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शामली: बर्फीली हवा सेहत पर पड़ रही भारी, बरतें सावधानी
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- कई दिन तक मौसम गर्म रहने के बाद दो दिन से चल रही तेज ठंडी हवा
- अस्पतालों में बुखार, नजला, जुकाम के बढ़े मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिले के मौसम में लगातार हो रहे बदलाव सेहत पर भारी पड़ रहा है। कई दिन तक मौसम गर्म रहने के बाद दो दिन से तेज बर्फीली हवाएं चल रही है। अस्पतालों में नजला, जुकाम व वायरल बुखार के मरीज बढ़ रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि बदलते मौसम में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
जिले में पिछले सप्ताह में तापमान ज्यादा रहने से मौसम गर्म चल रहा था। अब दो दिन से बर्फीली हवाएं चल रही है। ठंडी हवाएं चलने से फिर से मौसम ठंडा हो गया है। बार-बार मौसम में हो रहे बदलाव से लोग बीमार हो रहे हैं। खासतौर से बुजुर्ग और बच्चे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। सरकारी व निजी अस्पतालों में वायरल बुखार, नजला, जुकाम व खांसी के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि दो दिन में इस तरह के मरीजों में करीब 15 प्रतिशत मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
फिजिशियन डॉ. पंकज गर्ग ने बताया कि मौसम गर्म होने से लोगों ने कपड़े पहनने कम कर दिए थे। ऊनी व गर्म कपड़ों का पहनना छोड़ दिया था। अब दो दिन से तेज ठंडी हवा चल रही है, इससे मौसम अचानक से फिर ठंडा हो गया है। रात में ठंड ज्यादा हो रही है। बदलते मौसम में लोग कपड़े पहनने में लापरवाही बरत रहे हैं, जिस वजह से बुखार, नजला, जुकाम के मरीज बढ़ गए हैं। बुजुर्गों व बच्चों पर मौसम में बदलाव का असर ज्यादा पड़ता है। ठंड की वजह से सिर दर्द से पीड़ित मरीज भी आ रहे हैं। श्वास के मरीजों को भी इस तरह के मौसम में सावधानी बरतने की जरूरत है। उनका कहना है कि मौसम के बदलने के अनुसार कपड़े पहनने चाहिए। इसमें लापरवाही स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। सीएचसी के चिकित्सक उपकार मलिक ने बताया कि निमोनिया, सर्दी, जुकाम व नजला से पीड़ित बच्चे ज्यादा आ रहे हैं। इसकी वजह पहले मौसम का गर्म होना और अब तेज हवा चलने से मौसम में ठंड होना माना जा रहा है। सीएचसी के चिकित्साधिक्षक डॉ. रामनिवास का कहना है कि अस्पताल में मरीजों के लिए पर्याप्त मात्रा में दवा उपलब्ध है। सभी मरीजों की जांच कर दवा दी जा रही है।
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फसलों को नुकसान पहुंचा रही तेज हवा
तेज हवा चलने से फसलों को खासतौर से गेहूं व सरसों की फसल को नुकसान हो रहा है। बधेव निवासी किसान अक्षय देशवाल, टिटौली निवासी राजीव शास्त्री का कहना है कि तेज हवा चलने से गेहूं व सरसों की फसल में नमी खत्म हो रही है, इससे फसल प्रभावित हो रही है और पानी देना पड़ता है। गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए खेत में नमी बना रहना जरूरी है।
सड़क पर उड़ती धूल से लोग परेशान
तेज हवा चलने से सड़कों पर धूल उड़ रही है जो आने-जाने वाले लोगों व वाहन चालकों की आंखों में घुसकर परेशानी का कारण बन रही है। जहां पर कच्चा मार्ग है, या क्षतिग्रस्त है, वहां पर धूल के कण आंखों में घुसने से ज्यादा परेशानी पैदा कर रहे हैं।
ये बरते सावधानी
- ठंडा पानी पीने से परहेज रखें।
-गला खराब हो तो गर्म पानी के गरारे करें और भाप ले।
- श्वास के मरीज नियमित रूप से दवा लेते रहें।
- सुबह-शाम को ठंडे मौसम में शरीर को ढकने वाले कपड़े पहने।
