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कोरोना काल में आध्यात्म की ओर बढ़ा झुकाव

Sat, 08 Aug 2020 12:18 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 08 Aug 2020 12:18 AM IST
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Increased inclination towards spirituality during Corona period
शामली। कोरोना महामारी के दौरान जहां पूरा विश्व चिकित्सा और विज्ञान जगत की ओर देख रहा है, वहीं ईश्वरीय सत्ता में लोगों की आस्था बढ़ी है। संक्रमण के इस काल में घरों में रहने के दौरान लोग आध्यात्म से जुड़े हैं। चित्त को शांत रखने और ईश्वर आराधना के लिए लोगों ने धार्मिक पुस्तकें खूब खरीदी। श्रीमद्भागवत एवं श्रीराम चरित मानस की बिक्री में एकदम से इजाफा हुआ है। सामान्य दिनों में जहां 15 से 20 तक धार्मिक पुस्तकें बिकती थी, अब उनकी संख्या 30 से 40 तक पहुंच गई है।
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मार्च, अप्रैल और मई माह में लॉकडाउन रहा। घरों में कैद लोग कोरोना महामारी से निजात के लिए ईश्वर से प्रार्थना कर रहे थे। खाली समय में उनका झुकाव आध्यात्म की ओर हुआ। लॉकडाउन खुलते ही धार्मिक पुस्तकों की बिक्री बढ़ गई। वशिष्ठ धार्मिक पुस्तक भंडार के आचार्य प्रवीण वशिष्ठ बताते हैं कि लॉकडाउन के बाद श्रीराम चरित मानस और श्रीमद्भागवत की मांग एकदम से बढ़ी। इसके अलावा हनुमान चालीसा, शिव चालीसा, सादर संजीवनी, नवनीत भागवत आदि भी लोग खरीद रहे हैं।
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लॉकडाउन में फोन करके पूछते थे लोग
मार्च, अप्रैल और मई में लागू लॉकडाउन के दौरान दुकानें बंद रहीं। आचार्य प्रवीण शास्त्री बताते हैं कि उनकी दुकान के बाहर उनका फोन नंबर लिखा है। लोग कॉल करके पूछते थे कि दुकान कब खुलेगी। उन्हें धार्मिक पुस्तकें खरीदनी हैं।
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कोरोना ने मूल प्रकृति से जुड़ना सिखाया
कथावाचक अरविंद दृष्टा बताते हैं कि कोरोना ने दिखा दिया है कि हमें अपनी मूल प्रकृति से जुड़कर चलना पड़ेगा। हम तभी बच सकते हैं जब हमारा मन शांत होगा, लालसाएं और कामनाएं कम होंगी। आध्यात्म स्वयं को जानने और आत्म चिंतन के लिए प्रेरित करता है। ये जो हम भागदौड़ भरी जिंदगी में व्यस्त हो गए थे, इससे काम चलने वाला नहीं है। शास्त्र हमें जीवन जीने की कला सिखाता है। ईश्वर को जानना यानी अपनी अंतरआत्मा से जुड़ना है। यदि हम आनंद चाहते हैं तो हमें स्वयं को जानना होगा और ईश्वर के नजदीक आना होगा।
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