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कैप्टन मदनपाल के नाम से जानी जाएगी जसाला रोड
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शामली जिले में जसाला गांव की शहीद कैप्टन मदनपाल के नाम से बनने वाली सड़क।
- फोटो : SHAMLI
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शामली। जसाला गांव को जोड़ने वाली सड़क का नाम अब पाकिस्तान के साथ 1971 के युद्ध में शहीद हुए कैप्टन मदनपाल चौहान के नाम पर होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के बाद शहीद के परिजनों का 49 साल पुराना सपना पूरा हुआ है।
1944 में शामली जिले के जसाला गांव में जन्में मदन पाल सिंह चौहान वर्ष 1963 में सीनियर कमीशन प्राप्त करके सेकेंड लेफ्टिनेंट बन गए थे। वर्ष 1968 में वायुुसेना में आ गए थे। वर्ष 1970 में वायुसेना में कैप्टन बन गए। वर्ष 1971 में कैप्टन मदन पाल सिंह पश्चिमी पठानकोट सांभा सेक्टर में तैनात थे। नौ दिसंबर 1971 में पाक की ओर से विमानों को देश की सीमा में उड़ान भरते देखा तो शंकरगढ़ मोर्चे की उन्हें जिम्मेदारी दी गई। भारत की ओर से युद्ध में अभूतपूर्व वीरता और शौर्य का परिचय देते हुए उन्होंने पाक के 40 टैंक खत्म किए। 16 दिसंबर 1971 को वीरगति प्राप्त करने के बाद शहीद की पत्नी कमलेश देवी को तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरी ने वायुसेना का एक्सग्रेसिया अवार्ड और वीर चक्र प्रदान किया था। वेस्टर्न पठानकोट में शहीद कैप्टन मदन पाल का स्मारक बना हुआ है। शहीद की पत्नी कमलेश देवी अपने पुत्र जगजीत सिंह के साथ फरीदाबाद में हैं। जिले मेें मदनपाल सिंह के नाम पर सड़क का नामकरण नहीं हो पाया था, न ही गांव में स्वागत द्वार बना था। जसाला गांव में सिर्फ जूनियर हाईस्कूल पर उनका नाम अंकित है।
पंजोखरा गांव में पहले खेल स्टेडियम का नाम भी कैप्टन मदनपाल चौहान के नाम रखा गया था, बाद में उनका नाम खेल स्टेडियम से हटा लिया गया। शहीद के परिजन दिल्ली-शामली, सहारनपुर हाईवे से जसाला गांव जाने वाली सड़क का नाम कैप्टन मदनपाल चौहान के नाम पर रखने की उम्मीद लगाए हुए थे। साथ ही जसाला में उनके नाम पर स्वागत द्वार और स्मारक बनाने की मांग है। इस संबंध में मुख्यमंत्री से भी मांग की गई थी। सीएम योगी ने ट्वीट कर शहीद के परिजनों की मांग को स्वीकार करते हुए दिल्ली-शामली-सहारनपुर हाईवे से जसाला गांव जाने वाली सड़क का नाम शहीद कैप्टन मदन पाल चौहान के नाम पर रखे जाने की संस्तुति की। शहीद के भतीजे डाक्टर जनेश्वर चौहान व उनके पुत्र कुशांक चौहान मुख्यमंत्री की घोषणा से खुश हैं। उनका कहना है कि 49 साल बाद उनका सपना पूरा हुआ है।
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गाइड लाइन के अनुसार नामकरण का कार्य होगा
शामली। लोनिवि प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता रविंद्र सिंह ने बताया कि शासन को शहीद कैप्टन मदनपाल चौहान के नाम से दिल्ली-शामली-सहारनपुर मार्ग से जसाला गांव जाने वाली सड़क का नामकरण करने का प्रस्ताव भेजा गया था। शासन की गाइड लाइन के अनुसार ही सड़क का नाम शहीद के ना पर किया जाएगा। बोर्ड अथवा पत्थर आदि कार्य गाइडलाइन के अनुसार कराया जाएगा।
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जिला मुख्यालय पर शहीद स्मारक बने