- बुजुर्ग और बच्चे सुबह शाम घर से बाहर न निकले।
- तेज हवा से बचने के उपाय करें।
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- अस्पतालों में बुखार, नजला, जुकाम के बढ़े मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिले के मौसम में लगातार हो रहे बदलाव सेहत पर भारी पड़ रहा है। कई दिन तक मौसम गर्म रहने के बाद दो दिन से तेज बर्फीली हवाएं चल रही है। अस्पतालों में नजला, जुकाम व वायरल बुखार के मरीज बढ़ रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि बदलते मौसम में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
जिले में पिछले सप्ताह में तापमान ज्यादा रहने से मौसम गर्म चल रहा था। अब दो दिन से बर्फीली हवाएं चल रही है। ठंडी हवाएं चलने से फिर से मौसम ठंडा हो गया है। बार-बार मौसम में हो रहे बदलाव से लोग बीमार हो रहे हैं। खासतौर से बुजुर्ग और बच्चे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। सरकारी व निजी अस्पतालों में वायरल बुखार, नजला, जुकाम व खांसी के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि दो दिन में इस तरह के मरीजों में करीब 15 प्रतिशत मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
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फिजिशियन डॉ. पंकज गर्ग ने बताया कि मौसम गर्म होने से लोगों ने कपड़े पहनने कम कर दिए थे। ऊनी व गर्म कपड़ों का पहनना छोड़ दिया था। अब दो दिन से तेज ठंडी हवा चल रही है, इससे मौसम अचानक से फिर ठंडा हो गया है। रात में ठंड ज्यादा हो रही है। बदलते मौसम में लोग कपड़े पहनने में लापरवाही बरत रहे हैं, जिस वजह से बुखार, नजला, जुकाम के मरीज बढ़ गए हैं। बुजुर्गों व बच्चों पर मौसम में बदलाव का असर ज्यादा पड़ता है। ठंड की वजह से सिर दर्द से पीड़ित मरीज भी आ रहे हैं। श्वास के मरीजों को भी इस तरह के मौसम में सावधानी बरतने की जरूरत है। उनका कहना है कि मौसम के बदलने के अनुसार कपड़े पहनने चाहिए। इसमें लापरवाही स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। सीएचसी के चिकित्सक उपकार मलिक ने बताया कि निमोनिया, सर्दी, जुकाम व नजला से पीड़ित बच्चे ज्यादा आ रहे हैं। इसकी वजह पहले मौसम का गर्म होना और अब तेज हवा चलने से मौसम में ठंड होना माना जा रहा है। सीएचसी के चिकित्साधिक्षक डॉ. रामनिवास का कहना है कि अस्पताल में मरीजों के लिए पर्याप्त मात्रा में दवा उपलब्ध है। सभी मरीजों की जांच कर दवा दी जा रही है।
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फसलों को नुकसान पहुंचा रही तेज हवा
तेज हवा चलने से फसलों को खासतौर से गेहूं व सरसों की फसल को नुकसान हो रहा है। बधेव निवासी किसान अक्षय देशवाल, टिटौली निवासी राजीव शास्त्री का कहना है कि तेज हवा चलने से गेहूं व सरसों की फसल में नमी खत्म हो रही है, इससे फसल प्रभावित हो रही है और पानी देना पड़ता है। गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए खेत में नमी बना रहना जरूरी है।
सड़क पर उड़ती धूल से लोग परेशान
तेज हवा चलने से सड़कों पर धूल उड़ रही है जो आने-जाने वाले लोगों व वाहन चालकों की आंखों में घुसकर परेशानी का कारण बन रही है। जहां पर कच्चा मार्ग है, या क्षतिग्रस्त है, वहां पर धूल के कण आंखों में घुसने से ज्यादा परेशानी पैदा कर रहे हैं।
ये बरते सावधानी
- ठंडा पानी पीने से परहेज रखें।
-गला खराब हो तो गर्म पानी के गरारे करें और भाप ले।
- श्वास के मरीज नियमित रूप से दवा लेते रहें।
- सुबह-शाम को ठंडे मौसम में शरीर को ढकने वाले कपड़े पहने।
- बुजुर्ग और बच्चे सुबह शाम घर से बाहर न निकले।
- तेज हवा से बचने के उपाय करें।