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Shamli News: शामली में 1,021 बच्चे गंभीर कुपोषित, 314 ठिगने मिले

Fri, 23 Oct 2026 12:50 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Fri, 23 Oct 2026 12:50 AM IST
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In Shamli, 1,021 children found to be severely malnourished, 314 found to be stunted
शामली। जिले में पांच वर्ष तक के बच्चों के पोषण स्तर की जांच में 1,021 बच्चे गंभीर कुपोषण की श्रेणी में मिले हैं, जबकि 314 बच्चे ठिगने पाए गए हैं।
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महिला एवं बाल विकास विभाग की सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार 850 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत 71,416 बच्चों में से 70,997 की लंबाई और वजन की जांच की गई। जिला कार्यक्रम अधिकारी यामिनी रंजन के अनुसार जिले में गंभीर कुपोषण की स्थिति में सुधार हुआ है। बच्चों को नियमित पोषाहार और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उनके स्वास्थ्य की निगरानी भी बढ़ाई गई है।

कांधला में सबसे अधिक गंभीर कुपोषित बच्चे
परियोजनावार आंकड़ों के अनुसार कांधला में सबसे अधिक 218 बच्चे गंभीर कुपोषण की श्रेणी में मिले। यहां 78 बच्चे ठिगने पाए गए। ऊन में 216 बच्चे गंभीर कुपोषित और 64 बच्चे ठिगने मिले। थानाभवन में 201 बच्चे गंभीर कुपोषण की श्रेणी में पाए गए, जबकि 97 बच्चे ठिगने मिले। शामली परियोजना में 195 गंभीर कुपोषित और 34 ठिगने बच्चे मिले। कैराना में 191 बच्चे गंभीर कुपोषित और 41 बच्चे ठिगने पाए गए। संवाद
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उम्र के हिसाब से इतनी होनी चाहिए लंबाई
डा. समद के अनुसार बच्चों की लंबाई का आकलन उम्र और लिंग के अनुसार किया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के विकास मानकों के मुताबिक जन्म के समय बच्चे की औसत लंबाई करीब 50 सेंटीमीटर, एक वर्ष में 75 सेंटीमीटर, दो वर्ष में 87 सेंटीमीटर, तीन वर्ष में 95-96 सेंटीमीटर, चार वर्ष में 102-103 सेंटीमीटर और पांच वर्ष में करीब 109-110 सेंटीमीटर होती है। उम्र के अनुपात में लंबाई कम होने पर बच्चे को ठिगनेपन की श्रेणी में रखा जा सकता है।
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कम वजन वाले बच्चों को मिलेगा दोगुना पोषाहार
जिला कार्यक्रम अधिकारी यामिनी रंजन ने बताया कि बच्चों के पोषण स्तर में सुधार के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ओर से घर-घर जाकर वजन किया जा रहा है। जिन बच्चों का वजन कम पाया जाएगा, उन्हें दोगुना पोषाहार दिया जाएगा। अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी गई है।

ठिगनापन और कुपोषण के कारण

बच्चों को पर्याप्त पौष्टिक आहार न मिलना, मां का कुपोषित होना, बार-बार संक्रमण होना, साफ पानी और स्वच्छता की कमी तथा समय पर पूरक आहार न मिलना ठिगनेपन और कुपोषण के प्रमुख कारण हैं।
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