर्मी इन पक्षियों को रास नहीं आती।


- प्रवासी पक्षी पहुंचने के फायदे
डाॅ. सोनू के अनुसार, ये कीटों को नियंत्रित करते हैं, जो फसलों और प्राकृतिक वातावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। ये पौधों का परागण करते हैं। ये बीजों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाते हैं, जिससे जैव विविधता बनी रहती है। इनकी बीट, जिसे गुआनो भी कहा जाता है, नाइट्रोजन से भरपूर होती है और जैविक खाद के रूप में काम करती है। इनकी व्यापकता किसी क्षेत्र में पर्यावरण की स्थिति का विश्लेषण करने में मदद करती है।
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