शामली। भाजपा एमएलसी वीरेंद्र सिंह का कहना है कि शहीदों के नाम पर जिला मुख्यालय पर स्मारक बने। कैप्टन मदनपाल चौहान के नाम से सड़क का नाम रख्नने पर मुख्यमंत्री का आभार करते हुए उन्होंने कहा कि गांव में शहीद के नाम पर और क्या हो सकता है, इस पर बैठकर चर्चा करेंगे।
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1944 में शामली जिले के जसाला गांव में जन्में मदन पाल सिंह चौहान वर्ष 1963 में सीनियर कमीशन प्राप्त करके सेकेंड लेफ्टिनेंट बन गए थे। वर्ष 1968 में वायुुसेना में आ गए थे। वर्ष 1970 में वायुसेना में कैप्टन बन गए। वर्ष 1971 में कैप्टन मदन पाल सिंह पश्चिमी पठानकोट सांभा सेक्टर में तैनात थे। नौ दिसंबर 1971 में पाक की ओर से विमानों को देश की सीमा में उड़ान भरते देखा तो शंकरगढ़ मोर्चे की उन्हें जिम्मेदारी दी गई। भारत की ओर से युद्ध में अभूतपूर्व वीरता और शौर्य का परिचय देते हुए उन्होंने पाक के 40 टैंक खत्म किए। 16 दिसंबर 1971 को वीरगति प्राप्त करने के बाद शहीद की पत्नी कमलेश देवी को तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरी ने वायुसेना का एक्सग्रेसिया अवार्ड और वीर चक्र प्रदान किया था। वेस्टर्न पठानकोट में शहीद कैप्टन मदन पाल का स्मारक बना हुआ है। शहीद की पत्नी कमलेश देवी अपने पुत्र जगजीत सिंह के साथ फरीदाबाद में हैं। जिले मेें मदनपाल सिंह के नाम पर सड़क का नामकरण नहीं हो पाया था, न ही गांव में स्वागत द्वार बना था। जसाला गांव में सिर्फ जूनियर हाईस्कूल पर उनका नाम अंकित है।
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पंजोखरा गांव में पहले खेल स्टेडियम का नाम भी कैप्टन मदनपाल चौहान के नाम रखा गया था, बाद में उनका नाम खेल स्टेडियम से हटा लिया गया। शहीद के परिजन दिल्ली-शामली, सहारनपुर हाईवे से जसाला गांव जाने वाली सड़क का नाम कैप्टन मदनपाल चौहान के नाम पर रखने की उम्मीद लगाए हुए थे। साथ ही जसाला में उनके नाम पर स्वागत द्वार और स्मारक बनाने की मांग है। इस संबंध में मुख्यमंत्री से भी मांग की गई थी। सीएम योगी ने ट्वीट कर शहीद के परिजनों की मांग को स्वीकार करते हुए दिल्ली-शामली-सहारनपुर हाईवे से जसाला गांव जाने वाली सड़क का नाम शहीद कैप्टन मदन पाल चौहान के नाम पर रखे जाने की संस्तुति की। शहीद के भतीजे डाक्टर जनेश्वर चौहान व उनके पुत्र कुशांक चौहान मुख्यमंत्री की घोषणा से खुश हैं। उनका कहना है कि 49 साल बाद उनका सपना पूरा हुआ है।
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गाइड लाइन के अनुसार नामकरण का कार्य होगा
शामली। लोनिवि प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता रविंद्र सिंह ने बताया कि शासन को शहीद कैप्टन मदनपाल चौहान के नाम से दिल्ली-शामली-सहारनपुर मार्ग से जसाला गांव जाने वाली सड़क का नामकरण करने का प्रस्ताव भेजा गया था। शासन की गाइड लाइन के अनुसार ही सड़क का नाम शहीद के ना पर किया जाएगा। बोर्ड अथवा पत्थर आदि कार्य गाइडलाइन के अनुसार कराया जाएगा।
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जिला मुख्यालय पर शहीद स्मारक बने
शामली। भाजपा एमएलसी वीरेंद्र सिंह का कहना है कि शहीदों के नाम पर जिला मुख्यालय पर स्मारक बने। कैप्टन मदनपाल चौहान के नाम से सड़क का नाम रख्नने पर मुख्यमंत्री का आभार करते हुए उन्होंने कहा कि गांव में शहीद के नाम पर और क्या हो सकता है, इस पर बैठकर चर्चा करेंगे।