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चिकित्सकों के इंतजार में धूल फांक रहीं मशीनें

Fri, 18 Feb 2022 11:50 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 18 Feb 2022 11:50 PM IST
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Machines gathering dust waiting for doctors
जिला अस्पताल में तैयार एसएनसी यूनिट में लगी मशीनों के बारे में जानकारी देते सीएमएस डॉ. सफल कुमार। - फोटो : SHAMLI
शामली। जिला अस्पताल नवजात बच्चों के उपचार और देखभाल के लिए बनी सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) को चिकित्सकों का इंतजार है। करीब डेढ़ साल पहले तैयार की गई एसएनसीयू बाल रोग चिकित्सकों की नियुक्ति न होने के कारण यूनिट में लगी मशीनें धूल फांक रही हैं।
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पूर्वी यमुना नहर के किनारे मुंडेट गांव के निकट जिला संयुक्त चिकित्सालय में करीब डेढ़ साल पहले नवजात बच्चों की देखभाल व उपचार के लिए 14 बच्चों की सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट बनाई गई थी। इस यूनिट में नवजात बच्चों को उचित तापमान पर रखने के लिए 14 रेडियंट वार्मर लगाए गए हैं, लेकिन अभी तक किसी बाल रोग चिकित्सक की नियुक्ति न होने के कारण एसएनसीयू चालू नहीं हो पाई है।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. सफल कुमार का कहना है कि नवजात बच्चों को हाइपोथरमिया यानी शरीर का तापमान कम होने का खतरा रहता है, उन बच्चों को एसएनसीयू में रखा जाता है। चिकित्सकों की इंतजार में एसएनसीयू चालू न होने के कारण नवजात बच्चों को मुजफ्फरनगर जिला अस्पताल भेजा जाता है, या फिर परिजनों को प्राइवेट में महंगा उपचार कराना पड़ रहा है।
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फोटो थेरेपी की लगीं छह मशीनें
एसएनसीयू में पीलिया से पीड़ित नवजात बच्चों के लिए फोटो थेरेपी की छह मशीनें भी लगाई गई हैं। ताकि बच्चों को उचित ताप पर रखकर बीमारी से बचाव व उपचार किया जा सके, लेकिन ये मशीनें भी चिकित्सक की कमी के कारण इस्तेमाल नहीं हो रही हैं।
मदर केयर वार्ड भी नहीं हुआ चालू
जिला अस्पताल में एसएनसीयू के साथ ही प्रसूता के लिए 14 बेड का मदर केयर वार्ड बनाया गया है, लेकिन अस्पताल में महिला चिकित्सक की नियुक्ति न होने से यह सुविधा भी चालू नहीं हो सकी है। जिला अस्पताल में अभी प्रसव की सुविधा भी शुरू नहीं हो पाई है।

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ऐसे बच्चों के लिए जरूरी है एसएनसीयू
- वजन कम होना।
- शरीर का तापमान कम होना।
- ऑक्सीजन की जरूरत होना।
- किसी भी तरह का संक्रमण होना।
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कोट
जिला अस्पताल में नवजात बच्चों की देखभाल व उपचार के लिए एसएनसीयू व मदर केयर वार्ड तैयार है, लेकिन बाल रोग विशेषज्ञ और महिला चिकित्सक की नियुक्ति न होने से अभी ये सुविधाएं चालू नहीं हो पाई है। चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए शासन को कई बार पत्राचार किया जा चुका है। - डॉ. सफल कुमार, सीएमएस जिला अस्पताल।
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