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Shamli News: अल्लाह को राजी रखने के लिए रोजा रख रहे नन्हे रोजेदार
Sat, 08 Mar 2025 12:58 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Sat, 08 Mar 2025 12:58 AM IST
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कैराना में नन्हे रोजेदार स्टोरी-जिया-परिजन
कैराना। रमजान के पवित्र माह में नन्हें रोजेदार भी रोजा रखकर अल्लाह को की इबादत कर रहे हैं। इन बच्चों में इस कदर उत्साह है कि नन्हे रोजेदार सहरी में समय से पहले उठ जाते हैं तो वही इफ्तारी के समय पर भी सबसे पहले आकर दस्तरखान पर बैठ जाते हैं।
कुछ नन्हे मुन्नें तो रोजा रखने कर जिद पर अड़ जाते हैं। इजाजत मिलने पर सहरी करते हैं तथा फिर मस्जिद में नमाज पढ़ने चले जाते हैं। बेटियां घर पर ही अपनी अम्मी के साथ नमाज पढ़ती हैं। नन्हे रोजेदारों को प्यास तो लगती है, लेकिन रोेजा रखने पर अल्लाह उन्हें सब्र की ताकत भी देता है।
मोहल्ला आलकला निवासी जिया ने कहा कि रमजान में रोजा रखने से खुशी होती है। अम्मी के साथ नमाज पढ़ती हू। रोजा इफ्तार करके अल्लाह का शुक्रिया अदा करती हूं।
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आलकला मोहल्ला की रहने वाली ताबिश चौधरी ने कहा कि घर में कोई सहरी के समय नहीं जगाता। सहरी से पहले ही आंख खुल जाती है। परिवार के लोगों के साथ सहरी व रोजा इफ्तारी में अच्छा लगता है।
अलीपुर रोड निवासी अरहम ने कहा कि रोजा रखने पर घर वाले तथा अन्य लोग शाबासी देते हैं। अल्लाह की इबादत के साथ ही रोजा रखना अच्छा लगता है।
आलकला मोहल्ला निवासी माहिरा मलिक का कहना है कि सहरी के वक्त उठ जाती हूं। रोजा रखने के साथ ही अपनी अम्मी के साथ घर में ही नमाज पढ़ती हूं। अल्लाह की इबादत करने से सुकून मिलता है।
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कुछ नन्हे मुन्नें तो रोजा रखने कर जिद पर अड़ जाते हैं। इजाजत मिलने पर सहरी करते हैं तथा फिर मस्जिद में नमाज पढ़ने चले जाते हैं। बेटियां घर पर ही अपनी अम्मी के साथ नमाज पढ़ती हैं। नन्हे रोजेदारों को प्यास तो लगती है, लेकिन रोेजा रखने पर अल्लाह उन्हें सब्र की ताकत भी देता है।
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मोहल्ला आलकला निवासी जिया ने कहा कि रमजान में रोजा रखने से खुशी होती है। अम्मी के साथ नमाज पढ़ती हू। रोजा इफ्तार करके अल्लाह का शुक्रिया अदा करती हूं।
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आलकला मोहल्ला की रहने वाली ताबिश चौधरी ने कहा कि घर में कोई सहरी के समय नहीं जगाता। सहरी से पहले ही आंख खुल जाती है। परिवार के लोगों के साथ सहरी व रोजा इफ्तारी में अच्छा लगता है।
अलीपुर रोड निवासी अरहम ने कहा कि रोजा रखने पर घर वाले तथा अन्य लोग शाबासी देते हैं। अल्लाह की इबादत के साथ ही रोजा रखना अच्छा लगता है।
आलकला मोहल्ला निवासी माहिरा मलिक का कहना है कि सहरी के वक्त उठ जाती हूं। रोजा रखने के साथ ही अपनी अम्मी के साथ घर में ही नमाज पढ़ती हूं। अल्लाह की इबादत करने से सुकून मिलता है।

कैराना में नन्हे रोजेदार स्टोरी-जिया-परिजन

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