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कैराना में बनाया गया दारुल का सेंटर
अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Mon, 26 Sep 2016 12:29 AM IST
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कैराना में हुई बैठक में मौजूद उलेमा।
- फोटो : अमर उजाला
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शामली के मदरसा जियाउल कुरान मेें दारुल कजा के संबंध में एक मीटिंग का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता मौलाना बशीर अहमद तथा संचालन मुफ्ती तालिब ने किया।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड दिल्ली दारुल कजा कमेटी के आर्गनाइजर काजी तबरेज आलम ने कहा कि दारुल कजा के जरिए मुस्लिम समाज के लोग अपनी धार्मिक समस्याओं का हल कर सकेंगेे। कैराना नगर के मोहल्ला आल दरमियान स्थित मदरसा इस्लामिया जियाउल कुरान मेें उलेमाओं की सर्वसम्मति से दारुल कजा का सेंटर बनाया गया है। जल्द ही दारुलकजा सेंटर में काजी को तैनात किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस्लामी कानून में बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं है। अल्लाह ने फरमाया कि वह व्यक्ति मोमिन हो ही नहीं सकता जो झगडे़ का समझौता इस्लामिक कानून के मुताबिक न कराए। उन्होंने बताया कि देशभर में वर्ष 2015 तक लाखों वाद विभिन्न न्यायालयों में लंबित हैं। ऑल इंडिया मिल्ली कौंसिल सहारनपुर के अध्यक्ष मौलाना अब्दुल मालिक मुगेसी ने कहा कि महिलाओं से संबंधित बड़ी संख्या में मुकदमे न्यायालयों मेें चलते हैं। विवाह के बाद न्यायालयों मेें दायर मुकदमों मेें फैसले आने पर अधिक समय लगता है जिस कारण पीड़ित को सिसकने पर मजबूर होना पड़ता है।
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दारुलकजा की स्थापना के बाद न केवल मुस्लिम समाज को लाभ मिलेगा बल्कि न्यायालयों में भी ऐसे मुकदमों में कमी आएगी। प्रतिवर्ष न्यायालयों में एक मुकदमे पर सरकार के लगभग 15 लाख रुपयेे खर्च होते हैं, इन पर भी अंकुश लगेगा।
इस अवसर पर मौलाना महफूज, मौलाना अतहर, मौलाना बशीर, मौलाना शौकत, मौलाना शौकीन, मौलाना उमर आरिफ, कारी इसराइल, क ारी माहसिन, कारी कौसर, मौलाना मौहम्मद कासिम, मुफ्ती अब्दुल हसीब, मौलाना अब्दुल्ला, मुफ्ती तालिब, मौलाना मजहर, मौलाना बदरुलहुदा, हकीम मनसूर हाशमी आदि मौजूद रहे।
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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड दिल्ली दारुल कजा कमेटी के आर्गनाइजर काजी तबरेज आलम ने कहा कि दारुल कजा के जरिए मुस्लिम समाज के लोग अपनी धार्मिक समस्याओं का हल कर सकेंगेे। कैराना नगर के मोहल्ला आल दरमियान स्थित मदरसा इस्लामिया जियाउल कुरान मेें उलेमाओं की सर्वसम्मति से दारुल कजा का सेंटर बनाया गया है। जल्द ही दारुलकजा सेंटर में काजी को तैनात किया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि इस्लामी कानून में बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं है। अल्लाह ने फरमाया कि वह व्यक्ति मोमिन हो ही नहीं सकता जो झगडे़ का समझौता इस्लामिक कानून के मुताबिक न कराए। उन्होंने बताया कि देशभर में वर्ष 2015 तक लाखों वाद विभिन्न न्यायालयों में लंबित हैं। ऑल इंडिया मिल्ली कौंसिल सहारनपुर के अध्यक्ष मौलाना अब्दुल मालिक मुगेसी ने कहा कि महिलाओं से संबंधित बड़ी संख्या में मुकदमे न्यायालयों मेें चलते हैं। विवाह के बाद न्यायालयों मेें दायर मुकदमों मेें फैसले आने पर अधिक समय लगता है जिस कारण पीड़ित को सिसकने पर मजबूर होना पड़ता है।
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दारुलकजा की स्थापना के बाद न केवल मुस्लिम समाज को लाभ मिलेगा बल्कि न्यायालयों में भी ऐसे मुकदमों में कमी आएगी। प्रतिवर्ष न्यायालयों में एक मुकदमे पर सरकार के लगभग 15 लाख रुपयेे खर्च होते हैं, इन पर भी अंकुश लगेगा।
इस अवसर पर मौलाना महफूज, मौलाना अतहर, मौलाना बशीर, मौलाना शौकत, मौलाना शौकीन, मौलाना उमर आरिफ, कारी इसराइल, क ारी माहसिन, कारी कौसर, मौलाना मौहम्मद कासिम, मुफ्ती अब्दुल हसीब, मौलाना अब्दुल्ला, मुफ्ती तालिब, मौलाना मजहर, मौलाना बदरुलहुदा, हकीम मनसूर हाशमी आदि मौजूद रहे।